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जेट एयरवेज अपनी बहुमत हिस्सेदारी 1 रुपये में क्यों बेच रहा है ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 February 2019, 12:08 IST

कर्जे में डूबी देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज इंडिया लिमिटेड अपनी बहुमत हिस्सेदारी 1 रुपये में बेच रही है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार एसबीआई के नेतृत्व वाले ऋणदाताओं के एक समूह ने 114 मिलियन नए शेयर जारी करने के माध्यम से 1 रुपये में 50.1 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने का प्रस्ताव दिया है. यह उधारदाताओं द्वारा एक बेलआउट योजना का हिस्सा है जो एयरलाइन को नए इक्विटी की व्यवस्था करने का समय देगा.

21 फरवरी इस पर फैसला होने की उम्मीद है. पिछले एक दशक में भारत की शीर्ष तीन एयरलाइनों में से जेट एयरवेज एक है. जेट एयरवेज की स्थापना भारत के 1990 के दशक के शुरू उद्यमी नरेश गोयल द्वारा की गई थी. अबू धाबी के एतिहाद एयरवेज की इसमें यह 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है. जबकि भारत के बाजार का 13.9 प्रतिशत इसको नियंत्रित करता है, जो दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रहा है.

जेट एयरवेज लंदन और सिंगापुर सहित अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए भी उड़ान भरता है. 2000 के दशक के मध्य में बजट वाहकों के लिए बाजर में मुश्किलें खड़ी हो गई थी. जेट ईंधन पर 30 प्रतिशत टैक्स ने खर्चे और और बढ़ा दिया. ब्लूमबर्ग की गणना बताती है कि एयरलाइन के पास पिछले साल के अंत में लगभग 3.55 अरब रुपये नकद थे.

 

भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में ऋणदाताओं के एक समूह ने 114 मिलियन नए शेयर जारी करने के माध्यम से 1 रुपये में 50.1 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने का प्रस्ताव किया है, एक पैंतरेबाज़ी जिसकी अनुमति पिछले साल भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उल्लिखित एक रूपरेखा के तहत दी गई है.

निगेटिव नेट वर्थ वाली कंपनियों के लिए लागू होने वाली प्रक्रिया को बैंक के नेतृत्व वाली प्रोविजनल रिजॉल्यूशन प्लान या BLPRP कहा जाता है और इसे सभी उधारदाताओं, बैंकिंग उद्योग समूह, संस्थापक गोयल और एतिहाद के बोर्ड द्वारा अनुमोदित करने की आवश्यकता होती है. जेट एयरवेज को इस संकट से उबरने के लिए 85 अरब की आवश्यकता है. जबकि बैंक सौदा मुख्य रूप से शेयरों में ऋण का रूपांतरण है, एक बार यह अभ्यास पूरा होने के बाद ऋण का स्तर केवल 1 रुपये कम हो जाएगा.

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First published: 19 February 2019, 12:08 IST
 
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