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छत्तीसगढ़: बेटी के बाद अब किसान पिता भी दम तोड़ने के कगार पर

राजकुमार सोनी | Updated on: 20 May 2017, 10:25 IST
प्रतीकात्मक तस्वीर

छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या की ख़बरों के बीच जांजगीर-चांपा जिले के गांव धनवा के एक किसान चरणदास प्रधान ने मुख्यमंत्री रमन सिंह को मार्मिक खत लिखकर खुद और परिवार की ज़िंदगी बचाने की गुहार लगाई है. चरणदास ने खत में लिखा है कि फसल के खराब होने के बाद सहायता राशि पाने के लिए वो दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन राहत कहीं से नहीं मिली. आर्थिक तंगी के चलते पहले उनकी 19 साल की बेटी ने दम तोड़ा और अब वह खुद परिवार समेत मौत के मुहाने पर खड़े हैं.

चरणदास ने मुख्यमंत्री को अपनी व्यथा बताते हुए लिखा है कि उनका गांव धनवा सिंचाई नहर के आखिरी टेल पर मौजूद है. उन्होंने लगभग पौने छह एकड़ में धान की फसल लगाई थी, लेकिन धान की बाली निकलने के दौरान नहर से पानी बंद कर दिया तो पूरी फसल चौपट हो गई. फसल के बरबाद होने के बाद उन्होंने कोटवार, पटवारी, तहसीलदार, कलेक्टर को लिखित में जानकारी भेजी, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली.

...और बेटी चल बसी

चरणदास ने मुख्यमंत्री को लिखा है कि इस दौरान उनकी 19 साल की बेटी किरण प्रधान को किडनी की गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया. बिलासपुर के केयर एन क्योर हास्पिटल के डाक्टरों ने बताया कि इलाज में ढाई से तीन लाख रुपये का खर्च आएगा. बेटी को बचाने के लिए कलेक्टर से फसल बीमा और सहायता राशि की मांग की, लेकिन उसकी गुहार पर गौर नहीं किया गया.

चरणदास ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वह हर हाल में अपनी बेटी को बचाना चाहता था, इसलिए उसने अपने आधे कच्चे और पक्के मकान को 2 लाख 60 हजार रुपये में गिरवी में रखा, लेकिन बेटी ने दम तोड़ दिया. किरण प्रधान अब इस दुनिया में नहीं है... यह बताने के लिए चरणदास ने बतौर सबूत मुख्यमंत्री को डेथ सार्टिफिकेट भी भेजा है.

बैंक कर रहे हैं तकाजा

चरणदास ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने बेटी के इलाज के लिए जो घर गिरवी रखा है, अगर उसे समय रहते नहीं छुड़ाया तो भरी-बरसात में बेघर होना पड़ेगा. अच्छी फसल के लिए बैंक से एक लाख 30 हजार रुपए का कर्ज भी ले रखा है, जिसे वह अदा नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी वजह से बैंक वाले धमकी भरा तकाज़ा भेज रहे हैं.

किसान ने अपनी मार्मिक गुहार में लिखा है कि अभी खेती के लिए कुछ समय शेष है, लेकिन कर्जदार होने की वजह से उसे खाद, बीज, दवाई, जोताई, निंदाई और गुड़ाई के लिए कौन सहायता देगा? अगर समय रहते आर्थिक मदद नहीं मिली तो पूरा परिवार सड़क पर आ जाएगा और उसके पास मौत को गले लगाने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा.

First published: 20 May 2017, 10:25 IST
 
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