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छत्तीसगढ़: 500 से ज्यादा फैक्ट्रियों में एक लाख मज़दूरों की छंटनी

शिरीष खरे | Updated on: 15 December 2016, 8:03 IST
(फाइल फोटो )

नोटबंदी ने छत्तीसगढ़ के बड़े और मझोले उद्योगों की कमर तोड़ दी है. प्रदेश की 500 से ज्यादा फैक्ट्रियों में 8 नवंबर, 2016 के बाद नकदी की कमी के कारण उत्पादन 50 प्रतिशत कम हो गया है. यह आंकड़ा छत्तीसगढ़ राज्य चैंबर ऑफ कामर्स ने जारी किया है.

राज्य चैंबर ऑफ कामर्स के मुताबिक उत्पादन घटने से मजदूरों की संख्या में भी तेजी से गिरावट दर्ज हुई है. बड़े और मझोले श्रेणी के उद्योगों में 25 प्रतिशत तक मजदूरों की छंटनी की गई है. संख्या की बात की जाए तो राज्य चैंबर ऑफ कामर्स ने काम से हाथ धोने वाले मजदूरों का आंकड़ा एक लाख से ज्यादा बताया गया है.

राज्य चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष अमर पनवानी ने कैच से बातचीत में कहा, अकेले रायपुर जिले के उरला और सिलतरा इन दो औद्योगिक क्षेत्रों में नोटबंदी के बाद से एक हजार से ज्यादा मजदूरों की छंटनी की गई है. बताया जा रहा है कि काम से निकाले जाने के अलावा बड़ी संख्या ऐसे मजदूरों की भी है जिन्होंने खुद ही काम करने से इंकार कर दिया.

निकाले जाने के अलावा बड़ी संख्या ऐसे मजदूरों की भी है जिन्होंने खुद ही काम करने से इंकार कर दिया

रायपुर स्थित उरला इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विनोद केजरीवाल ने बताया, मजदूरों की संख्या दो कारणों से कम हो गई है. एक तो उन्हें कई उद्योगों से हटा दिया गया है. वहीं, तुरंत नकद भुगतान न होने के कारण उन्होंने उन जगहों पर काम खोजना शुरू किया जहां नकद भुगतान के बाद वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी चला सकें. 

केजरीवाल ने यह भी कहा कि उन्हें उधारी में काम करने का प्रस्ताव भी दिया गया था, लेकिन रोज कमाने के बाद पेट भरने वाले मजदूरों के लिए इसे स्वीकार करना संभव नहीं था. उनके मुताबिक सिर्फ उरला इंडस्ट्रीज से 500 मजदूर अपने इलाकों को लौट गए हैं. प्रदेश के कई अन्य इंडस्ट्रीज एरिया जैसे बिलासपुर, दुर्ग और रायगढ़ जिलों से भी इसी तरह के मामले सामने आ रहे हैं.

राज्य चैंबर ऑफ कामर्स, रायपुर इकाई के अध्यक्ष अनिल नचरानी ने बताया, प्रदेश के उद्योगों में आधा उत्पादन कम हुआ है. उनका कहना है कि पहले मंदी ने उद्योगों की आर्थिक स्थिति खराब कर दी थी, अभी उससे उबर ही रहे थे कि नोटबंदी ने फिर मुश्किल में डाल दिया है. नचरानी की जानकारी में जांजगीर-चांपा जिले के उद्योगों से भी हजारों मजदूरों की छंटनी की गई है.

कारोबारियों में डर

इस समस्या पर रणनीति बनाने के लिए राज्य के कारोबारी राजधानी रायपुर में जुटे. राज्य चैंबर ऑफ कामर्स ने कहा है कि नोटबंदी का असर मजदूरों की छंटनी के रूप में सामने आया है. यह संकट आगे और बढऩे की आशंका है. सिर्फ सिलतरा इंडस्ट्रीज से ही करीब 600 मजदूरों को निकाला गया है. बड़ी संख्या में मजदूर गांव वापस लौट रहे हैं. सभी उद्योगों का यही हाल है. इससे निपटने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है. 

एक स्टील कारोबारी ने नाम छिपाने की शर्त पर बताया कि नोटबंदी का उनके उद्योग पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है लेकिन वे खुलकर इसपर बात करने से कतरा रहे हैं. उन्हें लगता है कि यह एक राजनीतिक विषय भी है और इसके विरोध में बयान देकर वे सरकार या किसी राजनीतिक दल के निशाने पर नहीं आना चाहते. 

ऐसे ही रियल एस्टेट कारोबारी ने बताया कि नोटबंदी से उनका व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. जमीन और मकान से जुड़े तमाम प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की टेढ़ी नजर के बाद बंद कर दिए गए हैं. निर्माण सामग्री की बिक्री भी तेजी से घटी है. इससे रियल एस्टेट के सेक्टर में काम कर रहे लोगों के सामने रोजगार का संकट गहराने लगा है. यहां तक कि विभिन्न नगर निगमों और राज्य के प्रोजेक्ट तक खटाई में पड़ गए हैं.

दूसरी तरफ, राज्य प्रशासन नोटबंदी के कारण छंटनी की बात से इंकार करता है

रायपुर शहर में सालों से गहनों का काम करने वाले पश्चिम बंगाल और राजस्थान के कारोबारी अपने राज्यों की ओर लौट गए हैं. सर्राफा कारोबारी प्रकाश बजाज ने बताया कि उनके कारोबार में 90 प्रतिशत गिरावट आई है. हालत यह है कि कमाई हो नहीं रही है और उन्हें अपने कर्मचारियों को वेतन भी देना पड़ रहा है.

दूसरी तरफ, राज्य प्रशासन नोटबंदी के कारण छंटनी की बात से इंकार करता है. वाणिज्य व उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने कैच को बताया कि उद्योगों की छंटनी को सीधे नोटबंदी से जोड़कर देखना ठीक नहीं है. प्रदेश में अलग-अलग उद्योगों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं. मांग और उत्पादन के हिसाब से मजदूरों को रखा जाता है. अब कहा जा रहा है कि नोटबंदी के कारण मजदूरों को निकाला जा रहा है, जबकि बहुत सारे कारकों के कारण यदि मांग ही कम हो गई हो तो उत्पादन घट सकता है.

First published: 15 December 2016, 8:03 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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