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शिवराम कल्लूरी को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने माओवादियों से शांति वार्ता का सुझाव दिया

राजकुमार सोनी | Updated on: 22 October 2016, 7:38 IST
QUICK PILL
  • ताड़मेटला अग्निकांड की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार को नसीहत दी है. 
  • नोबल शांति पुरस्कार सम्मानित कोलंबिया सरकार की मिसाल देकर अशांत राज्यों में शांति बहाली के लिए भी कहा है. 

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार से कहा कि वे माओवादी हिंसा खत्म करने के लिए शांतिवार्ता का रास्ता अपनाएं. कोर्ट ने इस साल के नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित कोलंबिया सरकार की मिसाल देते हुए कहा, जिस तरह से वहां विद्रोहियों के साथ बातचीत के जरिए शांति लाने की पहल की गई है, कुछ उसी तरह की पहल मिजोरम, नागालैंड और छत्तीसगढ़ के विद्रोहियों से भी की जानी चाहिए. 

शीर्ष कोर्ट ने यह सुझाव पांच साल पहले बस्तर के ताड़मेटला, तिम्मापुर और मोरपल्ली आगजनी कांड की सुनवाई के दौरान दिए. इस घटना की जांच सीबीआई कर रही है. कोर्ट ने पिछले माह सीबीआई की जांच की धीमी प्रक्रिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा था. 

कोर्ट की इस सख्ती के बाद छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से यह कहा गया कि गांवों में आगजनी की घटना को माओवादियों ने अंजाम दिया था, जबकि सीबीआई ने गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर यह बताया कि गांवों में सीआरपीएफ, विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) और राज्य पुलिस की टुकड़ी की मौजूदगी के दौरान ही आगजनी, आदिवासियों की हत्या और महिलाओं के साथ बलात्कार की वारदात हुई थी. 

अग्निवेश और नंदिनी सुंदर की याचिका

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश और प्रोफेसर नंदिनी सुंदर की ओर से दायर याचिका में कहा गया, 11 से 16 मार्च-2011 के बीच बस्तर के ताड़मेटला, मोरापल्ली और तिमपुरम गांवों में पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया था. इस दौरान तीन लोग मारे गए, तीन महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और तीनों गांवों में 252 घर जला दिए गए. 

26 मार्च को जब सामाजिक कार्यकर्ता अग्निवेश राहत कार्य के लिए गांव पहुंचे तो उनपर दोरनापाल में सलवा जुड़ूम के नेताओं ने जानलेवा हमला किया. सुप्रीम कोर्ट ने 5 जुलाई 2011 को इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए. 

17 अक्टूबर 2016 को सीबीआई ने स्वामी अग्निवेश पर हमले को लेकर सीबीआई की रायपुर स्थित विशेष कोर्ट में सात एसपीओ के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए. इसके अलावा सलवा जुड़ूम के 26 लोगों के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किए गए. वहीं, रेप और हत्या के मामले की जांच अब भी चल रही है.

इसके पहले ताड़मेटला आगजनी कांड सामने आने पर प्रशासन ने इसे नकार दिया था. सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार के आवाज उठाने से मामले ने तूल पकड़ा तो तत्कालीन कलक्टर आर.प्रसन्ना ज़मीनी हक़ीक़त जानने के लिए गांव जाना चाहा, लेकिन तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिवराम कल्लूरी ने माओवादियों का खतरा बताते हुए उन्हें गांव नहीं जाने दिया. दोनों अफसरों के बीच तीखी तकरार सुर्खियां बनीं.  

सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर हिमांशु कुमार ने कहा  है कि जब सीबीआई की तफ्तीश में आ चुका है कि वारदात सुरक्षाबलों की मौजूदगी में अंजाम दी गई और कल्लूरी की भूमिका भी सामने आ चुकी है तो उनकी सज़ा तय हो जानी चाहिए. बस्तर में वह अभी भी यही कर रहे हैं. 

इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश भी घटनास्थल पर पहुंचे थे, लेकिन उनके काफिले पर पथराव किया गया. फिर प्रोफेसर नंदिनी सुंदर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. जांच के लिए गांव पहुंची सीबीआई टीम पर भी हमले किए गए. 

इस कांड की जांच में देरी को देखते हुए नंदिनी सुंदर ने कोर्ट से इसमें तेजी लाने का आग्रह किया. कोर्ट ने सीबीआई को इसके लिए शपथ पत्र के साथ रिपोर्ट देने के लिए कहा था और इसी की सुनवाई शुक्रवार को हुई.

First published: 22 October 2016, 7:38 IST
 
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