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सरकार महंगे कर सकती है पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 July 2018, 12:58 IST

क्रॉस सब्सिडी के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को प्रोत्साहन देने के प्रयास में सरकार पेट्रोल और डीजल कारों पर मामूली उच्च कर लगाए जाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. वित्त मंत्रालय को लगता है कि कि सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचने के लिए प्रस्ताव पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि सरकार तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (एफएएमई) को प्रोत्साहन दे रही है.

सरकार का यह कदम इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रचार के लिए उत्प्रेरक का भी काम करेगा. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से कार की बिक्री प्रभावित हो सकती है क्योंकि इससे पेट्रोल और डीजल वाहन खरीदने से हवाले ग्राहक हतोत्साहित होंगे.

 

वित्त मंत्रालय को 2022-23 तक फ़ेम योजना चलाने के लिए 9,381 करोड़ के बजट की आवश्यकता होगी. ब्रांड कंसल्टेंसी फर्म एक्सपीरियल के संस्थापक अवीक चट्टोपाध्याय ने इस कदम को बहुत ही प्रतिकूल बताया, उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ईंधन के प्रचार के लिए एक अलग निधि आवंटित की जानी चाहिए. बोझ को पारंपरिक वाहनों के खरीदारों पर नहीं डाला जाना चाहिए.

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भारत में लंबे समय से इलेक्ट्रिक कार लाने पर जोर दिया जा रहा है. जिस तरह दिल्ली में धुंध ने नाक में दम कर रखा है उस हिसाब से अग्रणी कार निर्माता कंपनियां इलेक्ट्रिक कार पेश करने की जद्दोजहद में हैं. इसी कड़ी में देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजूकी भी इस ओर जल्दी कदम रखने जा रही है. दरअसल, मारुति सुजूकी 2020 में अपनी इलेक्ट्रिक कार बाजार में उतार सकती है, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं. 

कंपनी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन बनाने की जल्दी इसलिए भी है क्योंकि भारत सरकार ने एक आदेश जारी किया है कि साल 2030 के बाद देश में सिर्फ बिजली से चलने वाली कारें (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) ही बेचने की इजाजत होगी. इलेक्ट्रिक कार बनाने को लेकर मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन भारतीय बाजार में तभी जल्द आ पाएंगे, जब कार निर्माता कंपनियों को सरकारी मदद मिलेगी.

First published: 11 July 2018, 12:56 IST
 
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