Home » बिज़नेस » WPI inflation stays negative for 16th month
 

16वें महीने भी शून्य से नीचे रही थोक महंगाई दर

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 March 2016, 15:18 IST
QUICK PILL
  • फरवरी महीने में थोक मूल्य सूचकांक आधारित (डब्ल्यूपीआई) महंगाई दर घटकर -0.91 फीसदी हो गई. जनवरी में थोक महंगाई दर -0.90 फीसदी थी. पिछले 16 महीनों में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर शून्य से नीचे रही है.
  • फरवरी में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 3.35 फीसदी रही जबकि दालों की कीमतों में 38.84 फीसदी की तेजी आई. इसके अलावा फरवरी महीने में अनाज, दूध और मांस की कीमतों में महंगाई दर्ज की गई. प्याज की कीमतों में हालांकि 13.22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

फरवरी महीने में थोक मूल्य सूचकांक आधारित (डब्ल्यूपीआई) महंगाई दर घटकर -0.91 फीसदी हो गई. जनवरी में थोक महंगाई दर -0.90 फीसदी थी. पिछले 16 महीनों में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर शून्य से नीचे रही है.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल 2015 से फरवरी 2016 में थोक महंगाई दर शून्य से 1.19 फीसदी नीचे रही है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह शून्य से 2.61 फीसदी नीचे रही थी.

फरवरी में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 3.35 फीसदी रही जबकि दालों की कीमतों में 38.84 फीसदी की तेजी आई. इसके अलावा फरवरी महीने में अनाज, दूध और मांस की कीमतों में महंगाई दर्ज की गई. प्याज की कीमतों में हालांकि 13.22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. 

मौजूदा वित्त वर्ष में खाद्य महंगाई दर 3.93 फीसदी रही है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह दर 6.86 फीसदी रही थी. 

थोक मूल्य सूचकांक में ईंधन की कीमतों का अनुपात ज्यादा होता है और ईंधन की कीमतों में आई कमी की वजह से फरवरी महीने में भी थोक महंगाई दर शून्य से नीचे रही.

मैन्युफैक्चर्ड प्रॉडक्ट्स की कीमतों में भी गिरावट से थोक महंगाई दर को काबू में रखने में मदद मिली. इस्पात की कीमतों में 12.48 फीसदी की गिरावट आई. इसके साथ ही मिश्रधातु, कृत्रिम कपड़े और रबड़ एवं प्लास्टिक की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई.

दरों में कटौती को लेकर बनेगा दबाव

राजकोषीय घाटे को काबू में रखे जाने और अब थोक महंगाई दर में गिरावट आने के बाद उद्योग की मांग रिजर्व बैंक से ब्याज दरों में कटौती की होगी. 

हालांकि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती का फैसला लेने के दौरान खुदरा महंगाई दर के साथ औद्योगिक उत्पादन दर का आकलन करता है. औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में जनवरी महीने में भी गिरावट आई है. 

इंडस्ट्री पिछले काफी समय से ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रही है ताकि औद्योगिक गतिविधियों को मजबूत किया जा सके. ऐसे में थोक महंगाई दर में लगातार जारी गिरावट को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत हुई है.

और पढ़ें: एनसीडीआरसी: HDFC बैंक नहीं करता देश से मुहब्बत

और पढ़ें: अब सेबी कसेगी विलफुल डिफॉल्टर्स की नकेल

और पढ़ें: टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार को लगाया 12400 करोड़ का चूना

First published: 14 March 2016, 15:18 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी