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जीएसटी के खुशनुमा माहौल के बीच कुछ कड़वी कल्पनाएं

नीरज ठाकुर | Updated on: 5 August 2016, 9:51 IST

आखिरकार राज्यसभा ने ऐतिहासिक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल को शून्य के मुकाबले 203 मतों से पारित कर ही दिया. जीएसटी का पारित होना एक ऐसे कानून के लिये सुखद अंत की तरह है जिसपर बीते एक दशक से पूरे देश में निरंतर बहस जारी थी.

इस बिल के पक्ष में हुई वोटिंग का पैटर्न साफ करता है कि एक विचार के रूप में जीएसटी सैद्धांतिक रूप से सभी राजनीतिक दलों को स्वीकार्य है जैसा कि पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने राज्यसभा के अपने भाषण में उल्लेख किया था.

अगर जीएसटी को लेकर वित्तमंत्री अरुण जेटली की समझ पर भरोसा किया जाए तो यह केंद्रीय कर भारत की जीडीपी को एक से दो प्रतिशत तक बढ़ा सकता है.

लेकिन अबतक 160 देश ऐसे हैं जहां जीएसटी लागू किया जा चुका है. हाल के वर्षों में सिंगापुर, मलेशिया और आॅस्ट्रेलिया ने इसे लागू किया और इस नतीजे पर पहुंचे कि सिर्फ इस बिल के माध्यम से देश में आर्थिक समृद्धि लाने के लिये जीडीपी में खुद-ब-खुद बढ़ावा होना लगभग नामुमकिन है.

आईये हम 2015 में जीएसटी लागू करने वाले मलेशिया का उदाहरण लेते हैं. यह दक्षिण पूर्व एशियाई देश करदाताओं की संख्या के मामले में करीब भारत जैसा ही है.

इस वर्ष अप्रैल में मलेशिया के लोग सरकार से जीएसटी वापस लेने की मांग में सड़कों पर उतर आए

भारत की वर्तमान कर व्यवस्था में कुल मिलाकर तकरीबन 3.5 करोड़ करदाता शामिल हैं. हालांकि अगर आयकर विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे देश में करीब 10 करोड़ व्यक्ति और व्यवसायिक संस्थान उसके पास पंजीकृत हैं.

सांख्यिकी विभाग के अनुसार वर्ष 2013 में देश के श्रम बल में से 30 लाख से भी कम या कहें तो सिर्फ 22 प्रतिशत ही आयकर का भुगतान करते हैं. 2013 में पंजीकृत मलेशियन कंपनियों में से सिर्फ 25 प्रतिशत ने ही करों का भुगतान किया.

हालांकि मलेशिया ने छह प्रतिशत के साथ विश्व की सबसे कम जीएसटी दरों के साथ शुरुआत की थी, लेकिन फरवरी 2016 में उसकी साल-दर-साल की उपभोक्ता कीमतें जनवरी की 3.5 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 4.2 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. यह दिसंबर 2008 के बाद से मुद्रस्फीती का उच्चतम आंकड़ा था क्योंकि लगभग हर क्षेत्र में कीमत और लागत में वृद्धि हुई थी.

उच्च मुद्रास्फीती के चलते अर्थव्यवस्था से पैसा बाहर निकालना पड़ा जिसके परिणामस्वरूप उपभोक्ता की मांग में काफी कमी आई. इस वर्ष की पहली तिमाही के दौरान खुदरा बिक्री में 4.4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली.

हालांकि जून 2016 में महंगाई की दर गिरकर 1.6 प्रतिशत तक आ गई लेकिन लोगों द्वारा किये जाने वाले खर्च में हुई कमी और घटते हुए निर्यात के चलते देश की आर्थिक विकास की दर में गिरावट ही आई है. इस वर्ष अप्रैल में मलेशिया के लोग सरकार से जीएसटी वापस लेने की मांग में सड़कों पर उतर आए.

आॅस्ट्रेलिया में जीएसटी को लेकर वर्ष 1993 में बहस होनी शुरू हुई और आखिरकार वर्ष 2000 में इसे कानून के रूप में अपनाया गया. इसके लागू होने के एक वर्ष के भीतर ही मुद्रास्फीती में 3 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली. नतीजतन सरकार को स्थितियां नियंत्रित करने के लिये विभिन्न समूहों और कंपनियों को कई प्रकार की रियायतें देने को मजबूर होना पड़ा. इसके चलते देश की अर्थव्यवस्था और नाजुक स्थिति में पहुंच गई.

आज आॅस्ट्रेलिया में जीएसटी की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के मुद्दे पर बहस चल रही है. लेकिन विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता कम आय वालों पर इसके पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंतित हैं. नेशनल सेंटर फाॅर सोशल एंड इकनाॅमिक माॅडलिंग के एक विश्लेषण के अनुसार मौजूदा 10 प्रतिशत सिर्फ 13.4 प्रतिशत प्रयोज्य आय की खपत करते हैं और अगर दर को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 कर दिया जाए तो यह दर बढ़कर दोगुनी हो सकती है.

आज आॅस्ट्रेलिया में जीएसटी की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के मुद्दे पर बहस चल रही है

अब वापस भारत की तरफ लौटते हैं. उम्मीद की जा रही है कि एनडीए सरकार जीएसटी की दर को कम से कम 18 प्रतिशत रखना चाहेगी. हालांकि यह वैश्विक स्तर पर सबसे उच्चतम जीएसटी की दर नहीं होगी लेकिन इसके परिणामस्वरूप सेवाओं की लागत में इजाफा होने की उम्मीद है.

जैसा कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिंदंबरम द्वारा भी कहा गया कि सेवाओं का भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 57 प्रतिशत का योगदान है. वर्तमान में सेवाओं पर 14.5 प्रतिशत का कर है. 18 प्रतिशत की जीएसटी दर के चलते हवाई टिकटों, डेबिट/क्रेडिट कार्ड के लेनदेन, मूवी टिकट, टेलीफोन, रेल यात्रा, वातानुकूलित रेस्टोरेंट इत्यादि में खाना-पीना जैसी सेवाओं की कीमतों में वृद्धि होगी.

आरबीआई को देश की वर्तमान पांच प्रतिशत की मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिये उच्च ब्याज दर को अपनाना पड़ रहा है.

ऐसे परिदृश्य में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि जेटली कैसे जीएसटी लागू होने के बाद देश की बदली हुई अर्थव्यवस्था को संभालते हैं.

अगर राज्यसभा में जीएसटी का पारित होना कर सुधारों में एनडीए के लिये क्लाइमेक्स की तरह है तो इस बात की पूरी आशंका है कि जीएसटी का कार्यान्वयन फिलहाल पूरे देश में महसूस किये जा रहे उत्साह का एंटी-क्लाईमेक्स साबित हो.

First published: 5 August 2016, 9:51 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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