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नई नहीं पुरानी कार खरीद रहे हैं लोग, जानिए क्या है कारण ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 May 2019, 17:05 IST

आंकड़ों के अनुसार हालही में नई कारों की बिक्री में कमी आयी है. अब नए आंकड़ों की माने तो मौजूदा कार मार्केट में सेकंड हैंड कारों का बाजार नई कार मार्केट से बड़ा हो गया है. साल 2018 -19 में जहां नई कारों की बिक्री 3,600000 यूनिट रहीं वहीं सेकंड हैंड कार 40 लाख से ज्यादा बेचीं और खरीदी गई. नई कार की बिक्री की वृद्धि दर कई कारणों से धीमी हो गई है, जिसमें चुनावी साल में ऑटो बिक्री में मंदी और अर्थव्यवस्था में समग्र खपत में मंदी शामिल है.

नई कार की बिक्री 2018-19 में 2.70% बढ़ी, चार वर्षों में उद्योग के लिए सबसे धीमी विकास दर थी. अप्रैल में यात्री वाहन की बिक्री में पिछले साल के इसी महीने की तुलना में तेज गिरावट देखी गई और घरेलू बिक्री में 17.07% की कमी देखी गई. विशेषज्ञों ने कहा कि नई कार की बिक्री में मंदी का मतलब यह हो सकता है कि मांग पुरानी कारों के लिए बढ़ रही है.

 

IndianBlueBook की रिपोर्ट के अनुसार, 45% खरीदार ऐसी कार चाहते हैं जो चार से पांच साल पुरानी हो. हालांकि, 46% विक्रेता अपने वाहन को तब बेचना चाहते हैं जब यह छह से आठ साल पुरानी हो. यह बाजार ज्यादातर कैश पर निर्भर है. हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने इन कारों पर टैक्स बढ़ाया था.

2018 में जीएसटी परिषद ने सेकंड हैंड कारों पर लगाए गए टैक्स को घटाकर 18% से 12% कर दिया. बाजार में बिकने वाली पुरानी कारों में 17% फाइनांस की जाती है. नए कार सेगमेंट में लगभग 85% खरीदारी वित्तपोषित है.

उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स द्वारा जारी आंकड़ों की माने तो साल 2019 के अप्रैल में भारत में नए यात्री वाहनों की बिक्री में 17% की कमी आ गई. यह लगभग आठ वर्षों की सबसे खराब मासिक गिरावट थी. आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में यात्री वाहन की बिक्री 2,47,541 इकाई रही. गई जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 2,98,504 थी.

First published: 16 May 2019, 17:05 IST
 
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