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जीएसटी को मनी बिल और फाइनेंस बिल के रूप में पेश करने में क्या अंतर है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 August 2016, 13:53 IST

राज्यसभा में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) संविधान संशोधन बिल सर्वसम्मति से पास हो चुका है. अब सरकार मूल जीएसटी बिल को शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी में है. विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार जीएसटी बिल को मनी बिल यानि धन विधेयक के रूप में नहीं लाए बल्कि इसे फाइनेंस बिल यानि वित्त विधेयक के तौर पर लाए.

हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पर विपक्षी दलों को कोई आश्वासन नहीं दिया है. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम जीएसटी बिल में जीएसटी की दर राष्ट्रीय स्तर पर 18 फीसदी रखने पर जोर दे रहे हैं. वहीं वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार जीएसटी की दर 18 फीसदी से अधिक भी हो सकती है. सूत्रों के अनुसार अगर जीएसटी की दर 18 फीसदी से अधिक होती है तो जीएसटी बिल को मनी बिल के तौर पर लाए जाने की संभावना अधिक हैं.

राज्यसभा सांसद चिदंबरम मूल जीएसटी विधेयक को मनी बिल की जगह वित्त विधेयक के तौर पर पेश करने की बात कह चुके हैं. चिदंबरम ने कहा कि इस बिल पर दोनों सदनों की मुहर लगना जरूरी है, इसलिए इसे मनी बिल के रूप में नहीं लाया जाना चाहिए. आपको बता दें कि मनी बिल को राज्यसभा से पारित कराने की आवश्यकता नहीं होती.

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, वित्तमंत्री चर्चा से बचने के लिए आने वाले नवंबर में जीएसटी को मनी बिल के तौर पर पेश कर देंगे, जैसे उन्होंने पूर्व में आधार और प्राइवेट मेंबर बिल के साथ किया था.

क्या है मनी बिल यानि धन विधेयक

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक की परिभाषा दी गई है. मनी बिल वो होता है जिसमें केवल धन से जुड़े हुए प्रस्ताव हों. इसके तहत राजस्व और खर्च से जुड़े हुए मामले आते हैं. ऐसे विधेयकों पर राज्य सभा में चर्चा तो हो सकती है लेकिन उस पर कोई वोटिंग नहीं हो सकती.

धन विधेयक राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सकता है. लोकसभा अध्यक्ष द्वारा प्रमाणित धन विधेयक लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा में भेजा जाता है. राज्यसभा धन विधेयक को न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही उसमें कोई संशोधन कर सकती है. 

लोकसभा राज्यसभा की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है. यदि धन विधेयक को राज्यसभा द्वारा 14 दिन के भीतर लोकसभा को नहीं लौटाया जाता है तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित समझा जाता है. कोई बिल मनी बिल है या नहीं इसका फैसला लोकसभा स्पीकर के निर्णय से होता है.

आपको बता दें कि लोकसभा में एनडीए सरकार बहुमत में है और राज्यसभा में बहुमत ना होने की वजह से अक्सर उसे बिल पास कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. केंद्र सरकार जीएसटी बिल पर चर्चा या वोटिंग से बचने के लिए इसे मनी बिल के रूप में पेश कर सकती है.

वित्त विधेयक और धन विधेयक में अंतर

धन विधेयक राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सकता है, जबकि वित्त विधेयक को अस्वीकृत या संशोधित करने का अधिकार राज्यसभा को प्राप्त है. वित्त विधेयक के प्रस्ताव का विरोध नहीं किया जा सकता और उसे तत्काल मतदान के लिए रखा जाता है. वित्त विधेयक पर दोनों सदनों में वोटिंग होती है जबकि धन विधेयक पर राज्यसभा में वोटिंग नहीं होती है.

First published: 5 August 2016, 13:53 IST
 
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