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छत्तीसगढ़ : एक्शन में CM, बस्तर में TATA की अधिग्रहित जमीन किसानों को लौटाई जाएगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 December 2018, 16:05 IST

छत्तीसगढ़ की नई सरकार एक्शन में दिखाई दे रही है. कृषि ऋण माफी के बाद भूपेश बघेल सरकार ने घोषणा की है कि वह टाटा स्टील परियोजना के लिए बस्तर में आदिवासी किसानों से अधिग्रहित जमीन वापस करने की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रही है.

अभी इस जमी का इस्तेमाल नहीं किया गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे प्रक्रिया के तौर-तरीकों को शुरू करें और अगली कैबिनेट बैठक से पहले एक कार्य योजना प्रस्तुत करें, जो कि मंगलवार को अतिरिक्त मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद होने की संभावना है.

अपने चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस ने वादा किया था कि ऐसी परियोजनाएं जो जमीन अधिग्रहण के पांच साल भीतर शुरू नहीं हो पायी हैं, वह जमीन जमीन मालिकों को वापस कर दी जाएगी. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किसानों से किया था.

2005 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने टाटा स्टील के साथ बस्तर जिले के लोहंडीगुडा क्षेत्र में 19,500 करोड़ रुपये के एकीकृत इस्पात संयंत्र के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. भूमि का अधिग्रहण जो 2008 में आदिवासियों-आदिवासियों का था और सरकार ने लोहंडीगुडा, चिंदगांव, कुम्हाली, बेलियापाल, बांदजी, डबपाल, बडापारोडा, बेलार, सिरसिगुडा और तक्रगुडा के 10 गांवों से 1,764 हेक्टेयर का अधिग्रहण किया.

इस भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर किसानों से काफी बहस हुई थी. कार्यकर्ताओं ने प्रक्रिया को शोषणकारी बताया था. इसके तहत 1,707 किसानों में से 1,165 किसानों, जिनकी भूमि का अधिग्रहण किया गया था, ने मुआवजा स्वीकार कर लिया. सरकार ने कहा कि बाकी का मुआवजा राजस्व जमा निधि के साथ जमा किया गया था.

2016 टाटा स्टील ने घोषणा की कि वह परियोजना से बाहर जा रही रहा है. इसके पीछे अधिकारियों ने विभिन्न कारणों का हवाला दिया, जिसमें विरोध प्रदर्शन, भूमि के अधिग्रहण सहित प्रक्रियात्मक देरी और क्षेत्र में माओवादी खतरा शामिल था. तत्कालीन विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा था कि अधिग्रहित भूमि को उनके मालिकों को लौटा दिया जाना चाहिए. लेकिन तत्कालीन भाजपा सरकार ने कहा था कि अधिग्रहित जमीन एक लैंड बैंक में जाएगी, जिसका उपयोग औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.

कांग्रेस सरकार अब जमीन वापस करने की योजना बना रही है, वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि वे समयबद्धता को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे थे और मंत्रिमंडल के समक्ष एक समेकित दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि जब कैबिनेट का फैसला होगा, तो वह ऐतिहासिक होगा. रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ नेता ने कहा- “यदि आप भारत में भूमि संघर्ष के इतिहास को देखें, तो ऐसा शायद ही कभी हुआ हो, चाहे वह सिंगूर हो या भट्टा परसौल, बस्तर में भी इस अधिग्रहण का कड़ा विरोध हुआ था.

First published: 25 December 2018, 10:55 IST
 
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