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जेटली का बजट उतना 'समाजवादी' नहीं जितना बताया जा रहा है

श्रिया मोहन | Updated on: 4 March 2016, 0:34 IST
QUICK PILL
  • अरुण जेटली द्वारा पेश 2016-17 के आम बजट को कई विश्लेषकों ने समाजवादी बजट बताया. लेकिन कुछ आलोचकों का मानना है कि जमीनी हकीकत इससे उलट है.
  • सीबीजीए की रिपोर्ट के अनुसार कृषि, समाजिक सुरक्षा पीने के पानी, बाल कुपोषण, मनरेगा जैसे मदों में सरकार द्वारा आवंटित राशि जरूरत के अनुरूप नहीं.

वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए साल 2016-17 के आम बजट को कुछ विश्लेषकों ने किसानों का बजट कहा. इन विश्लेषकों ने इस बजट को बीजेपी का समाजवादी अवतार बताया.

हालांकि कुछ दूसरे विश्लेषक इससे सहमत नहीं हैं. दिल्ली स्थित थिंक टैंक द सेंटर फॉर बजट गर्वनेंस एकाउंटैबिलिटी (सीबीजीए) ने मंगलवार को आम बजट के विश्लेषण की रिपोर्ट पेश की. 'कनेक्टिंग द डॉट्स एन एनालिसिस ऑफ दी यूनियन बजट 2016-17' नाम की रिपोर्ट में केंद्र सरकार के बजट की बिंदुवार समीक्षा की गई है.

मुद्रास्फीति के बरक्स आवंटित बजट में खास बढ़ोतरी नहीं

सरकार ने पिछले साल की तुलना में साल 2016-17 के लिए कुल खर्च में 1,92,669 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है.

इस बजट आवंटन में शिक्षा क्षेत्र में 1740 करोड़ रुपये, कृषि संबंधित के लिए सेवाओं के लिए 1282 करोड़ रुपये, पेंशन के लिए 27,637 करोड़ रुपये और राज्य सरकारों के ग्रांट में 10,299 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई. 

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अगर जीडीपी के शेयर(मुद्रा स्फिति को ध्यान में रखते हुए) के रूप में देखा जाए तो कुल आवंटित खर्च में 12वीं पंचवर्षीय योजना की तुलना में कमी हुई है.

राज्यों को दी जाने वाली राशि में दरअसल पहले की तुलना में कटौती हुई है. बजट आवंटन में हर मद में आवंटित राशि में बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन उसके साथ डिस्क्लेमर भी दिया गया है कि केंद्रीय करों में से राज्यों की दी जाने वाली राशि में से राज्यों को 2014-15 में दी गई अतिरिक्त धनराशि 8,464 करोड़ रुपये काट लिए जाएंगे.

बिहार में पांच साल से कम उम्र का हर दूसरा बच्चा, गोवा में हर पांचवा बच्चा कुपोषित है

राज्य योजनाओं को मिलने वाली केंद्रीय मदद और केंद्रीय संसाधनों के स्थानांतरण में भी बहुत मामूली बढ़ोतरी की गई है. पिछले आम बजट में इन मदों में क्रमशः 2,16,108 करोड़ रुपये और 8,21, 520 रुपये आवंटित किए गए थे. आगामी वित्त वर्ष के लिए इन मदों में मामूली बढ़ोतरी करते हुए क्रमशः 2,41,900 करोड़ रुपये और 9,21, 201 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

सीबीजीए की रिपोर्ट के अनुसार सोशल सेक्टर के लिए किए गए आवंटन में भी मामूली बढ़ोतरी की गई है. रिपोर्ट के अनुसार 17 प्रमुख सोशल सेक्टरों से जुड़े 16 संशोधित बजट आवंटन की कुल राशि में मामूली बढ़ोतरी की गई है. इन 17 सेक्टरों के लिए आवंटित राशि को 4,13,419 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 4,74,847 करोड़ रुपये की.

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महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, उपभोक्ता खाद्य प्रसंस्करण और जन वितरण मंत्रालय और सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के आवंटित बजट में भी मामूली बढोतरी ही की गई.

ऐसे में ये कहना कितना न्यायसंगत है कि इस बजट में सोशल सेक्टर पर ध्यान दिया गया है?

किसानों के बजट की जमीनी हकीकत

कृषि, सहकारी और किसान कल्याण का बजट 22,951 करोड़ से बढ़ाकर 44,469 करोड़ रुपये किया गया है. अंग्रेजी अखबार मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार ऊपरी तौर पर तो लगता है कि इन मदों में 94 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई है लेकिन हकीकत है कि वास्तविक बढ़ोतरी केवल 27 प्रतिशत हुई है. इस राशि में ये बढ़ोतरी इसलिए इतनी ज्यादा दिख रही है क्योंकि केंद्र सरकार ने वित्त आयोग द्वारा मिलने वाले अल्पकालिक ऋण के ब्याज के लिए आवंटित 15,000 करोड़ की राशि को भी इसी मद में जोड़ दिया गया है.

सीबीजीए की रिपोर्ट के अनुसार कृषि क्षेत्र की विकास दर में गिरावट दर्ज की गई है. देश के कई इलाकों में लगातार दो सालों से पड़ रहा सूखा इसकी मुख्य वजह है. भारत की अभी भी बहुत बड़ी आबादी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है.

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिंस की गिरती कीमती से हालात और बिगड़ गए. उत्पादन का कम दाम और बढती लागत ने किसानों पर दोहरी मार की. नतीजन करोड़ों किसानों की आर्थिक स्थिति बेहत खराब हो गई.

मनरेगा का बजट बढ़ाने की वाहवाही में कितना दम

केंद्र सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अब तक की सबसे अधिक राशि(पिछले सालों के मूल खर्च की तुलना में) आवंटित की गई है.

साल 2010-11 में मनरेगा के लिए 40,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. उस साल आवंटित राशि के उपयोग की दर भी काफी अधिक रही.

मुद्रा स्फिति को देखते हुए 2016-17 के लिए मनरेगा की आवंटित राशि को मौजूदा राशि से बहुत अधिक होना चाहिए था

सीबीजीए की रिपोर्ट के अनुसार अगर मुद्रा स्फिति को ध्यान में रखा जाए तो 2016-17 के लिए मनरेगा की आवंटित राशि को मौजूदा राशि से बहुत अधिक होना चाहिए था.

पीने के पानी से ज्यादा सफाई की चिंता

2016-17 के बजट में स्वच्छ भारत अभियान के लिए नौ हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. जाहिर है सरकार का सफाई, खासकर ग्रामीण भारत में, पर बहुत जोर है.

हालांकि सीबीजीए ने इसपर भी चिंता जतायी है. संस्था की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने सफाई के लिए जो बजट आवंटित किया है वो जल आपूर्ती के बजट से कटौती कर के दिया है.

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भारत में पीने के पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता बड़ा मुद्दा रही है. देश के कुछ इलाकों में पीने के पानी का भारी संकट है. इसे देखते हुए जल आपूर्ति के लिए ज्यादा राशि आवंटित की जानी चाहिए थी जो नहीं की गई.

कुपोषित बच्चों के लिए निराशाजनक बजट

भारत में पांच साल की उम्र से कम करीब 30 प्रतिशत बच्चे एक स्वस्थ बच्चे की औसत लंबाई जितना नहीं बढ़ पाते.

ताजा राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में पांच साल से कम उम्र का हर दूसरा बच्चा, गोवा में हर पांचवा बच्चा अविकसित है. मध्य प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के 42 प्रतिशत बच्चों का वजन सामान्य से कम है.

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों की हालत और भी ज्यादा खराब है. फिर भी सरकार ने बाल कुपोषण दूर करने से जुड़ी आईसीडीएस और मिड डे मील जैसी योजनाओं में मामूली कटौती कर दी है.

जबिक 2014-15 के अंतरिम बजट में खुद जेटली ने कहा था कि बच्चों के कुपोषण के दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर कार्यक्रम चलाने की जरूरत है. उनके इस बयान के करीब दो साल बाद भी इसपर अमल होता नहीं दिख रहा है.

First published: 4 March 2016, 0:34 IST
 
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