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छत्तीसगढ़ पुलिस ने 16 आदिवासी महिलाओं के साथ हिंसा और रेप किया: एनएचआरसी

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 January 2017, 7:34 IST

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छतीसगढ़ पुलिस को अक्टूबर 2015 में 16 महिलाओं के साथ बलात्कार और मारपीट करने का आरोपी पाया है. आयोग ने छतीसगढ़ सरकार को एक नोटिस जारी किया है. उसका सवाल है कि पीड़िताओं को अंतरिम राहत के तौर पर 37 लाख रुपए देने की सिफारिश अब तक क्यों नहीं की गई. 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 16 औरतों को छतीसगढ़ पुलिस द्वारा प्रथम दृष्टया बलात्कार, यौन उत्पीड़न और मारपीट का शिकार पाया है. हालांकि उन्हें अभी 20 अन्य पीड़िताओं के बयान रिकॉर्ड करने हैं. आयोग ने मुख्य सचिव की ओर से छतीसगढ़ सरकार को एक नोटिस भेजा है, यह बताने के लिए कि उन्हें 37 लाख रुपए अंतरिम आर्थिक राहत के तौर पर देने की सिफारिश क्यों नहीं की गई. 

इसमें सभी 8 बलात्कार पीड़िताओं को 3-3 लाख रुपए, सभी 6 यौन उत्पीड़न की शिकार औरतों को 2-2 लाख रुपए, और मारपीट की दो पीडि़ताओं को 50-50 हजार रुपए देना शामिल है. आयोग का प्रथम दृष्टया मत है कि सुरक्षा कर्मचारियों ने पीड़िताओं के मानवाधिकारों का हनन किया है. इसके लिए छतीसगढ़ सरकार अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार है. 

19 के बयान अभी रिकॉर्ड होना बाकी

आयोग ने यह भी पाया कि एफआईआर में छतीसगढ़ सरकार के सुरक्षा कर्मचारियों के खिलाफ बलात्कार, यौन उत्पीड़न और मारपीट के गंभीर आरोप दर्ज हैं. जांच के दौरान इन आरोपों को एनएचआरसी टीम के सामने बार-बार दुहराया गया.

एनएचआरसी टीम, एफआईआर में दर्ज 34 में से केवल 14 पीड़िताओं के बयान रिकार्ड कर सकी. इस तरह 20 पीडि़ताओं के बयान रिकॉर्ड होने अभी बाकी हैं.

केवल 15 पीडि़ताओं के बयान मजिस्ट्रेट ने रिकार्ड किए हैं जबकि 19 के बयान और रिकॉर्ड होने हैं. तीन एफआईआर में दर्ज इन घटनाओं की लगभग सभी पीड़िताएं जनजातियों से आती हैं. हालांकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की सहायता इनमें से किसी भी मामले में नहीं ली गई है. नतीजतन पीड़िताओं को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत देय मौद्रिक राहत का भुगतान नहीं किया गया. 

इसलिए एनएचआरसी ने डीआईजी (जांच) प्रतिनियुक्त अधिकारियों को सौंपी है. ये उन 15 पीडि़ताओं के बयान रिकॉर्ड करेंगे, जिनका बयान एनएचआरसी या मजिस्ट्रेट ने रिकार्ड नहीं किया है. एक महीने के भीतर इन रिकॉर्डेड बयानों को आयोग को सुपुर्द कर दिया जाएगा. वहीं छतीसगढ़ के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि जितना जल्दी हो सके उन्हें आर्थिक मदद देना सुनिश्चित करें.

कल्लूरी की बढ़ती मुश्किलें

एनएचआरसी ने कहा कि उसने 2 नवंबर 2015 को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के आधार पर स्वत: कार्यवाही शुरू की थी. खबर थी कि बीजापुर जिले के पांच गांव- पेगडापाली, चिन्नागेलूर, पेड्डागेलूर, गुंदम और बुर्गीचेरू की औरतों ने छतीसगढ़ पुलिस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनमें से 40 का यौन उत्पीडऩ और मारपीट की और कम से कम दो जनों का गैंग रेप किया. 

यह भी रिपोर्ट थी कि इन गांवों से गुजरते हुए पुलिस वालों ने ग्रामीणों के घरों में चोरी किया और उसे तहस-नहस कर दिया. एनएचआरसी की जांच के नतीजों से छतीसगढ़ के शीर्ष पुलिस अधिकारी एसआरपी कलूरी मुश्किल में पड़ सकते हैं. उन्हें पहले ही जनजातीय लोगों पर पुलिस के अत्याचार के कारण कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

First published: 9 January 2017, 7:34 IST
 
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