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इस गांव में जाति को ठेंगा दिखाकर शादी कर रहे प्रेमी जोड़े

शिरीष खरे | Updated on: 9 January 2017, 8:15 IST

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग-153 पर सारंगढ़ के इलाक़े में एक गांव रेड़ा है. इस गांव में बीते दो साल में 2 दर्जन से ज़्यादा शादियां ऐसी हुई हैं जहां लड़के-लड़कियों ने अपनी जाति को दरकिनार करते हुए मनपसंद जीवनसाथी चुन लिया. रेड़ा गांव के बुज़ुर्गों का कहना है कि उन्होंने इस चलन पर निगरानी शुरू कर दी है और अभी कम से कम आधा दर्जन से ज़्यादा ऐसे प्रेमी जोड़े हैं, जिन पर अंतरजातीय विवाह की तैयारी करने का संदेह है. 

रेड़ा गांव में ज़्यादातर आबादी ओबीसी समाज की अलग-अलग जातियों की है जो खेती और मज़दूरी पर निर्भर हैं. यहां के सरपंच बसंती साहू बताते हैं, पिछले दो साल से गांव में अंतरजातीय विवाह का प्रचलन बढ़ा है. इस दौरान करीब दर्जन भर से अधिक अलग-अलग जाति के लड़का-लड़कियों ने प्रेम विवाह किया है. हमारे गांव में इसे गलत माना जा रहा है. ज़्यादातर शादियां ओबीसी, एससी और एसटी समाज के बीच हो रही है.

नए साल के पहले दिन भागा जोड़ा

ग्रामीणों को लगता है कि प्रेमियों को उनकी समझाइश काम आएगी और वे किसी तरह अपनी जाति व्यवस्था को बचा सकेंगे. लेकिन, इस साल के पहले दिन ही एक जोड़ा जोड़ा शादी के लिए गांव से भाग गया है.

गांव में अंतरजातीय विवाह के लिए प्रेमियों द्वारा गांव छोड़कर भागने की शुरूआत को लेकर कोई भी ग्रामीण सटीक जानकारी तो नहीं देता है, मगर इतना जरूर है कि बीते दो-तीन साल में यह चलन बहुत बढ़ा है. बताया जा रहा है कि 2015 में महीने दर महीने पांच जोड़ों ने समाज के जातिगत बंधनों को तोड़ते हुए अंतरजातीय विवाह को अपनाया. 2016 को भी इतने ही जोड़ गांव छोड़ चुके हैं.

नाम न बताने की शर्त पर एक प्रेमी जोड़े ने बताया कि अंतरजातीय विवाह न होने की हालत में कई जोड़े खुदकुशी तक कर लेते हैं, लेकिन हमने बंधनों को तोड़कर उड़ऩे की सोची. हमने सोचा कि कोई हमें मारे तो मारे, लेकिन हम खुद अपनी जान नहीं देंगे. 

दूसरे जोड़े ने बातचीत में बताया हम भी दो साल पहले घर छोड़कर भागे थे. हमने सोचा था गाँव वापस नहीं लौटेंगे. लेकिन, रायपुर जैसे बड़े शहर में हमारा मन नहीं लगा. फिर सोचा कि शुरुआत में विरोध होगा, फिर धीरे धीरे सब मान जाएंगे, पर यहां जिंदगी मुश्किल हो रही है. पिता के हिस्से की एक जमीन के टुकड़े पर किसानी करते हैं. लेकिन, गांव में कोई मजदूर का काम देने को राजी नहीं, इसलिए कुछ महीनों के लिए गांव से पलायन करते हैं. 

परिवार राज़ी, पंचायत नहीं

गांव के एक युवक ने बताया कि ऐसे प्रेमी-जोड़ों के मां-पिता फिर भी अपने बच्चों की भावनाएं समझते हैं, लेकिन पंचायत और अन्य ग्रामीण उनकी भावनाओं को नहीं समझ पाते. गांव में कुछ जोड़ों के परिजनों ने दबी जुबान में कहा कि शुरुआत में यह बात उन्हें स्वीकार नहीं थी, बाद में बच्चों की खुशी और जिद को देखते हुए वे राजी भी हो गए, मगर समाज के लोगों का भय उन्हें इस मामले में खुलकर सामने आने से रोकता रहा.

एक पिता ने कहा कि बच्चों की खुशी और गम को मां-बाप समझते हैं, लेकिन समाज के वे लोग नहीं समझते जो इस मामले में पंचायत करने के लिए बैठेंगे. इस बात के भय के कारण भी उनकी जुबान बंद रहती है. दूसरी तरफ, पंचायत के सदस्यों ने कहा है कि उनकी नरमी के कारण प्रेमी-जोड़ों गांव छोड़कर विवाह बंधन में बंध रहे हैं, मगर अब उन्हें कड़ी सजा देने के बारे में सोच रहे हैं. उनका दावा है कि इस मामले में पूरा गांव एकमत है.

गांव में अब ऐसे प्रकरणों पर रोकथाम लगाने की तैयारी की जा रही है. बताया जा रहा है कि यहां जल्द ही अंतरजातीय विवाह को रोकने के लिए भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. 

First published: 9 January 2017, 8:15 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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