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भारत में 5G क्यों बनने जा रहा है अंबानी-भारती का नया सिरदर्द ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2019, 13:06 IST

 दुनिया के सबसे बड़े टेलीकॉम बाजार में एक फिर से नए वॉर की तैयारी हो रही है. नई 5जी तकनीक को हासिल करने के लिए. दूसरी ओर भारत सरकार इस साल 5जी एयरवेव्स की बिक्री से 84 बिलियन डॉलर जुटाना चाहती है. माना जा रहा ही कि भारत जैसे बड़े ग्राहक वाले बाजार में 5जी कनेक्टिविटी क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है. भारत में इस तकनीक को हासिल करने के लिए एशिया के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी की जियो सहित आईडिया और एयरटेल जैसी कंपनियां शमिल हैं.

भारत में 5जी स्पेक्ट्रम की खरीदारी में शामिल होने पर कंपनियों ने ज्यादा टिप्पणियां नहीं कीअभी हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि अभी सरकार को 5जी तकनीक के लिए वक्त देना चाहिए क्यों उनके पास अभी पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. साथ ही कंपनियों को इसके लिए जायदा बजट की आवश्यकता है, जिसे जुटाना आसान नहीं है. इस कड़ी में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) अपने दूरसंचार कारोबार, रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड में अपने ब्रॉडबैंड, ई-कॉमर्स प्ले और भविष्य में 5 जी सेवाओं के लिए 20,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की है.

 

ऑपरेटर्स जल्द ही यह तय कर सकते हैं कि वे हाई-स्पीड वायरलेस नेटवर्क के लिए कितना भार सह सकते हैं. माना जा रहा ही कि यह भारत में स्ट्रीमिंग, गेमिंग और मनोरंजन के बाजार को आसमान तक पहुंचा सकता है. भारत में पहले ही Netflix Inc., Amazon.com जैसी कंपनियां अपने पेअर जमा रही हैं. डेलॉइट की एक रिपोर्ट के अनुसार विनिर्माण से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में 5G भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए उत्प्रेरक का काम कर सकती है, जो 2025 तक 1 लाख करोड़ तक पहुंचने की क्षमता रखती है.

जानकारों का मानना है कि 5जी की खरीदारी में अगर कोई ऑपरेटर गायब रहता है तो उसकी बाजार में हिस्सेदारी में गिरावट की संभावना है, साथ ही यह ग्राहकों रास्ता पेश करना भी महत्वपूर्ण है. इसस पहले दक्षिण कोरिया की एसके टेलीकॉम कंपनी ने अप्रैल में सार्वजनिक उपयोग के लिए अपने 5 जी नेटवर्क का अनावरण किया था. इसे दुनिया का पहला पूर्ण वाणिज्यिक रोल आउट कहा जा रहा था.

चीन ने इस महीने की शुरुआत में अपने तीन मुख्य ऑपरेटरों को 5जी लाइसेंस जारी किए. भारत की योजना अगले साल 5 जी को लाने की है. हालांकि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कैरियर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योगपति राजन मैथ्यूज ने कहा, "भारत में स्पेक्ट्रम की कीमतें बहुत ज्यादा महंगी हैं और इससे टेलीकॉम कंपनियों को अपनी बैलेंस शीट में और तनाव होगा.

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First published: 20 June 2019, 13:06 IST
 
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