Home » बिज़नेस » Will Airlines in India be able to deal with increasing ATF prices ?
 

क्या महंगे एटीएफ के बोझ को संभाल पाएंगी विमानन कंपनियां?

नीरज ठाकुर | Updated on: 25 May 2016, 13:41 IST
QUICK PILL
  • सितंबर 2014 के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) सस्ता होना शुरू हुआ. इसके बाद भारतीय विमानन कंपनियों की किस्मत भी बदली और पहली बार 9 सालों से घाटा उठा रही एयर इंडिया मुनाफे में आई.
  • एयर इंडिया के साथ ही इंडिगो, जेट एयरवेज और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों को भी मुनाफा होना शुरू हुआ. आने वाले दिनों में एटीएफ की कीमत बढ़ने की संभावना है. ऐसे में विमानन कंपनियों के सामने अपने मुनाफे की स्थिति को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा.
  • 2014 के अंत से ही भारतीय विमानन कंपनियों के अच्छे दिन शुरू हुए. जेट एयरवेज दिसंबर 2014 तिमाही में मुनाफे में आई. कंपनी को हालांकि महज 3 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ और इसकी बड़ी वजह राजस्व में बढ़ोतरी और ईंधन लागत में आई 11 फीसदी कमी रही.

    बाद की अगली तिमाहियों में दूसरी अन्य विमानन कंपनी स्पाइसजेट 22.51 करोड़ रुपये के मुनाफे के साथ खबरों में आई. कंपनी को इसके पहले सात तिमाहियों में लगातार घाटा हुआ था. एयर इंडिया को पिछले 9 सालों से घाटा हो रहा था. कंपनी को पहली बार  2015-16 में 8 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ.

    विमानन कंपनियों के ईंधन की कीमतों में सितंबर 2014 के बाद से कमी आनी शुरू हुई. जब ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद एटीएफ की कीमतें घटानी शुरू कर दी. फरवरी 2016 में एटीएफ की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर कम होकर 35,126.82 किलोलीटर हो गई.

    फिलहाल एटीएफ की कीमत दिल्ली में 42,982 रुपये प्रति किलोलीटर है. आने वाले दिनों में एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है. ऐसी स्थिति में यह सवाल है कि क्या विमानन कंपनियां एक बार फिर से घाटे में आएंगी?

    2011-2014 के बीच महंगे एटीएफ से भारत में विमानन कंपनियों को घाटा उठाना पड़ा

    फिलहाल एटीएफ की कीमत दिल्ली में 42,982 रुपये प्रति किलोलीटर है. आने वाले दिनों में एटीएफ की कीमतों में  बढ़ोतरी की संभावना है. ऐसी स्थिति में यह सवाल है कि क्या विमानन कंपनियां एक बार फिर से घाटे में आएंगी?

    विमानन कंपनियों के कुल परिचालन लागत में ईंधन की लागत 42 फीसदी होती है. 2011 से 2014 के बीच भारत में विमानन कंपनियों को हुए घाटे की वजह एटीएफ की अधिक कीमतें थी.

    मार्टिन कंसल्टिंग के फाउंडर और सीईओ मार्क मार्टिन ने कहा कि आने वाले दिनों में कंपनियों को छूट पर दी जाने वाली टिकटों की योजनाएं बंद करनी होंगी.

    मार्टिन ने कहा, 'एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद विमानन कंपनियां ग्राहकों को सस्ती टिकटें ऑफर नहीं कर  पाएंगी. इसलिए सब कुछ ग्राहकों पर निर्भर करता है कि वह महंगी टिकट खरीदते हैं या नहीं. पिछले एक साल में एयर ट्रैफिक में बढ़ोतरी हुई है और इसकी वजह से सस्ती टिकट योजनाएं हैं.'

    अब इस बात की संभावना ज्यादा है कि आने वाले दिनों में सस्ते टिकट की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं की संख्या में गिरावट आएगी. ऐसा पहले भी हो चुका है.

    डीजीसीए के मुताबिक भारतीय विमानन कंपनियों के यात्रियों की संख्या में जनवरी से दिसंबर 2015 के बीच 20.34 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. 2016 में महंगे टिकट की वजह से यात्रियों की संख्या में गिरावट आई. ऐसे माहौल में वहीं कंपनियां अपना काम कर पाएंगी जिनका आधार बेहद मजबूत है. मार्टिन के मुताबिक, 'विमानन कंपनियां को अन्य कारणों मसलन लोड फैक्टर, ऑन टाइम ट्रैवल और ब्रेक ईवन पर ध्यान देना होगा. यह देखना अहम होगा कि कौन विमान अधिक कीमत वाले एटीएफ के बावाजूदद मुनाफा कमा पाता है.'

    ऑन टाइम परफॉर्मेंस

    इंडिगो देश की एकमात्र वैसी कंपनी रही है जिसने 2015 में ऑन टाइम परफॉर्मेंस के स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया. जनवरी से दिसंबरर 2015 के बीच कंपनी का ऑन टाइम परफॉर्मेंस 83.8 फीसदी रहा.

    जेट एयरवेज और जेट लाइट का ओटीपी (ऑन टाइम परफॉर्मेंस) इस अवधि में 79.98 फीसदी रहा. वहीं स्पाइसजेट का ओटीपी 73.05 फीसदी रहा. एयर इंडिया का ओटीपी इस अवधि में 73.40 फीसदी रहा.

    जब टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी होगी तब ओटीपी से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा. इंडिगो के मुनाफे में आने की सबसे बड़ी वजह ऑन टाइम परफॉर्मेंस है जिसकी वजह से कंपनी अपने कर्मचारियों को दिन में अधिक समय तक काम पर लगाए रहती है.

    पैसेंजर लोड फैक्टर

    पैसेंजर लोड फैक्टर (पीएलएफ) से इस बात का पता चलता है कि विमान में कितनी सीटें भरी हुई हैं. विमान कंपनियों को अपने विमान में अधिकतम सीटों को भरना होता है ताकि प्रति सीट तय लागत को निकाला जा सके. 

    2015 में स्पाइसजेट का मई महीने के बाद से पीएलएफ 90 फीसदी से अधिक रहा. साल के अंत में यह आंकड़ा 89.8 फीसदी रहा. इंडिगो का सालाना औसत 83.7 फीसदी रहा. अधिकतम यह आंकड़ा 91.9 फीसदी जबकि न्यूनतम 76.8 फीसदी रहा. वहीं एयर इंडिया का पीएलएफ 79.84 फीसदी रहा.

    फ्लाइट कैंसिलेशन रेशियो

    इससे विमानन कंपनियों को उपभोक्ताओं का भरोसा हासिल करने में मदद मिलती है. इंडिगो इस लिहाज से सबसे शानदार कंपनी है जिसका एफसीआर महज 0.38 फीसदी रहा है.

    गैर सूचीबद्ध कंपनियां मसलन एयर विस्तारा और एयर एशिया का एफसीआर क्रमश. 0.52 फीसदी और 0.57 फीसदी है. स्पाइसजेट का रेशियो 0.92 फीसदी जबकि जेट  एयरवेज का 0.97 फीसदी है. एयर इंडिया इस मामले में सबसे पीछे है जिसका फ्लाइट कैंसिलेशन रेशियो 1.45 फीसदी है.

    इनके अलावा कंपनियों को विमानों के रख-रखाव, प्रति कर्मचारी राजस्व और कर्ज जैसे अहम पहलुओं का भी ध्यान रखना होता है. ईंधन की कीमतों में आई गिरावट से भारत की विमानन कंपनियों को थोड़ी राहत मिली है लेकिन भविष्य में एटीएफ की कीमतें बढ़ने के बाद कंपनियों के प्रबंधन पर सब कुछ निर्भर करता है कि वह कैस इस चुनौती से निपटती हैं.

    First published: 25 May 2016, 13:41 IST
     
    नीरज ठाकुर @neerajthakur2

    सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.