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छत्तीसगढ़: भाजपा और कांग्रेस ने 18 सालों में मात्र 13 फीसदी महिलाओं को दिए टिकट

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 September 2018, 13:58 IST

राजनीति में महिलाओं को 33 फीसदी भागीदारी देने की बात तो हर राजनीतिक दल के लोग करते आए हैं, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के 18 सालों के बाद बीजेपी और कांग्रेस ने महज 13 फीसदी महिलाओं को ही टिकट दिया है.

छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में फिर से विधानसभा चुनाव होने हैं. यहां विधानसभा की 91(90+1 नॉमिनेटेड) सीटें हैं. ऐसे में दोनों दलों से जुड़ी महिलाओं को उम्मीद है कि उन्हें भरपूर तव्वजो मिलेगी. वैसे हर चुनाव में करीब 70 फीसदी महिलाएं अपने मताधिकार का प्रयोग करती है और कम हैरत की बात नहीं है कि मताधिकार में आधी आबादी ग्रामीण इलाकों से ही आती है. विशेषकर उन इलाकों से जो पिछड़े कहलाते हैं या माओवाद से प्रभावित हैं.

 

ऐसा भी नहीं है कि शहर में रहने वाली महिला मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करती, फिर यह सत्य है कि मतदान के मामले में ग्रामीण महिलाओं का रुझान अपेक्षाकृत थोड़ा अधिक है. प्रदेश में वर्ष 2013 के चुनाव में जहां 85 लाख 92 हजार 556 पुरूष मतदाताओं ने मतदान किया था तो मतदान के मामले में महिलाएं भी पीछे नहीं थीं. इस चुनाव में कुल 83 लाख 85 हजार 57 महिला मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था.

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वर्ष 2013 में कुल 62 महिलाएं चुनाव मैदान में थीं. इन महिलाओं में से केवल पांच महिलाएं ही विधानसभा तक पहुंच पाई थीं. वर्ष 2008 के चुनाव में 92 महिलाओं ने भाग्य आजमाया था जिनमें से केवल 12 को ही सफलता मिल पाई. इस तरह 2013 के चुनावी समर में 84 महिलाओं में केवल 10 ही जीतकर आ पाईं.

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महिलाओं को टिकट देने में कांग्रेस आगे-
महिलाओं को टिकट देने के मामले में कांग्रेस हालांकि भाजपा से आगे हैं, लेकिन जीत दर्ज करने के मामले में भाजपा आगे है. वर्ष 2003 के चुनाव में कांग्रेस ने 8 महिलाओं को टिकट दिया था जिसमें से एक भी महिला चुनाव जीत नहीं पाई. इस चुनाव में भाजपा की रेणुका सिंह ने प्रेमनगर सीट से, पिंकी धुर्वे ने सिहावा से, रमशीला साहू ने गुंडरदेही और बसपा की कामदा जोल्हे ने सारंगढ़ से जीत दर्ज की थी. विधानसभा अध्यक्ष रहे राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के निधन से कोटा सीट के रिक्त होने के बाद वर्ष 2006 में अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी ने वहां से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

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वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 महिलाओं को टिकट दिया था. जिसमें से कोटा से रेणु जोगी, सक्ती से सरोजा मनहरण, सिहावा से अंबिका मरकाम, सारंगढ़ से पदमा घनश्याम मनहर और दुर्ग ग्रामीण से प्रतिमा चंद्राकर ने जीत का परचम फहराया था. इस चुनाव में भाजपा की रेणुका सिंह, बलौदाबाजार की लक्ष्मी बघेल, डौंडीलोहारा की नीलिमा सिंह टेकाम, कांकेर की सुमित्रा मारकोले, कोंडागांव से लता उसेंडी और वैशाली नगर से सरोज पाण्डेय ने जीत दर्ज की थी.

 

वर्ष 2013 के चुनाव में कुल 85 महिलाएं मैदान में थीं. कांग्रेस ने इस बार 14 महिलाओं को मैदान में उतारा, लेकिन कोटा से रेणु जोगी, डौंडीलोहारा से अनिला भेडिय़ा, दंतेवाड़ा से देवती कर्मा और मोहला-मानपुर से तेजकुंवर नेताम ने चुनाव जीता, जबकि भाजपा की सुनीति राठिया ने लैलूंगा, केराबाई मनहर ने सारंगढ़, रुपकुमारी चौधरी ने बसना, रमशीला साहू ने दुर्ग ग्रामीण, सरोजनी बंजारे ने डोंगरगढ़ और चंपादेवी पावले ने भरतपुर सोनहत से चुनाव जीता.

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प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम का कहना है कि जीत-हार बहुत अलग मसला है. हमारे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का स्वभाव मोदी जैसा नहीं है इसलिए हमें उम्मीद है कि टिकट वितरण के दौरान महिलाओं को भरपूर तव्वजो मिलेगी. मोदी की पार्टी में न तो महिलाओं को सम्मान दिया जाता है और न ही तरजीह दी जाती है सो वहां क्या होगा यह कहना मुश्किल है. वैसे भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कांग्रेस पार्टी की तरफ से ही उठी थी. इस बार भी हम उम्मीद करते हैं कि महिलाओं को सम्मानजनक अवसर मिलेगा.

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वहीं भाजपा की प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष पूजा विधानी का कहना है कि उनके दल में महिलाओं का सम्मान न केवल संगठन में हैं बल्कि फील्ड में भी है. जो महिलाएं बेहतर कार्य करती है पार्टी उन्हें कोई न कोई पद अवश्य देती है. हमें भी इस बार उम्मीद है कि पार्टी इस बार योग्य और निष्ठावान महिलाओं को तरजीह देगी.

इनपुट- राजकुमार सोनी

First published: 8 September 2018, 13:37 IST
 
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