Home » बिज़नेस » V.G. Siddhartha: story of the coffee king in a country of tea culture
 

वीजी सिद्धार्थ: चाय पीने वालों के देश में कॉफी किंग बनने की पूरी कहानी

सुनील रावत | Updated on: 31 July 2019, 16:27 IST

वीजी सिद्धार्थ की मौत ने समूचे कारोबारी जगत को हैरत मेंडाल दिया है. हजारों लोगों को रोजगार देने वाले सिद्धार्थ अंदर से इतने कमजोर हो गए थे इसका अंदाजा लगाना हर किसी के लिए मुश्किल है. बोर्ड और परिवार के नाम लिखे पत्र में सिद्धार्थ ने कई बातों का जिक्र किया लेकिन भारत सहित दुनियाभर में उनके कारोबार की सफलता की कहानी इतनी आसान नहीं थी. सिद्धार्थ एक इन्वेस्टमेंट बैंकर बनना चाहते थे और उनकी रूचि अपने परिवार के कॉफी व्यवसाय में बहुत कम थी लेकिन जर्मन कॉफी चेन टिचीबो के मालिकों के साथ एक मुलाकात के बाद सिद्धार्थ ने स्टारबक्स के सामने भारतीय प्रतिद्वंद्वी की स्थापना कर डाली.

भारत की सबसे बड़े कॉफ़ी चेन कैफे कॉफ़ी डे के संस्थापक सिद्धार्थ के लापता होने के कुछ दिनों बाद बुधवार को उनकी मृत्यु की पुष्टि की गई. उनके द्वारा लिखे गए एक कथित पत्र ने संकेत दिया कि बैंकों, निवेशक और कर अधिकारियों के दबाव ने आत्महत्या करने के लिए विवश कर दिया था. सिद्धार्थ एक ऐसे परिवार से निकले जिनके परिवार के साथ कॉफी का 140 साल का इतिहास रहा है. सिद्धार्थ, शुरू में स्टॉक ट्रेडिंग में काम करते थे और मैंगलोर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद मुंबई में एक निवेश बैंकर के रूप में काम करना चाहते थे.

1984 में उन्होंने बैंगलोर में अपनी खुद की निवेश और उद्यम पूंजी फर्म सिवन सिक्योरिटीज शुरू की और कर्नाटक के चिकमगलूर जिले में कॉफी बागान खरीदने के लिए अपने स्टार्ट-अप से मुनाफे का निवेश करना शुरू किया. इसके साथ ही सिद्धार्थ ने परिवार के कॉफी व्यवसाय में भी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी. 1993 में उन्होंने 6 करोड़ से अधिक के वार्षिक कारोबार के साथ Amalgamated Bean Company (ABC) नामक एक कॉफ़ी ट्रेडिंग कंपनी की स्थापना की और कुछ वर्षों में यह बढ़कर 2,500 करोड़ से अधिक की हो गई.

एक जर्मन कॉफी श्रृंखला टीचीबो के मालिक के साथ एक चैट से प्रेरित होकर, सिद्धार्थ ने एक ऐसे देश में कैफे की अपनी श्रृंखला खोलने का फैसला किया, जहां कॉफी का कोई सांस्कृतिक आधार नहीं था. उन्होंने 1994 में कैफे कॉफी डे का पहला आउटलेट बैंगलोर के ब्रिगेड रोड पर इस टैग लाइन के साथ खोला 'एक कप कॉफी पर बहुत कुछ हो सकता है'. ('A lot can happen over a cup of coffee').

भारत में कॉफी की दुकानों की अब यह सबसे बड़ी श्रृंखला बन चुकी है,जो चाय पीने वालों का देश है. कॉफी कैफे डे जिके 200 से ज्यादा शहरों में 1,750 से ज्यादा कैफे हैं. सिद्धार्थ वर्तमान में 200 अनन्य खुदरा आउटलेट हैं जो पूरे दक्षिण भारत में अपने ब्रांड कॉफी डे पाउडर की बिक्री करते हैं. एबीसी ग्रीन कॉफी का भारत का सबसे बड़ा निर्यातक भी है. अपने व्यावसायिक पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए, सिद्धार्थ ने आईटी क्षेत्र में कदम रखा और ग्लोबल टेक्नोलॉजी वेंचर्स लिमिटेड की स्थापना की, जो प्रौद्योगिकी कंपनियों की पहचान और निवेश करता है. उन्होंने निवेश फर्म सिवन सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ वित्तीय क्षेत्र में भी प्रवेश किया.

कंपनी की तीन सहायक कंपनियां हैं. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद सिद्धार्थ ने सितंबर 2017 में खुद को मुसीबत में पाया, जब आयकर (आई-टी) विभाग ने उनसे जुड़े 20 से अधिक स्थानों पर छापे मारे. उनके कॉफी डे एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने 31 मार्च, 2018 को समाप्त वित्त वर्ष में शुद्ध घाटा बढ़ाकर 67.71 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष उन्हें 22.28 करोड़ का नुकसान हुआ था. कथित तौर पर वह न्यूयॉर्क स्थित निजी इक्विटी दिग्गज ब्लैकस्टोन ग्रुप को अपने रियल एस्टेट वेंचर तांगलिन डेवलपमेंट्स लिमिटेड को बेचने के लिए बातचीत कर रहे थे.

माइंडट्री की बिक्री ने उनकी वित्तीय स्थिति में बहुत सुधार किया था और अचल संपत्ति के सौदे ने उनके ऋण में और कटौती की होगी. वह कॉफ़ी डे एंटरप्राइजेज को बेचने के लिए भी बातचीत कर रहे थे, जहां उन्होंने 32.75 प्रतिशत हिस्सेदारी कोका-कोला को दी, जो कि 1.45 बिलियन अमरीकी डालर के बराबर थी. सिद्धार्थ के सीसीडी बोर्ड को लिखे एक पत्र में दावा किया गया था कि उन पर निजी इक्विटी भागीदारों में से एक द्वारा दबाव डाला जा रहा था.

पत्र में आई-टी विभाग के अधिकारी द्वारा उत्पीड़न के बारे में भी बात की गई थी, जिन्होंने शुरुआत में माइंडट्री में अपने शेयर संलग्न किए थे. हालांकि I-T विभाग ने पत्र में किए गए आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि इस पर हस्ताक्षर इसके साथ उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं. उनकी पत्नी, मालविका हेगड़े, जिनके साथ उनके दो बच्चे हैं, जो सीसीडी बोर्ड में शामिल हैं.

CCD के मालिक वीजी सिद्धार्थ की मौत के बाद चर्चा में क्यों है ये IT कमिश्नर ?

First published: 31 July 2019, 16:10 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी