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...और सरकार कल्लूरी की पीठ थपथपा रही है

शिरीष खरे | Updated on: 21 November 2016, 7:36 IST
QUICK PILL
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेश बघेल ने प्रोफेसर नंदिनी सुंदर समेत कइयों पर दर्ज एफआईआर के ख़िलाफ़ और इस कार्रवाई के लिए ज़िम्मेदार अफसरों को सज़ा देने की मांग विधानसभा में उठाई है. 
  • वहीं बस्तर के तीन गांव ताड़मेटला, तिम्मापुरम और मोरपल्ली में आगजनी, हत्या और बलात्कार की वारदात में पुलिस की भूमिका उजागर होने के बाद भी सरकार आईजी कल्लूरी को शाबाशी दे रही है. 

प्रोफेसर नंदनी सुंदर समेत चार पर हत्या का मुक़दमा दर्ज होने के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस की चौतरफ़ा निंदा हो रही है मगर राज्य सरकार ने इस कार्रवाई के लिए बस्तर आईजी शिवप्रसाद कल्लूरी की पीठ थपथपाई है. वो भी तब, जब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव विवेक ढांड और बस्तर जोन के आईजी शिवप्रसाद कल्लूरी के खिलाफ सम्मन जारी किया है. 

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शुक्रवार को विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कल्लूरी पर तीखे तेवर दिखाए. महिला उत्पीडऩ के मामले पर बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक भूपेश बघेल ने कल्लूरी को जेल भेजने की मांग की. मगर राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पेकरा बगैर नाम लिए कहा, जिस अफसर के खिलाफ लगातार बातें हो रही हैं, उसी ने सरगुजा को नक्सल मुक्त किया है.

कल्लूरी पर कार्रवाई की मांग

महिला उत्पीड़न के मामले में हो रही चर्चा के दौरान बघेल ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां महिला अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. उन्होंने सदन में बस्तर का हवाला देते हुए कहा, वहां तो रक्षक ही भक्षक बन बैठा है. मड़कम हिड़मे और मीना खलगो सहित तमाम प्रकरणों में कोर्ट से लेकर सदन में चर्चा होने के बावजूद आरोपी खाकी पहने घूम रहा है. उन्होंने ऐसे अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. इस पर गृह मंत्री पैकरा ने आश्वासन दिया कि मड़कम हिड़मे और मीना खलगो के साथ अनाचार और उनकी हत्या में शामिल दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा.

इन दिनों कल्लूरी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से दुश्मनी निकालने के लिए उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराने के आरोपों के कारण चर्चा में हैं. इसी प्रकरण में गुरुवार को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र भेजकर मुख्य सचिव ढांड और बस्तर आईजी कल्लूरी को तलब किया है. बस्तर पुलिस पर आरोप है कि उसने नंदनी सुंदर के अलावा जेएनयू प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, सीपीआई (एम) कार्यकर्ता संजय पराते और मंजू कवासी और वाम कार्यकर्ता विनीत तिवारी सहित अन्य को गिरफ्तार करने की धमकी दी थी. 

इसी वजह से आयोग ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर लगे हत्या, गलत तरीके से प्रवेश और साजिश सहित अन्य अपराधिक प्रकरणों पर स्वत: संज्ञान लिया है. साथ ही 30 नंवबर तक दोनों अफसरों को आयोग के सामने पेश होकर जवाब देने को कहा गया है.

शांति वार्ता की सुगबुगाहट

बस्तर की मौजूदा स्थिति पर आंतरिक सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार और नक्सलियों के बीच शांति वार्ता के प्रयास शुरू किए जाएंगे. हालांकि, उन्होंने सुरक्षा का हवाला देते हुए यह बताने से मना कर दिया कि शांति वार्ता की पहल किसके द्वारा की जा रही है. उन्होंने माना कि पुलिस का काम लाशों को गिनना नहीं बल्कि जन सुरक्षा के लिए माहौल बनाना है. उन्होंने कहा कि पुलिस की नक्सलियों से कोई निजी लड़ाई नहीं है.

वहीं, आईजी कल्लूरी ने कहा है कि मीडिया बस्तर की झूठी तस्वीर पेश कर रही है.

First published: 21 November 2016, 7:36 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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