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IPL क्यों विदेशी विज्ञापन कंपनियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन गया है ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 April 2018, 17:56 IST

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) शुरू हो चुका है. साल 2008 में शुरू हुआ आईपीएल अपने 11 साल पूरे कर चुका है. इन सालों में यह क्रिकेट लीग भारतीय अर्थव्यवस्था का भी एक अहम हिस्सा बन गया. टेलीविज़न पर आईपीएल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके प्रसारण के दौरान विज्ञापन दाता कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. विद्देशी कंपनियां भी इसके बढ़चढ़ कर विज्ञापन दे रही है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट की माने तो इस साल आईपीएल-11 के डिजिटल और टीवी प्रसारण में 80 ब्रांडों का विज्ञापन किया जा रहा है जो पिछले साल की तुलना में 10 ज्यादा है. पिछले साल 70 ब्रांडों के विज्ञापनों का प्रसारण किया गया था.

 

इन कंपनियों में सैमसंग से लेकर नोकिया, पारले एग्रो, कोका कोला, गोआईबीबो, सिएट पिछले कुछ वर्षों में आईपीएल की ब्रांड वेल्यू उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है और वैश्विक मूल्यांकन कंपनी डफ ऐंड फेल्प्स के मुताबिक 2017 में 5.3 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी थीट जैसी कंपनियां शामिल हैं. वहीं आईपीएल की ब्रांड वेल्यू में भी बड़ा सुधार हुआ है. वैश्विक मूल्यांकन कंपनी डफ ऐंड फेल्प्स के मुताबिक 2017 में 5.3 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी थी.

साल 2017 में आईपीएल के डिजिटल और टेलीविजन प्रसारण अधिकार स्टार इंडिया ने 16,437.50 करोड़ रुपये में पांच साल के लिए खरीदे. यानी एक गेंद दिखाने के लिए स्टार ने 25 लाख रुपये खर्च किए हैं और एक ओवर के लिए स्टार को 1.5 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े हैं. यह आंकड़ा एक मैच के लिए 60 करोड़ रुपये बैठता है. ख़बरों की माने तो हालही में स्टार इंडिया ने आईपीएल 11 के लिए 500 करोड़ रुपये की ऐड इनवेंटरी बेची थी.

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आईपीएल के डिजिटल अधिकार पाने के लिए फेसबुक, अमेजॉन, ट्विटर, याहू, रिलायंस जियो, स्टार इंडिया, सोनी पिक्चर्स, डिस्कवरी, स्काई, ब्रिटिश टेलीकॉम और ईएसपीएन डिजिटल मीडिया जैसी कंपनियां शामिल थी.

First published: 9 April 2018, 17:56 IST
 
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