Home » बिज़नेस » Mallya Has Left No Other Option But To Return To India
 

माल्या कहना चाहते हैं कि उनके पास लौटने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है

अभिषेक पराशर | Updated on: 9 September 2016, 15:34 IST
QUICK PILL
  • यूबी ग्रुप के चेयरमैन और बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर विदेश भाग चुके शराब कारोबारी विजय माल्या ने दिल्ली की एक अदालत से भारत लौटने की इच्छा जताई है. 
  • माल्या की यह बात वैसे समय में सामने आई है जब बैंकों के समूह ने सुप्रीम कोर्ट से माल्या के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किए जाने की गुहार लगाई है. 
  • विजय माल्या का मामला अब केवल डिफॉल्टर्स तक सीमित नहीं रहा है बल्कि यह सियासी मुद्दा बन गया है.

यूबी ग्रुप के चेयरमैन और बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर विदेश भाग चुके शराब कारोबारी विजय माल्या ने दिल्ली की एक अदालत से भारत लौटने की इच्छा जताई है. उन्होंने कहा कि वह भारत लौटना चाहते हैं लेकिन इसके लिए अधिकारियों को उनका पासपोर्ट फिर से बहाल करना होगा.

ईडी ने माल्या को निजी तौर पर अधिकारियों के समक्ष पेश होने से मिली छूट को खारिज करने के लिए याचिका दायर की है. 

याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सुमित दास ने माल्या को फॉरेन एक्सचेंज रेग्युलेशन एक्ट के उल्लंघन से जुड़े मामले में अदालत में निजी तौर पर पेश होने का आदेश दिया. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले की जांच कर रहा है.

माल्या की यह अपील वैसे समय में सामने आई है जब बैंकों के समूह ने सुप्रीम कोर्ट से माल्या के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किए जाने की गुहार लगाई है. बैंकों की तरफ से दायर किए गए हलफनामे में यह बात साफ तौर पर कही गई है कि माल्या जानबूझकर अदालती आदेशा का उल्लंघन कर रहे हैं. 

बैंकों की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि माल्या और उनकी कंपनी किंगफिशयर एयरलाइंस ने उनके खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई को बेअसर करने के लिए अपनी संपत्तियों को बेचने की कोशिश की. 

कुछ दिनों पहले ही माल्या के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ईडी ने उनकी 6,600 करोड़ रुपये की संपत्ति और शेयरों को जब्त कर लिया था. ईडी ने महाराष्ट्र में करीब 200 करोड़ रुपये की कीमत वाली फॉर्म हाउस और बेंगलुरू में 800 करोड़ रुपये की कीमत के एक अपार्टमेंट को जब्त कर लिया था. 

जांच एजेंसी ने इसके अलावा यूबीएल और यूएसएल में माल्या के शेयरों को जब्त कर लिया था जिसकी कीमत करीब 3,000 करोड़ रुपये है. इसके बाद बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर माल्या के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किए जाने की अपील की. जिसके बाद माल्या ने देश आने की इच्छा जाहिर की.

कुछ दिनों पहले ही ईडी माल्या की 6,600 करोड़ रुपये की संपत्ति और शेयरों को जब्त कर चुकी है.

एसबीआई के एक  अधिकारी बताते हैं, 'माल्या के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है. बैंकों का पैसा लेकर विदेश भाग जाने का फैसला उन पर भारी पड़ रहा है. देश में रहते हुए वह इस स्थिति से बेहतर तरीके से निपट सकते थे. लेकिन अब उन पर भगोड़ा का ठप्पा लग चुका है. बैंक और अदालत अब उन्हें किसी तरह की रियायत देने को तैयार नहीं है.'

अधिकारी ने बताया कि आम तौर पर बैंक और कर्ज देने वाली एजेंसियां कॉरपोरेट को कर्ज चुकाने के मामले में कई तरह की रियायतें देती हैं. सीडीआर एक ऐसा ही विकल्प है और माल्या को  यह सुविधा मिल सकती थी लेकिन उन्होंने इसकी बजाए बैंकों का कर्ज लेकर विदेश भाग जाने का फैसला लिया. 

माल्या को अब बैंकों की तरफ से उन्हें ऐसी किसी रियायत मिलने की उम्मीद न के बराबर है. इसके अलावा उन्हें अब कई तरह के कानूनी मामलों का भी सामना करना होगा. गिरफ्तारी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

इतना ही नहीं माल्या पर संपत्ति का ब्योरा देने के मामले में अदालत को गुमराह करने का भी आरोप लगा चुका है.

अब सियासी मुद्दा बन चुके हैं माल्या

माल्य का मसला अब केवल एक डिफॉल्टर का नहीं रहा है. बैंकों की खराब हालत और बढ़ते डिफॉल्ट की वजह से एनपीए में होने वाली बढ़ोतरी को काबू में करना मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है. 

बैंकों की सेहत सुधारने और बासल 3 की बाध्यता पूरा करने के लिए सरकार ने बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए 25,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया था और इसमें करीब 23,000 करोड़ रुपये की रकम बैंकों को जारी भी की जा चुकी है. इसके अलावा बैंकों का विलय मजबूत बैंकिंग सिस्टम बनाने की दिशा में भी सरकार कदम बढ़ा चुकी है. 

माल्या ऐसे वक्त में विदेश भागे जब देश में डिफॉल्टर्स का मुद्दा केवल बैंकों  के बीच का मुद्दा नहीं रह गया था. विपक्षी दल इस मुद्दे की मदद से सरकार की छवि को कॉरपोरेट हितैषी और किसान विरोधी साबित कर रहे हैं.

अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं और कांग्रेस ने कॉरपोरेट को दी जाने वाली रियायत और कर्ज से दबे किसानों की स्थिति को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है. कुछ दिनों पहले जब कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के देवरिया से  किसान यात्रा शुरू की तो उनके कार्यक्रम के खत्म होने के बाद किसानों ने खाट लूट ली. 

खाट पर चर्चा कार्यक्रम का मजाक उड़ाए जाने पर बेहद सधे तरीके से जवाब देते हुए राहुल गांधी ने इस मामले में सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया. 

उन्होंने कहा, 'मीडिया और बीजेपी के लोगों ने कहा कि देखो किसानों ने चारपाइयां चोरी कर लीं. जब किसान चारपाई उठाते हैं तो उसे आप चोर कहते  हैं और जब विजय माल्या 9 हजार करोड़ रुपये लेकर चला जाता है तो उसे डिफॉल्टर कहते हैं.'

राहुल गांधी भी अपनी किसान यात्रा में विजय माल्या के कर्ज लेकर भागने को मुद्दा बना चुके हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था खराब हालत में थी तब हमारी सरकार ने किसानों के 70,000 करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर दिए थे लेकिन यह सरकार बेहतर और मजबूत वैश्विक स्थिति के बावजूद किसानों को उसका फायदा नहीं दे रही है. गांधी ने सत्ता में आने पर किसानों के कर्ज को माफ किए जाने की भी घोषणा की है.

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में किसान कर्ज के मुद्दा बनने के असर को बीजेपी भली भांति समझती है. माल्या के खिलाफ  कार्रवाई कर बीजेपी दरअसल राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर संदेश देना चाहती है. 

माल्या के खिलाफ कार्रवाई में ढील देने का मतलब विपक्ष के सरकार के किसान विरोधी आरोप को यकीन में बदलने का काम करेगा.

सुप्रीम कोर्ट भी कर्ज वसूली के मामले में कॉरपोरेट को दी जाने वाली छूट के मामले में कोताही बरते जाने पर रिजर्व बैंक को कड़ी फटकार लगा चुका है. जब सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से डिफॉल्टर्स की सूची मांगी थी तब उन्होंने इसे कोर्ट में सार्वजनिक नहीं किए जाने की अपील की थी. 

आरबीआई का कहना था कि इस लिस्ट के खुलासे से देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. इसके बाद कोर्ट ने आरबीआई को फटकार लगाते हुए कहा था कि लोग सरकारी बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का लोन लेकर डिफॉल्टर हो जाते हैं और कंपनियों को बंद कर देते हैं. वह खुद को दीवालिया घोषित कर देते हैं लेकिन कोई गरीब किसान थोड़ा पैसा कर्ज लेकर नहीं चुकाए तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाती है.

माल्या के लिए अब लौटना ही विकल्प

माल्या पर देश के  17 बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपये बकाया है. विदेश भागने के बाद माल्या ने इस कर्ज में से 4,000 करोड़ रुपये लौटाने की पेशकश की थी लेकिन बैंकों ने हफ्ते भर के बाद उन्होंने इस पेशकश को खारिज कर दिया था. 

इस बीच माल्या के खिलाफ एफआईआर हुआ और कई अलग मामले जांच के दायरे मेंं आ गए. माल्या को अब तक का सबसे बड़ा झटका ईडी की जब्ती कार्रवाई से लगा है. जिसमें संपत्तियों के साथ यूबीएल और यूएसल में उनकी हिस्सेदारी वाले शेयरों को जब्त कर लिया गया है.

हालांकि यूबीएल ने माल्या को चेयरमैन के पद पर बनाए रखने का फैसला लिया है. माल्या के लिए यह भले ही राहत की खबर हो लेकिन अब माल्या के लिए विदेश में बने रहना मुश्किल हो चुका है. ईडी की हालिया कार्रवाई के बाद उनकी कुल 8,044 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त हो चुकी है. 

अधिकारी बताते हैं, 'सरकार से भी माल्या को किसी तरह की रियायत मिलने की संभावना नहीं है. वह पिछले कुछ महीनों के दौरान अपने सभी विकल्प आजमा चुके हैं. देश नहीं लौटने की स्थिति में उनका नुकसान कर्ज की रकम से कई गुणा ज्यादा होगा और यह बात अब माल्य को समझ में आ चुकी है.'

First published: 9 September 2016, 15:34 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी