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शिवराम कल्लूरी बीमार, बस्तर के लिए नए आईजी की तलाश

राजकुमार सोनी | Updated on: 7 February 2017, 8:19 IST
(फाइल फोटो )
QUICK PILL
  • बस्तर के विवादित आईजी शिवराम कल्लूरी बीमार हो गए हैं. इलाज के लिए उन्हें विशाखापट्टनम के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. 
  • संवेदनशील क्षेत्र होने के नाते छत्तीसगढ़ सरकार उनकी जगह किसी नए अफ़सर को बस्तर की कमान सौंपने पर विचार कर रही है. 

माओवादी अभियान में अपनी कार्यशैली के चलते विवादों से घिरे रहने वाले बस्तर आईजी शिवराम प्रसाद कल्लूरी फिलहाल बीमार हैं. जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के डीन यूएस पैकरा के मुताबिक गुरूवार की रात आईजी कल्लूरी को गर्दन और सीने में दर्द उठा था. परीक्षण में उनके खून में यूरिया की मात्रा 50 मिलीग्राम से बढ़कर 200 मिलीग्राम हो गई थी जबकि किडनी में क्रिटोन की मात्रा एक से बढ़कर 10 मिलीग्राम हो गई थी. पैकरा के मुताबिक चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें रायपुर रेफर किया था, लेकिन वे विशाखापट्टनम चले गए और अब वहां के केयर अस्पताल में भर्ती हैं.

बस्तर का नया आईजी

माओवादी ऑपरेशन के डीजी दुर्गेश माधव अवस्थी के मुताबिक जिस तरह की मेडिकल रिपोर्ट आई है, उससे कल्लूरी को दोबारा स्वस्थ होने में समय लग सकता है. चूंकि बस्तर का पूरा इलाका माओवाद से प्रभावित हैं और काफी संवेदनशील है, इसलिए वहां एक वरिष्ठ अफसर की तैनाती बेहद ज़रूरी है.

अवस्थी के मुताबिक फिलहाल छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के आईजी बीपी पोषार्य, पुलिस मुख्यालय में योजना प्रबंध का कार्य देख रहे हैं. आईजी जीपी सिंह, एच.के.राठौर और पवन देव (दोनों आईजी सीआईडी) के नामों की अनुशंसा सरकार के पास भेजी गई है. पुलिस अफसरों की पदस्थापना में सरकार को सुझाव देने वाले एक प्रमुख अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वरिष्ठता क्रम में आईजी पवन देव ( बैच 1992 ) आगे हैं, लेकिन पुलिस अफसर जीपी सिंह (बैच 1994) बस्तर के पुलिस अधीक्षक रहे हैं, इसलिए सरकार उन्हें मौका दे सकती है.

बीमारी और कांग्रेस के सवाल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रवक्ता महेंद्र छाबड़ा ने शिवराम कल्लूरी की बीमारी के दावे पर शक़ जताया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कल्लूरी को 30 नवम्बर को तलब किया हुआ है, लेकिन अब जब वे अस्पताल में दाखिल हो गए हैं तो आयोग के सामने उनका हाज़िर होना मुमकिन नहीं हो पाएगा. छाबड़ा का कहना है कि कल्लूरी जल्द ही स्वस्थ हों, लेकिन अगर वे सचमुच में बीमार हैं तो डॉक्टरों के विशेष दल को दौरा कर उनका परीक्षण करना चाहिए. 

हाल ही में बस्तर पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद और जेएनयू की नंदिनी सुंदर सहित कुछ अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया था. आरोप है कि यह मुक़दमा आईजी कल्लूरी की शह पर किया गया था. इसी सिलसिले में उन्हें मानवाधिकार आयोग ने तलब भी कर रखा है.   

छाबड़ा का कहना है कि प्रदेश में कल्लूरी की पहचान एक क्रूर और अविश्वसनीय अफसर की बनी हुई है. वे बेगुनाह ग्रामीणों को माओवादी और माओवादियों को पुलिस का मुखबिर बनाते आए हैं, नतीजतन उनके किसी भी दावे पर यकीन करना मुश्किल है. छाबड़ा का कहना है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक से बढ़कर एक निजी अस्पताल हैं, लेकिन कल्लूरी का हेलिकॉप्टर से आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में भर्ती होकर इलाज करवाना कई शक पैदा करता है. 

विवादों से पुराना नाता

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल का आरोप है कि कल्लूरी सरकार के एजेंट बनकर काम कर रहे हैं. शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में भूपेश ने कहा कि जग्गी हत्याकांड के दौरान भी कल्लूरी आरोपों से घिरे थे, वहीं जब सरगुजा के बलरामपुर में पदस्थ थे, तब एक महिला ने उन पर बलात्कार का आरोप लगाया था.

बघेल ने कहा कि जो अफसर यह कहता हो कि वह झीरम टू करवा देगा, वह झीरम घाटी की घटना में निश्चित रुप से शामिल होगा. बघेल ने कहा कि कल्लूरी ने सरकार की कमजोर नस दबा रखी है, जिसके चलते बस्तर एक अराजक क्षेत्र में तब्दील हो गया है.

First published: 26 November 2016, 8:13 IST
 
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