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एसबीआई के महाबैंक बनने का रास्ता साफ

अभिषेक पराशर | Updated on: 19 August 2016, 22:37 IST
QUICK PILL
  • बैंक कर्मचारियों के विरोध को दरकिनार करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ पांच अन्य सहयोगी बैंकों के निदेशक मंडल (बोर्ड) ने एसबीआई के साथ विलय योजना के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है.
  • बैंकों के विलय के बाद बनने वाले महाबैंक से न केवल बैंकिंग परिचालन अधिक सक्षम और मजबूत होगा बल्कि इनकी परिसंपत्तियों का भी विस्तार होगा. साथ ही एक बड़े बैंक की स्थिति में बैंकिंग नेटवर्क ज्यादा मजबूत और सक्षम होगा. 
  • विलय और शेयरों की अदला-बदली संबंधी प्रस्ताव को मंजूर किए जाने के बाद एसबीआई के शेयर बीएसई सेंसेक्स में शानदार 4.15 फीसदी की मजबूती के साथ 258.50 रुपये पर बंद हुआ.

बैंक कर्मचारियों के विरोध को दरकिनार करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ पांच अन्य सहयोगी बैंकों के निदेशक मंडल (बोर्ड) ने एसबीआई के साथ विलय योजना के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है.

विलय प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के साथ ही स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ ट्र्रावणकोर, भारतीय महिला बैंक, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद एवं स्टेट बैंक ऑफ पटियाला का भारतीय स्टेट बैंक के साथ विलय का रास्ता साफ हो गया है. 

स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला गैर सूचीबद्ध बैंक हैं और यह पूरी तरह से एसबीआई की सहायक बैंक हैं.

विलय और शेयरों की अदला-बदली संबंधी प्रस्ताव को मंजूर किए जाने के बाद एसबीआई के शेयर बीएसई सेंसेक्स में शानदार 4.15 फीसदी की मजबूती के साथ 258.50 रुपये पर बंद हुआ. 

एसबीआई की शानदार तेजी ने बैंकिंग इंडेक्स को भी सहारा दिया और एसऐंडपी बैंकेक्स करीब 100 से अधिक अंकों की मजबूती के साथ 22,296.27 पर बंद हुआ. 

वहीं स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर का शेयर 1.47 फीसदी की तेजी के साथ 683.20 रुपये पर जबकि स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर के शेयर 6.17 फीसदी की मजबूती के साथ 537.05 रुपये पर बंद हुआ. 

हालांकि स्टेट बैंक ऑफ मैसूर में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली.स्टेट बैंक ऑफ मैसूर का शेयर 12.09 फीसदी की गिरावट के साथ करीब 76 रुपये टूटकर 546.55 रुपये पर बंद हुआ. 

स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर के 10 शेयर के बदले निवेशकों को एसबीआई के 22 शेयर मिलेंगे.

विलय योजना के तहत स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर के प्रत्येक 10 शेयर के बदले निवेशकों को एसबीआई के 22 शेयर मिलेंगे. वहीं स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के शेयरों को रद्द कर दिया जाएगा क्योंकि यह दोनों बैंक पूरी तरह से एसबीआई की सहायक कंपनी हैं. 

शेयरों की अदला-बदली योजना के तहत स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर के प्रत्येक 10 शेयरों के बदले निवेशकों को एसबीआई के 28 शेयर मिलेंगे.

जरूरी है महाबैंक का निर्माण

बैंकों के यूनियन सरकार की इस कोशिश का विरोध कर रहे हैं. ऑल इंडिया बैंकिंग एम्प्लॉयज एसोसिएशन कहता रहा है कि बड़े बैंक हमारी जरूरत नहीं है. हमारी जरूरत वैसे बैंक बनाने की जिसकी क्षमता मजबूत हो. लेकिन सरकार बदलते समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैंकों के एकीकरण की दिशा में कदम बढ़ा दिया है.

इससे पहले भी 2008 और 2010 में स्टेट बैंक ऑफ इंदौर और स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र के विलय का विरोध हुआ था. लेकिन सरकार अपने इस फैसले को लागू करने में सफल रही थी.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बढ़ते एनपीए और उनकी खराब हालत को देखते हुए सरकार की योजना 27 पीएसयू बैंकों के निजीकरण और विलय की है ताकि इन्हें पांच और छह बड़े बैंकों में बदला जा सके. 

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच के एक अनुमान के मुताबिक 2019 तक बासल 3 की बाध्यता को पूरा करने के लिए भारतीय बैंकों को करीब 90 अरब डॉलर के पूंजी की जरूरत होगी और इसमें से अधिकांश पूंजी की जरूरत देश के भीतर काम कर रहे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की होगी.

2016 में सरकार ने पुनपूर्जींकरण योजना के तहत सरकारी बैंकों में 22,900 करोड़ रुपये की पूंजी डाल भी चुकी है.

2016 में सरकार ने पुनपूर्जींकरण योजना के तहत सरकारी बैंकों में 22,900 करोड़ रुपये की पूंजी डाल भी चुकी है. इस योजना के तहत कुल 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी बैंकों को मुहैया कराई जानी है. 

पुनर्पूंजीकरण की सरकार की कोशिश के बावजूद बैंकों को इससे अधिक मात्रा में पूंजी की जरूरत होगी. आईसीआरए के अनुमान के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को इस अवधि में कम से कम 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी.

दूसरी तरफ बैंकों के बढ़ते एनपीए ने कार्यशील पूंजी की संकट को बढ़ा दिया है. आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में बैंकों के एनपीए में करीब 80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. मार्च 2016 में बैंकों का कुल एनपीए सितंबर 2015 के 2.8 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 4.6 फीसदी हो गया. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल एनपीए 6.1 फीसदी रहा जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों का एनपीए 4.6 फीसदी रहा.

बैंकों के विलय के बाद बनने वाले महाबैंक से न केवल बैंकिंग परिचालन अधिक सक्षम और मजबूत होगा बल्कि इनकी परिसंपत्तियों का भी विस्तार होगा. साथ ही एक बड़े बैंक की स्थिति में बैंकिंग नेटवर्क ज्यादा मजबूत और सक्षम होगा.

निवेश का मुफीद मौका

विश्ललेषकों ने बैंकों के विलय के फैसले को निवेशकों के लिए शानदार मौका करार दिया है. उनका कहना है कि निवेशकों को एसबीआई में लंबे समय के लिए बने रहना चाहिए. ब्रोकरेज एजेंसी बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच ने एसबीआई के 12 महीनों का टारगेट बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया है.

वहीं जेपी मॉर्गन ने कहा कि विलय के बाद एसबीआई की बाजार हिस्सेदारी में सुधार होगा. एजेंसी ने दीर्घकालिक अवसर बताया है. वहीं डॉयचे बैंक ने एसबीआई पर सकारात्मक रुख रखते हुए इसके टारगेट को बढ़ाकर 280 रुपये कर दिया है.

कोटक ने एसबीआई में निवेशा की सलाह बरकरार रखी है. कोटक ने एसबीआई का टारगेट 230 रुपये से बढ़ाकर 280 रुपये कर दिया है.  

First published: 19 August 2016, 22:37 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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