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क्या ऑनलाइन वार में फ्लिपकार्ट एमेजॉन से पिछड़ रही है?

नीरज ठाकुर | Updated on: 28 May 2016, 22:05 IST
(कैच हिंदी)
QUICK PILL
  • जब फ्लिपकार्ट ने भारतीय बाजार में 1 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की. इसके अगले ही दिन एमेजॉन इंडिया ने 2 अरब डॉलर निवेश की घोषणा कर डाली. दो सालों बाद फ्लिपकार्ट को निवेश जुटाने में खासी परेशानी हो रही है.
  • खबर के मुताबिक फ्लिपकार्ट पिछले 6-7 महीनों के दौरान फंड जुटाने में लगी थी. इस दौरान कंपनी ने करीब 15 निवेशकों से संपर्क भी किया लेकिन उसे कोई निवेशक नहीं मिल पाया.

2007 में जब सचिन और बिन्नी बंसल ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत की थी तब उन्होंने एमेजॉन से प्रतिस्पर्धा की उम्मीद थी. बंसल बंधु पहले एमेजॉन में ही काम करते थे और उन्होंने इसी से प्रेरणा लेकर अपना ई-कॉमर्स का धंधा शुरू किया.

उस वक्त एमेजॉन दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी थी और इसका दबदबा अमेरिका और यूरोप के अधिकांश बाजार में था. भारत उस वक्त कंपनी के रडार पर भी नहीं था. हालांकि जब फ्लिपकार्ट ने अपना काम शुरू किया तब इसे भारत के एमेजॉन की तरह देखा गया.

सचिन और बिनी को फ्लिपकार्ट को स्थापित करने में छह साल लग गए. इस दौरान जब जेफ बेजॉस भारतीय बाजार से बेखबर थे तब बंसल बंधुओं ने न केवल फ्लिपकार्ट को शुरू किया बल्कि उसे भारतीय बाजार में स्थापित भी किया.

हालांकि अब ई-कॉमर्स बाजार में जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है. बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से फ्लिपकार्ट और एमेजॉन के बीच फंसी स्नैपडील की राह भी मुश्किल होती दिखाई दे रही है. फ्लिपकार्ट और एमेजॉन फिलहाल ज्यादा से ज्यादा पैसा बाजार में झोंक देना चाहती है.

फ्लिपकार्ट को अब नकद की तंगी का सामना करना पड़ रहा है

इसकी शुरुआत तब हुई जब फ्लिपकार्ट ने भारतीय बाजार में 1 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की. इसके अगले ही दिन एमेजॉन इंडिया ने 2 अरब डॉलर निवेश की घोषणा कर डाली. दो सालों बाद फ्लिपकार्ट को अब थोड़ा संभल कर चलने की जरूरत महसूस हो रही है. कंपनी ने आईआईटी और आईआईएम से रिक्रूटमेंट को टाल दिया है. कंपनियां अपने टॉप मैनेजमेंट में भारत के इन शीर्ष कॉलेेजों से टैलेंट की भर्ती करती रही हैं.

फ्लिपकार्ट के सामने नकदी की समस्या गहरा रही है. एमेजॉन को टक्कर देने के बाद से कंपनी की स्थिति बिगड़ी है. वहीं वैश्विक कंपनी होने की वजह से एमेजॉन के पास नकदी का अकूत भंडार है.

मिंट में छपी खबर के मुताबिक फ्लिपकार्ट पिछले 6-7 महीनों के दौरान फंड उगाही में जुटी हुई है. कंपनी ने करीब 15 निवेशकों से संपर्क किया है. लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. भारत की दूसरी बड़ी कंपनी स्नैपडील को भी निवेशक तलाशने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

फ्लिपकार्ट के लिए सबसे अधिक परेशान करने वाली बात यह है कि इसके मुख्य निवेशक मॉर्गन स्टैनली ने फरवरी 2016 के बाद दो चरणों में अपनी हिस्सेदारी में 42.5 फीसदी की कटौती कर दी है. द मार्कडाउन ने कंपनी का मूल्यांकन 9.39 अरब डॉलर कर दिया है जबकि जुलाई में कंपनी का मूल्यांकन 15.2 अरब डॉलर था.

एमेजॉन इंडिया को वहीं नकदी की दिक्कत नहीं हो रही है. उसके पैरेंट कंपनी से उसे लगातार नकदी मिल रही है. पिछले तीन महीनों में एमेजॉन के शेयर की कीमतों में 42 फीसदी की तेजी आई है. 

2016 की पहली तिमाही में कंपनी ने उम्मीदों को धता बताते हुए 29.1 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया. अपने प्रतिस्पर्धियों के उलट एमेजॉन इंडिया को धन जुटाने के लिए निवेशकों की जरूरत नहीं होती है.

मॉर्गन स्टैनली ने फरवरी 2016 के बाद से फ्लिपकार्ट में 42 फीसदी घटाई है

जब ई-कॉमर्स में जंग की शुरुआत हुई तब यह माना गया कि इसमें नकदी से काफी मदद मिलेगी. अब भारत सरकार ने यह शर्त भी लगा दी है कि कंपनियां किस तरीके से अपनी नकदी का इस्तेमाल करेंगी.

डीआईपीपी की तरफ से जारी नई नीति के मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियां बाजार कीमत से कम दाम पर अपने प्रॉडक्ट्स की बिक्री नहीं कर सकतीं. इसका मतलब यह हुआ कि कंपनियां छूट तो दे सकती हैं लेकिन उन्हें यह बढ़े हुए दाम पर देनी होगी. छूट के अभाव में कंपनियों के लिए अपने बाजार का विस्तार करने में खासी परेशानी होगी.

स्वाभाविक तौर पर उपभोक्ता ग्रोथ की खराब हालत से निवेशक चिंतित हैं. इस वजह से फ्लिपकार्ट के फंडिंग और बिजनेस मॉडल को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

हालांकि यह समस्या एमेजॉन के लिए नहीं है. एमेजॉन का बिजनेस बेहद विविध है. कंपनी के 29.1 अरब डॉलर के राजस्व में वेब सर्विस की हिस्सेदारी 2.57 अरब डॉलर रही.

पिछली कुछ तिमाहियों में कंपनी के मुनाफे में लगातार बढ़ोेतरी हो रही है. पिछले 20 सालों के दौरान एमेजॉन ने अपने मुनाफे को सामने नहीं रखा था. कं पनी ने अपने बिजनेस में निवेश करने के लिए पर्याप्त नकदी जमा की और फिर उसे अपने विविध कारोबार में लगाया.

एमेजॉन ने नकदी की मदद से कंपनी के कारोबार को कई हिस्सों में फैलाया. ऐसे में अगर बाजार में कोई डिस्काउंट पॉलिसी भी आती है तो एमेजॉन किसी अन्य कंपनी के मुकाबले उसका सामना करने में ज्यादा सक्षम है.

अब फ्लिपकार्ट के लिए ऐसे में अपनी स्थिति को बनाए रखने का एक ही तरीका है कि वह विविध कारोबार के एमेजॉन के मॉडल को फॉलो करे. इससे उसे निवेशकों का  भरोसा जीतने में मदद मिलेगी और फंड उगाही में कोई परेशानी नहीं होगी. हालांकि यह अपने आप में एक बड़ी चुनौती है.

First published: 28 May 2016, 22:05 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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