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मोदी सरकार ने तीन गुना बढ़ाकर देनी चाही सैलरी, गवर्नर ने लेने से कर दिया इनकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 June 2018, 11:22 IST

केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य के राज्यपालों को तीन गुना सैलरी देने का मन बनाया था लेकिन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बालारामजी दास टंडन ने इस साल मार्च में की गई अपने वेतन में तीन गुना की बढ़ोतरी लेने से इंकार कर दिया है. गवर्नर ने कहा कि ऐसी कोई वजह नहीं है जिससे आधार पर उनकी सैलरी बढ़ाई जाए.

बता दें कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2018 के बजट में देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यों के गवर्नरों की सैलरी में भारी-भरकम इजाफा किया है. इसके तहत राज्य के गर्वनरों की एक महीने की सैलरी में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी की गई है. पहले गवर्नरों की सैलरी एक लाख दस हजार रुपये थी लेकिन बढ़ोतरी के बाद तीन लाख पचास हजार रुपये हो गई है. 

राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ के महालेखाकार (ऑडिट) को पत्र लिखकर अपना पुराना 1.10 लाख रुपये प्रति माह का वेतन ही लेने की इच्छा जाहिर की. यही नहीं उन्होंने जनवरी 2016 से वेतन बढ़ोतरी लागू होने के कारण फरवरी 2018 तक 25 महीने में बना उनका 62.5 लाख रुपये का वेतन एरियर भी लेने से इनकार कर दिया. 

 

उनके कार्यालय की तरफ से बुधवार को जारी की गई एक रिलीज में ये जानकारी दी गई. बताया गया कि टंडन बढ़ोतरी के बाद 3.5 लाख रुपये प्रति माह हो गया वेतन लेने के बजाय अब भी अपना 1.10 लाख रुपये महीना का पुराना वेतन ही ले रहे हैं.

बता दें कि मोदी सरकार आने के बाद जुलाई 2014 में टंडन छत्तीसगढ़ के गवर्नर बनाए गए थे. वह साल 1953 में पहली बार अमृतसर म्यूनसिपल कॉरपोरेशन के कॉरपोरेटर बने थे. इसके अलावा वह अमृतसर से चार बार पंजाब विधानसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं.

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टंडन पंजाब सरकार में उद्योग, स्वास्थ्य, श्रम और रोजगार मंत्री भी रह चुके हैं. साल 1974 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद बाद पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों को आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने वालों में उनकी भूमिका काफी अहम रही है.

First published: 7 June 2018, 11:21 IST
 
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