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जब स्पाइसजेट और जेट एयरवेज फायदे में तब इंडिगो के स्टाॅक क्यों गिरे?

नीरज ठाकुर | Updated on: 7 August 2016, 8:36 IST
(कैच)

वर्ष 2015 की सर्दियों में कुछ निवेशकों ने एक ऐसी कम्पनी को सूचकांक में शामिल करने की तमाम कोशिशें की जिसका संबंध एक ऐसे सेक्टर से था जिसका इतिहास दिवालियेपन का रहा है.

पिछले सात सालों से मुनाफे में चल रही एक मात्र एयरलाइन इंडिगो एयरलाइन्स की संचालक कम्पनी इंटरग्लोब एविएशन को उसके आईपीओ (इनीशियल पब्लिक ओपनिंग) के तहत जारी 3,130 करोड़ रुपए के शेयरों के छह गुना से अधिक शेयरों की मांग के आवेदन मिले हैं.

वर्ष 2012 के बाद यह सबसे बड़ा आईपीओ था. पहले दिन इस स्टाॅक ने 14.7 प्रतिशत का मुनाफा कमाया. 10 नवम्बर 2015 को सूचकांक बंद होने पर एनएसई पर इसकी कीमत 877.5 रुपए थी.

परन्तु सूचकांक में शामिल होने के नौ माह बाद ही इस स्टाॅक के प्रति लोगों का रुझान कम हो गया और 2 अगस्त को इसका भाव 865.70 रूपए चल रहा था. यह इसकी सूचकांक कीमत से 1.53 प्रतिशत कम है.

2016-17 अप्रैल-जून तिमाही में इंडिगो के 591.77 करोड़ रुपये के कुल लाभ में 7.4 प्रतिशत की कमी देखी गई. कम्पनी के हर तिमाही घोषणा के बाद इसके शेयरों में गिरावट देखी गई.

इंडिगो के शेयर मार्केट में सूचीबद्ध होने के बाद सितम्बर से दिसम्बर 2015 की तिमाही में इसके शेयरों में 20 फीसदी की गिरावट देखी गई, जबकि सूचकांक पर 657 करोड़ रुपए का लाभ दिखाया गया था.

इंडिगो के शेयर में सितम्बर-दिसम्बर 2015 की तिमाही में 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई

अगली तिमाही (जनवरी-मार्च 2016) में इंडिगो के शेयरों में 4 फीसदी की गिरावट देखी गई और इनकी कीमत 1,029 रुपए प्रति शेयर हो गई, जबकि चैथी तिमाही में रुपए के अवमूल्यन और बढ़ती स्पर्धा के बीच जेट वाहक में इन शेयरों पर 579 करोड़ रुपए का कुल लाभ देखा गया. 

कम्पनी का आईपीओ आने के नौ माह के भीतर इंडिगो के शेयर अपनी लिस्टिंग प्राइज़ के नीचे चले गए, वहीं नरेश गोयल के स्वामित्व वाली जेट एयरवेज ने इस अवधि के दौरान (10 नवम्बर 2015 से 2 अगस्त 2016 के बीच) 36 प्रतिशत का लाभ अर्जित किया.

इसी अवधि में एक और प्रतिस्पर्धी कम्पनी स्पाइस जेट ने 28.96 प्रतिशत का मुनाफा कमाया. जेट एयरवेज ने 2015-16 में आठ साल बाद अपना पहला वार्षिक लाभ दर्शाया था जबकि स्पाइस जेट ने भी सात तिमाही गुजर जाने के बाद 2014-15 की अंतिम तिमाही में अपना पहला मुनाफा दर्शाया.

दूसरी ओर इंडिगो जो कि 2009 से ही मुनाफे में चल रही थी और 2010 से 2014 के बीच हवाई ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच भी डटी रही, जबकि किंगफिशर जैसी कम्पनियां इसी अवधि में धराशायी हो गईं.

फिर ऐसा क्या हुआ कि इंडिगो के शेयर अचानक से खराब प्रदर्शन करने लगे, जबकि उड्डयन क्षे़त्र की बाकी कम्पनियां अभी भी निवेशकों में भरोसा पैदा कर रही हैं.

जनवरी, 2015 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में मिंट ने 178 फर्मों के बारे में रपट दी. इसमें कहा गया कि 2008 के बाद सूचीबद्ध किए गए स्टाॅॅक में से दो तिहाई ऐसे हैं, जो अपनी शुरुआती कीमत से कम भाव पर चल रहे हैं. हालांकि उसके बाद कोई अध्ययन नहीं किया गया, लेकिन भारत में आईपीओ वास्तविक कीमत से काफी ऊंची कीमत पर खुलते हैं, यह एक सर्वविदित तथ्य है.

इंडिगो के प्रदर्शन पर दुबई स्थित उड्डयन विशेषज्ञ फर्म मार्टिन कन्सल्टेंसी के संस्थापक मार्क मार्टिन के अनुसार इंडिगो के स्टाॅक जानबूझ कर ज्यादा कीमत पर रखे गए और इनकी कीमत अत्यधिक आंकी गई. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इसके प्रमोटर एयरलाइन में किए गए अपने निवेश को भुनाना चाहते थे और इसके बदले उन्होंने पूर्व में निजी इक्विटी को बाजार में उतार दिया.

आने वाली तिमाही में इंडिगो को स्पाइस जेट, जेट एयरवेज, विस्तारा और एयर इंडिया से कड़ी टक्कर मिल सकती है

मार्टिन आगे कहते हैं 2016 की पहली तिमाही की अगर बात की जाए तो हमारा मानना है कि इंडिगो का मुनाफा उसके संचालन की लागत में ही खप जाता है. इसमें ईंधन की बढ़ती कीमतें, डाॅलर के मुकाबले रुपए का अवमूल्यन और नए विमान ए-320एनईओ का खर्च शामिल है.

यद्यपि इंडिगो के लिए नवम्बर 2015 की अपनी सूचीबद्धता कीमत को उचित ठहराना काफी मुश्किल रहा है लेकिन बावजूद इसके घरेलू यात्री बाजार में इसका अंश सर्वाधिक है. इसके प्रतिस्पर्धियों ने तेजी से अपनी कार्यकुशलता में सुधार दिखाया है.

उदाहरण के लिए 2015-16 की चौथी तिमाही में स्पाइस जेट ने 1,475 करोड़ रुपए का राजस्व दिखाया था लेकिन वृद्धि के संदर्भ में यह मात्र 8.72 प्रतिशत था. 

इसी प्रकार अगर हम नवम्बर 2015 की अवधि की बात करें तो इंडिगो का यात्री भार 84.88 प्रतिशत रहा जबकि इसी दौरान स्पाइसजेट का यात्री भार 92.25 प्रतिशत रहा.

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भले ही स्पाइसजेट केवल तीन फीसदी बाजार हिस्सेदारी पर चल रही है और इंडिगो 27 प्रतिशत हिस्सेदारी पर. बावजूद इसके इसने अपनी क्षमता से बेहतर प्रदर्शन किया है.

आने वाली तिमाही में इंडिगो को स्पाइस जेट, जेट एयरवेज, विस्तारा और एयर इंडिया से कड़ी टक्कर मिल सकती है, क्योंकि ये कंपनियां भी सेवाओं में सुधार की कवायद में जुटी हैं.

यह असंभव है कि इंडिगो के स्टाॅक से निवेशकों को कोई बहुत अधिक फायदा होगा. एक बार दलाली फर्में इसकी कीमत 1500 रुपए तय कर रही थीं. परन्तु इतिहास गवाह है जब भी खरीद लक्ष्य इतना ऊंचा तय किया गया है रातों रात कीमतों में फर्क आया और बहुत कम दरों पर इन्हें वापस बेचना पड़ा. 

एक क्षण के लिए लगता है इंडिगो का मामला वास्तवित कीमत से अधिक कीमत आंकने का है और इसके प्रमोटरों ने स्टाॅक की कीमत बढ़ा-चढ़ा कर बताई.

First published: 7 August 2016, 8:36 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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