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एस गुरुमूर्ति: नोटबंदी का किया था समर्थन, RSS में निभाई अहम भूमिका, अब RBI में हुई एंट्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 August 2018, 14:07 IST

मंत्रिमंडल की प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली समिति ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में नॉन ऑफिशियल और पार्ट टाइम डायरेक्टर के रूप में तमिल साप्ताहिक तुगलक के संपादक एस गुरुमूर्ति को चार साल के लिए नियुक्त किया है. गुरुवार को आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 81 सी के प्रावधानों के अनुसार उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी गई.

स्वामीनाथन गुरुमूर्ति को सहकारी भारती के संस्थापक सतीश मराठे के साथ चार साल की अवधि के लिए नियुक्त किया गया है, सहकारी भारती एक गैर सरकारी संगठन है जो सहकारी समितियों का समर्थन करने के लिए काम करता है. विशेष रूप से एस गुरुमूर्ति एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, अर्थशास्त्री और राजनीतिक और आर्थिक मामलों के कमेंटेटर हैं.

 

तुगलक के संपादक होने के अलावा एस गुरुमूर्ति भी आरएसएस के सहयोगी स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक हैं. इससे पहले नवंबर 2017 में गुरुमूर्ति ने 1990 के उदारीकरण की तरह अर्थव्यवस्था के लिए एक मौलिक सुधारात्मक के रूप में नोटबंदी पर एक लेख लिखा था. गुरुमूर्ति ने नोटबंदी की योग्यता पर कई सार्वजनिक व्याख्यान दिए हैं और दूरदर्शन पर कई साक्षात्कार दिए हैं.

इससे पहले गुरुमूर्ति ने इंडियन एक्सप्रेस में भी लेख लिखे थे, दिलचस्प बात यह है कि इंडिया टुडे पत्रिका ने उन्हें 2017 की सूची के भारत के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों में नंबर 30 पर स्थान दिया. हालांकि एस गुरुमूर्ति ने अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक एस गुरुमूर्ति वो शख्स हैं जिन्होंने योजना आयोग को नीति आयोग में बदलने की वकालत की थी. अपने लंबे करियर में गुरुमूर्ति ने मौद्रिक नीति, नौकरियां, आरबीआई और ऐसे व्यापक आर्थिक मुद्दों पर कई लेख लिखे, जिसमे जिसमें रघुराम राजन को दूसरा कार्यकाल क्यों नहीं दिया गया, यह विषय भी शामिल था.

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First published: 8 August 2018, 14:05 IST
 
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