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नोटबंदी में मोदी सरकार का साथ देने वाले RBI गवर्नर उर्जित पटेल अब ख़फा क्यों हैं ?

सुनील रावत | Updated on: 27 March 2018, 13:23 IST

भारतीय  रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार एक बार आमने-सामने हैं. जब उर्जित पटेल ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर का पद सितंबर 2016 के पहले सप्ताह में संभाला था तब रघुराम राजन को लेकर बीजेपी के कई नेता हमलावर थे. राजन जो विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री थे और उन्होंने ही 2008 की वैश्विक मंदी की भविष्यवाणी की थी. राजन को आरबीआई गवर्नर पद से हटाने को लेकर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी के बयान भी राजन की विदाई के लिए जिम्मेदार रहे. कई मौकों पर राजन  की जमकर आलोचना भी की.

उर्जित पटेल को लेकर क्या कहा गया 

अक्सर ज्यादा मीडिया में नहीं बोलने वाले उर्जित पटेल की आरबीआई गवर्नर बनने के बाद बेहद कम समय में नोटबंदी के लिए सहमत होने के लिए आलोचना की गई. कई आलोचकों ने तो यह भी कहा कि रघुराम राजन जिन निर्णयों के तैयार नहीं थे उन्हें लागू करने के लिए उर्जित पटेल को लाया गया है, क्योंकि रघुराम राजन नोटबंदी जैसे निर्णयों को लेकर सहमत नहीं थे.

सरकार पर बोला हमला 

गुजरात नेशनल लॉ युनिवर्सिटी में पटेल के हाल ही में दिए गए भाषण के बाद सब कुछ बदल गया. सरकारी स्वामित्व वाले पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 14,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बाद, सार्वजनिक रूप से सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने अपने सामान्य स्वभाव से हटकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर आरबीआई की कमजोर नियामक शक्तियों पर प्रकाश डाला.

वित्त मंत्रालय और भारतीय रिज़र्व बैंक के बीच लड़ाई शुरू करने वाले इस भाषण में पटेल ने सात क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया, जहां आरबीआई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर अंतिम निर्णय नहीं ले सकता.

सरकार का जवाब 

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने सोमवार को केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच अधिक समन्वय की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक की आजादी कानून के जरिए ही हासिल नहीं की जा रही है, बल्कि इसके लिए अच्छे निर्णय लेने भी जरूरी है. मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि बुरे निर्णयों की एक श्रृंखला केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता पर प्रभाव डाल सकती है.

मुख्य आर्थिक सलाहकार का यह बयान ठीक आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के उस बयान के बाद आया जिसमे उन्होंने कहा था कि उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से निपटने के लिए आरबीआई के पास पर्याप्त कानूनी शक्तियां नहीं हैं.

दिल्ली में यीशु और मैरी कॉलेज के छात्रों से बातचीत के दौरान सुब्रह्मण्यम नई कहा कि "कानून के जरिए स्वतंत्रता हासिल नहीं की जा सकती, लेकिन इसका काफी हिस्सा प्रतिष्ठा से और अच्छे एवं प्रभावी निर्णय क्षमता के इतिहास से मिलता है. जब आप कहते हैं कि एक केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता है, तो इसकी विश्वसनीयता सिर्फ इसलिए नहीं कि वह स्वतंत्र है. उन्होंने कहा यदि आप स्वतंत्र हैं और आप कई गलत निर्णय ले रहे हैं, तो आप विश्वसनीयता खो सकते हैं.

First published: 27 March 2018, 13:23 IST
 
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