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कैसे अमेरिका और चीन के ट्रेड वॉर ने भारत को बना दिया मालामाल ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2018, 13:14 IST

अमेरिका और चीन के चल रहे व्यापार विवाद के बीच वैश्विक कॉटन बाजार में भारत को बड़ा लाभ होने की संभावना है. क्योंकि अमेरिका दुनिया के बड़ा निर्यातक है और चीन सबसे बड़ा खरीदार. जबकि कमजोर रुपया भारत के निर्यात को और अधिक आकर्षक बना रहा है. मंगलवार को कॉटन की कीमतें न्यूयॉर्क में आईसीई फ्यूचर्स यूएस पर एक्सचेंज सीमा से गिर गई और 6 जून को चार साल के उच्चतम 94.82 सेंट की गिरावट के साथ 12% पर पहुंची.

विदेशी बाजारों में कॉटन की बढ़ती मांग से दो सप्ताह के दौरान सूती धागे के दामों में 10 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई है. अमेरिका और चीन के बीच चल रहा व्यापार युद्ध के कारण चीन ने अमेरिका से आयात की जाने वाले कॉटन पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगाया है. चीन इस मांग को भारत से आयात के जरिये पूरी कर रहा है.

वर्तमान में 40 काउंट सूती धागा 240 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा है, जबकि इस महीने की शुरुआत में इसके दाम 215-218 रुपये प्रति किलोग्राम थे.

राजकोट के सूती धागे निर्माताओं का कहना है की दामों में यह मौजूदा उछाल चीन और बांग्लादेश जैसे आयात करने वाले देशों की ओर से इसकी मांग में अचानक आई तेजी की वजह से है. वर्तमान में भारत ने सबसे बड़े खरीदार चीन से पांच लाख गांठों अनुबंध किया है. चीन ने इस सीजन में अमेरिका से लगभग 1.5 मिलियन कॉटन खरीदा.

भारत के कपास एसोसिएशन ने पिछले हफ्ते कहा है इस बार भारत कॉटन निर्यात में वृद्धि होने की संभावना है. जबकि उत्पादन में भी 8.3% की वृद्धि होगी. भारत सरकार अतिरिक्त आयात कोटा जारी करने की योजना भी बना रही है क्योंकि प्रतिकूल मौसम ने घरेलू फसल को नुकसान पहुंचाया है, और उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर लूम में कमी आयी है.

यू.एस. में कपास वायदा इस वर्ष 21% तक बढ़ गया क्योंकि सूखे ने पश्चिमी टेक्सास के शीर्ष उत्पादक क्षेत्र में फसल की संभावनाओं को खत्म कर दिया.

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First published: 20 June 2018, 13:11 IST
 
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