Home » बिज़नेस » Urjit Patel To Institutionalise Policy Changes At RBI To Curb Inflation: Fitch
 

महंगाई नियंत्रण की आरबीआई की नीति को आगे बढाएंगे ऊर्जित पटेल: फिच

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 September 2016, 17:06 IST
QUICK PILL
  • वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि आरबीआई के नए गवर्नर ऊर्जित पटेल महंगाई को रोकने और बैंकों की सेहत सुधारने के लिए शुरू की गई पहल को और अधिक संस्थागत रूप देंगे.
  • एजेंसी ने कहा कि महंगाई दर में होने वाली गिरावट से भारत की क्रेडिट रेटिंग पर सकारात्मक असर होगा और निवेश माहौल में तेजी से सुधार होगा.
  • ब्याज दरों को लेकर केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बीच हमेशा से टकराव की स्थिति रही है. पूर्व गवर्नर रघुराम राजन महंगाई को नियंत्रित किए जाने को लेकर सख्त मौद्रिक नीति के पैरोकार थे.

ऊर्जित पटेल के नेतृत्व में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से महंगाई को काबू में रखने वाली नीतियों को आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद है. वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने अपनी रिपोर्ट में ऐसी उम्मीद जताते हुए कहा कि पटेल महंगाई को रोकने के लिए संस्थागत तरीकों का इस्तेमाल करते हुए बैंकों के बचत खाते को भी सुधारने पर ध्यान देंगे.

फिच ने कहा अगर भारत नई मौद्रिक नीति के तहत महंगाई को काबू करने में सफल रहता है तो इससे रेटिंग में सुधार होने के साथ ही देश में निवेश का माकूल माहौल बनेगा, जिससे आर्थिक वृद्धि में मजबूती आएगी. फिच ने फिलहाल भारत की रेटिंग बीबीबी माइनस के साथ स्थिर परिदृश्य रखी है. 

रिपोर्ट बताती है कि भारत की मौजूदा मौद्रिक नीति काफी व्यापक है और इससे यह जाहिर होता है कि 2 फीसदी महंगाई दर बेहद कम है जबकि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए 6 फीसदी की महंगाई दर बेहद अधिक है. 

ब्याज दरों को लेकर केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बीच हमेशा से टकराव की स्थिति रही है

फिच में एशिया पैसिफिक सॉवरिन ग्रुप्स के डायरेक्टर थॉमस रुकमाकर ने कहा, 'कम महंगाई दर से भारत की सॉवरिन रेटिंग पर सकारात्मक असर होगा क्योंकि यह निवेश की स्थिति में सुधार लाएगा जो आखिरकार आर्थिक वृद्धि को बढ़ाने में मददगार होगा.'

आरबीआई के नए गवर्नर के तौर पर पटेल को लेकर फिच ने कहा कि उसे लगता है कि नीतियों से ब्याज दरें तय होंगी न कि किसी व्यक्ति विशेष से. पटेल आने वाले दिनों में ब्याज दरों को तय किए जाने की प्रक्रिया को और अधिक संस्थागत रूप देंगे.

सरकार और आरबीबाई में टकराव

राजन महंगाई रोकने के लिए सख्त मौद्रिक नीति के पक्षधर रहे हैं. ब्याज दरों को लेकर केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बीच हमेशा से टकराव की स्थिति रही है. पूर्व गवर्नर रघुराम राजन महंगाई को नियंत्रित किए जाने को लेकर सख्त मौद्रिक नीति के पैरोकार थे. राजन को इस वजह से राजनीतिक तौर पर निशाना भी बनाया गया लेकिन उन्होंने अपनी नीति को सख्ती से जारी रखा. 

इतना ही नहीं राजन ने अपने कार्यकाल के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सेहत सुधारने के लिए कई ठोस पहल किया. मौद्रिक नीति को लेकर सरकार और आरबीआई के बीच होने वाले मतभेद पर टिप्पणी करते हुए फिच ने इसे सामान्य करार दिया.

रिपोर्ट कहती हैं, 'सवाल यह है कि आखिर किस हद तक दबाव बनाकर केंद्रीय बैंक को सरकार के मुताबिक चलने के लिए कहा जाता है. महंगाई को नियंत्रित में करने की व्यवस्था स्थापित हो चुकी है और इससे ऐसे दबाव को कम करने का मौका मिलेगा.'

यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में आरबीआई की क्या नीति होती है. मौद्रिक नीति तय करने वाली कमेटी में सरकार और आरबीआई दोनों की तरफ से सदस्यों की नियुक्ति की जाती है.

ऊर्जित पटेल गवर्नर बनने से पहले इस टीम का सदस्य रह चुके हैं. यह समिति आरबीआई की मौद्रिक नीति को तय करने का काम करती है. फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'पटेल तीन सालों तक आरबीआई का डिप्टी गवर्नर रह चुके हैं और यह बताता है कि आने वाले दिनों में मौजूदा नीति जारी रहेगी.'

दूसरे कार्यकाल नहीं मिलने का अफसोस

मौजूदा गवर्नर रघुराम राजन का कार्यकाल 4 सितंबर को समाप्त हो रहा है. उनकी जगह ऊर्जित पटेल को गवर्नर बनाया गया है. राजन ने आज कहा कि मैंने जो काम शुरू किए थे, वह अभी अधूरा ही है और यही वजह थी कि मैं रुकना चाहता था. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

पहली बार राजन ने इस बात को स्वीकार किया वह बतौर गवर्नर दूसरा कार्यकाल चाहते थे लेकिन सरकार से बात नहीं बन पाई. उन्होंने कहा कि मेरे और सरकार के बीच कोई समझौता नहीं हो सकता.

ब्याज दरों में कटौती नहीं किए जाने के फैसले का फिर से बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि महंगाई को रोकने के लिए उनके पास जो भी विकल्प था, उन्होंने उसका इस्तेमाल किया.

First published: 2 September 2016, 17:06 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी