Home » बिज़नेस » Urban Middle class is replaced by Rural agrarian community in Budget 2016-17
 

बजट 2016-17: यह सूट-बूट नहीं, खेत खलिहान का बजट है

अभिषेक पराशर | Updated on: 1 March 2016, 8:17 IST
QUICK PILL
  • अक्सर सरकार के खिलाफ बयान देकर मोदी को असहज स्थिति में डालने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य लालकृष्ण आडवाणी ने जेटली की पीठ थपथपाते हुए कहा कि उन्होंने संसद में कई बजट पेश होते देखा है लेकिन जेटली का बजट अब तक का सबसे बेहतरीन बजट है.
  • कृषि क्षेत्र को दिए गए आवंटन को लेकर विश्लेषकों का कहना है कि सरकार की मंशा भले ही उदार दिख रही हो लेकिन उसने घोषणा के मुताबिक फंड आवंटन करने में कंजूसी बरती है.
  • स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव ने ट्वीट कर कहा, \'सरकार बजट में किसानों के मामले में शब्दों के आधार पर उदार दिखती है लेकिन कृषि के लिए 36,000  करोड़ रुपया 70 करोड़ की आबादी के हिसाब से प्रति व्यक्ति महज 500 रुपये है.\'

बतौर वित्तमंत्री अरुण जेटली का यह तीसरा बजट था. बजट के बाद की स्थिति को देखकर यह कहा जा सकता है कि न तो बाजार को ऐसे बजट की उम्मीद थी और नहीं किसानों को इसका अंदाजा रहा होगा. 

बाजार की प्रतिक्रिया का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब वित्तमंत्री बजट पढ़ रहे थे तब बाजार में भारी उठापटक मची हुई थी. सोमवार को सेंसेक्स में 600 से अधिक अंकों की गिरावट आई. आखिरी घंटों में आई रिकवरी ने बाजार को राहत दी और आखिरकार सेंसेक्स करीब 150 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ. 

बजट 2017 में शहरी अर्थव्यवस्था और मध्य वर्ग की जगह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को वरीयता दी गई. 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के मद्देनजर ग्राम पंचायतों और नगर निकायों को 2.87 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया जो पिछले पांच सालों में आवंटित रकम के मुकाबले 228 फीसदी अधिक है. 

और पढ़ें: राजकोषीय घाटे को काबू में रखेगी सरकार

सरकार ने एक मई 2018 तक सभी गांवों में बिजली पहुंचाने की घोषणा की और इसके साथ ही 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा किया. ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए सरकार ने 35,984 करोड़ रुपये आवंटित किए.

कृषि क्षेत्र को दिए गए आवंटन को लेकर विश्लेषकों का कहना है कि सरकार की मंशा भले ही उदार दिख रही हो लेकिन उसने घोषणा के मुताबिक फंड आवंटन करने में कंजूसी बरती है. 

स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव ने ट्वीट कर कहा, 'सरकार बजट में किसानों के मामले में शब्दों के आधार पर उदार दिखती है लेकिन कृषि के लिए 36,000  करोड़ रुपया 70 करोड़ की आबादी के हिसाब से प्रति व्यक्ति महज 500 रुपये है.'

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'लगभग 2,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी से नाबार्ड में एक दीर्घकालिक सिंचाई नीति बनाई जाएगी.'

सबसे अहम घोषणा कर्ज को लेकर की गई. सरकार ने 2016-17 के लिए कृषि कर्ज का लक्ष्य नौ लाख करोड़ रुपये रखा है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये की रकम दी गई है. 

2015-16 के 8.5 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 2016-17 में 9 लाख करोड़ रुपये कृषि कर्ज का लक्ष्य रखा गया है

बजट से कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश की एक रैली में मोदी ने किसानों के बीच फसल बीमा के फायदों का जिक्र करते हुए इसे अपनी सरकार की अहम उपलब्धि के तौर पर गिनाया था. 

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी गई तरजीह के पीछे के राजनीतिक कारणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. बिहार में चुनाव हारने के बाद नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतने की है.

बिहार में बीजेपी की हार के लिए कई कारणों में से एक कारण महंगाई भी थी. इसके अलावा भूमि अधिग्रहण कानून को लेकर विपक्ष जनता के बीच यह बात साबित करने में सफल रहा कि मोदी सरकार किसान विरोधी है. बिहार की बड़ी आबादी कृषि से जुड़ी है और ऐसा ही उत्तर प्रदेश और पंजाब के साथ है. पंजाब में किसानों की बदहाली का मुद्दा वहां का चुनावी एजेंडा है. 

ऐसे में मोदी सरकार ने बजट में कॉरपोरेट को उम्मीद के मुताबिक जगह नहीं देकर किसानों के बीच अपनी छवि को दुरुस्त करने की कोशिश की है. 

कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथ ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'बजट 2016 को हर संभव तरीके से किसानों के पक्ष में रखने की कोशिश की गई है. कृषि क्षेत्र के कायाकल्प और नए युग की नींव रख दी गई है.'

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने बजट को मध्य वर्ग के साथ धोखा करार दिया. केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, 'नरेंद्र मोदी सरकार ने मध्य वर्ग के साथ धोखा किया है.' 

दिलचस्प है कि केजरीवाल दिल्ली में मध्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं वहीं पंजाब में उनकी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी-अकाली गठबंधन के खिलाफ किसानों की दयनीय स्थिति को मुद्दा बना रही है.

महंगी हुई सेवाएं

सरकार ने सर्विस सेक्टर को भी राहत नहीं दी है. सभी सर्विसेज पर सरकार ने एक जून 2016 के बाद से कृषि कल्याण सेस लगाने का फैसला लिया है. सेस की वजह से रेस्त्रां में खाना, ब्यूटी पॉर्लर में जाना, हवाई यात्रा और सिनेमा के टिकट समेत अन्य सेवाओं के लिए उपभोक्ताओं को ज्यादा भुगतान करना होगा. 

और पढ़ें: बजट 2016-17: कार और सिगरेट हुई महंगी

सर्विस टैक्स में सेस की वजह से सबसे ज्यादा शहरों में रहने वाले मध्यमवर्गीय परिवार प्रभावित होंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर अपेक्षाकृम कम होगा. वहीं शेयरों की खरीद बिक्री के मामले में अब सिक्योरिटी ट्रांजैक्शंस दर को 0.017 से बढ़ाकर 0.05 पर्सेंट कर दिया गया है.

वहीं सुपर रिच यानी सालाना एक करोड़ से ज्यादा की आमदनी वालों को मौजूदा 12 पर्सेंट की जगह 15 पर्सेंट का टैक्स भरना होगा.

ऑटोमोबाइल को नहीं मिली राहत

सरकार ने 10 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों की खरीद पर अतिरिक्त एक फीसदी का टैक्स लगाया है. वहीं छोटी पेट्रोल, एलपीजीऔर सीएनजी कारों पर एक फीसदी का इंफ्रा सेस लगेगा. डीजल कारों पर 2.5 फीसदी जबकि एसयूवीज पर 4 फीसदी का सेस लगेगा. 

सरकार के इस फैसले से कारें महंगी हो जाएंगी. हालांकि यह फैसला प्रदूषण को कम करने और हाईब्रिड वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए किया गया है. कारों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर वाहन कंपनियों पर देखने को मिला. 

लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बजट को कॉरपोरेट के लिए तैयार किया गया बजट करार दिया. खड़गे ने कहा, 'बजट में उनके (मोदी सरकार) के करीबी कॉरपोरेट को छोड़कर किसी के लिए कुछ भी नहीं है.' 

जबकि सीपीआई नेता डी राजा ने कहा, 'बजट के बाहर जाकर वह कॉरपोरेट को बहुत कुछ देने का वादा कर चुके हैं. अभी यह नहीं दिख रहा है. बजट में कुछ भी नया नहीं है.'

नौकरी पेशा समुदाय को झटका

2016-17 के आम बजट में जेटली ने ईपीएफ और अन्य योजनाओं में सभी स्तरों पर छूट की पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है. एक अप्रैल 2016 के बाद किए गए अंतिम निकासी के समय 60 फीसदी योगदान पर रिटायरमेंट टैक्स लगाने का फैसला किया गया है. 

फिलहाल ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) की तरफ से संचालित सभी योजनााएं पूरी तरह टैक्स छूट के दायरे में आती है. 

छोटे टैक्स पेयर्स को राहत

सरकार ने छोटे टैक्स पेयर्स को राहत देते हुए 5 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों के लिए कर छूट की अधिकतम सीमा 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी है.

  1. हालांकि व्यक्ति आयकर की दरों और टैक्स ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
  2. किराए में रहने वाले लोगों को 24,000 रुपये की जगह 60,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई है.
  3. पहली बार मकान खरीदने वाले को ब्याज में 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिली है.

रियल एस्टेट इंडस्ट्री ने बजट का स्वागत किया है. जेएलएल इंडिया के कंट्री हेड और चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, 'सरकार ने एचआरए छूट की सीमा बढ़ाने, रिट्स से डीडीटी को खत्म करने और निर्माण कंपनियों के मुनाफे पर 100 फीसदी छूट देकर' इंडस्ट्री की समस्याओं का समाधान किया है. हालांकि प्रोजेक्ट में होने वाली देरी को लेकर घर की खरीदारी को वित्तीय सुरक्षा नहीं दी गई है.

सामाजिक सुरक्षा पर बढ़ा खर्च

मोदी सरकार ने मनरेगा से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समाजिक सुरक्षा की योजनाओं को धन आवंटित करने में कंजूसी नहीं की है.

और पढ़ें: एनपीए से जूझ रहे बैंकिंग सेक्टर को 25,000 करोड़ रुपये का बेल आउट

नई स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि सरकार प्रति परिवार एक लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराएगी. इसके अलावा दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत 3,000 मेडिकल स्टोर खोलेगी. सरकार ने राष्ट्रीय डायलिसिस सेवा कार्यक्रम भी शुरू करने का प्रस्ताव रखा है.

वहीं गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवार की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराने के लिए सरकार ने 2,000  करोड़ रुपये देने की घोषणा की है. सरकार की योजना 1.5 करोड़ बीपीएल परिवारों को मदद पहुंचाने की है.

एससी-एसटी और महिलाओं में कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने स्टैंड अप इंडिया योजना को मंजूरी देते हुए इसके लिए 500 करोड़ रुपये का फंड मुहैया कराया है. 

जेटली ने उच्च शिक्षा के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है.  62 नए नवोदय स्कूल भी खोले जाने की घोषणा की गई है

बजट की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'बजट 2016 की मदद से गांवों को बदलने और किसानों, महिलाओं एवं हाशिए पर पड़े लोगों की जिंदगी बदलने का मौका मिलेगा.'

मनरेगा पर मेहरबान

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने मनरेगा को 'कांग्रेस की विफलताओं का जीता-जागता स्मारक' करार दिया था. जेटली ने ग्रामीण रोजगार गारंटी की इस योजना को 2016-17 के लिए 38,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. जबकि मोदी ने खुद इस योजना को लेकर कांग्रेस पर ताना मारा था.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा, 'बजट में सभी सभी क्षेत्रों को बराबर तरजीह दी गई है.' सिन्हा मोदी सरकार के आलोचकों में शुमार किए जाते हैं.

बुनियादी ढांचे पर जोर

सरकार ने सड़क और राजमार्गों के लिए बजट में 55,000  करोड़ रुपये का आवंटन किया है. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना सहित सड़क क्षेत्र के लिए सरकार ने 2016-17 के लिए 97,000  करोड़ रुपये की राशि का आवंटन किया है. 

इसके अलावा बंदरगाहों को विकसित करने के लिए 800 करोड़ रुपये और राज्यों के साथ मिलकर 160 हवाई अड्डों को विकसित करने की योजना बनाई गई है. एनएचएआई को बॉन्ड के जरिये 15,000 करोड़ रुपये जुटाने की अनुमति होगी. 

पुरी ने कहा, 'राज्यों के साथ मिलकर 100-150 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट का कायाकल्प कर टियर-2 और टियर-3  शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद मिलेगी.' 

सब्सिडी में कटौती कर हुई भरपाई

कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर किए गए आवंटन की भरपाई सरकार ने दूसरे क्षेत्र के आवंटन में कटौती कर पूरा करने की कोशिश की है. 

बजट 2016-17 में सरकार फूड, फर्टिलाइजर और पेट्रोलियम पर दी जाने वाली सब्सिडी में 4 फीसदी की कटौती कर इसे 2.31 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. 

संसद में पेश किए बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2016-17 के लिए फूड, पेट्रोलियम और फर्टिलाइजर पर दी जाने वाली सब्सिडी की रकम 2,31,781.61 करोड़ रुपये रखी है. जबकि 2015-16 के लिए यह रकम 2,41,856.58 करोड़ रुपये थी.

अक्सर सरकार के खिलाफ बयान देकर मोदी को असहज स्थिति में डालने वाले बीेजेपी के वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य लालकृष्ण आडवाणी ने इसे 'अब तक सबसे बेहतीन बजट करार दिया है.' 

आडवाणी ने जेटली की पीठ थपथपाते हुए कहा कि उन्होंने संसद में कई बजट पेश होते देखा है लेकिन जेटली का बजट अब तक का सबसे बेहतरीन बजट है.

और पढ़ें: अच्छी खबर: घर खरीदने पर मिलेगी 50,000 रुपये की छूट

और पढ़ें: एलपीजी और पेट्रोलियम सब्सिडी पर चली सरकार की कैंची

और पढ़ें: बजट 2016-17: फूड प्रोडक्ट्स में 100 फीसदी एफडीआई

First published: 1 March 2016, 8:17 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी