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भारत की अर्थव्यवस्था को चीन से आगे बढ़ने से कौन रोक रहा है, जानकार रह जायेंगे हैरान

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 October 2018, 16:18 IST
(Bloomberg)

एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन लंबे समय तक धुंधले आसमान के साये में रही लेकिन इन दिनों चीन का पड़ोसी भारत प्रदूषण के साथ अब तक बड़ी लड़ाई लड़ रहा है. भारत दक्षिण एशियाई के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत की राजधानी दिल्ली का भी स्थान है. इस प्रदूषण की कीमत कई लोग चुके रहे हैं. जिन लोगों ने कभी सिगरेट को छुआ तक नहीं वह फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर मेमरी से  जूझ रहे हैं. देश की सरकार देश के आर्थिक विकास के बारे में सोच रही है, लेकिन लोग बीमारियों से मर रहे हैं या बीमारियों से पीड़ित हैं. वायु प्रदूषण की वजह से देश में लोग आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं.

भारत को लेकर दुनिया के इस दृष्टिकोण को बदलने के लिए भारत संघर्ष कर रहा है. भारत में बढ़ता प्रदूषण कंपनियों को भी आने से रोकता है. सर्दियों उत्तर भारत के धुंध मैदानों पर उतरती है. इस मौसम के दौरान फसलों को जला दिया जाता है और दिवाली त्योहार के दौरान आतिशबाजी बंद होने के बाद वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर को पार कर जाता है.
विश्व बैंक के अनुसार प्रदूषण से भारत की जीडीपी को 8.5% का नुकसान होता है. जो वर्तमान में 2.6 ट्रिलियन डॉलर है.

जबकि भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है. चीन की 12.2 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था भारत से पांच गुना अधिक है. जब नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के अरविंद कुमार 1988 में चेस्ट सर्जन के रूप में काम शुरू हुए तो उनके 90 फीसदी फेफड़ों के कैंसर रोगी मध्यम आयु वर्ग के पुरुष धूम्रपान करने वालों में से थे. अब वह कहते हैं उनके 60 फीसदी फेफड़ो के कैंसर रोगी ऐसे हैं जो धूम्रपान नहीं करते हैं, जिनमें आधी महिलाएं हैं. गैर-लाभकारी हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक 2015 में 1.1 मिलियन यानी 11 लाख से अधिक भारतीयों की मौतों के लिए छोटे एयरबोर्न कण अस्थमा से हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर से बीमारियों से जुड़े हुए हैं.

इस बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था को दोबारा विस्तारित करने के दो दशकों के विस्तार के बाद चीन कम प्रदूषणकारी सेवाओं और खपत में बदलाव कर रहा है. चीन ने इसमें काफी सुधर भी किया है. एयरविज़ुअल से वायु गुणवत्ता डेटा के विश्लेषण के अनुसार, पीएम 2.5 नामक खतरनाक कणों का स्तर दिल्ली में 2017 में 84 हो गया जो जो 2015 में 66 था. बीजिंग में वे इसी अवधि के दौरान यह 43 था.

शिकागो विश्वविद्यालय में एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल ग्रीनस्टोन ने ईमेल के माध्यम से कहा, "बड़ी चुनौती यह है कि लोग लगातार वायु प्रदूषण में सुधार की मांग नहीं कर रहे हैं, जैसा कि चीन में हुआ था. देश के पर्यावरण मंत्रालय का कहना है कि वह खराब हवा को कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है.

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First published: 22 October 2018, 16:14 IST
 
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