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अब शिवराम कल्लूरी का क्या होगा?

राजकुमार सोनी | Updated on: 26 October 2016, 8:04 IST
(पत्रिका )
QUICK PILL
  • सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का पुतला फूंके जाने के बाद कांग्रेस ने निंदा प्रस्ताव पास करते हुए आईजी शिवराम कल्लूरी पर हमला बोला है. 
  • वहीं आदिवासी नेता सोनी सोरी समेत कइयों ने कहा है कि विरोध की इन आवाज़ों से तिलमिलाए कल्लूरी अब हत्याएं करवा सकते हैं. 

सीबीआई की रिपोर्ट में पुलिसिया दमन की कहानी सामने आने के बाद आईजी शिवराम कल्लूरी पर दबाव बढ़ता जा रहा है. मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस ने एक बैठककर 2011 के ताड़मेटला समेत तीन गांवों में हुई आगजनी, हत्या और बलात्कार में पुलिस की भूमिका उजागर की. 

कांग्रेस ने कहा कि माओवादी उन्मूलन के नाम पर कल्लूरी केवल बेबस और भोले-भाले आदिवासियों को निशाना बना रहे हैं. उनके हाथ मासूमों के खून से रंगे हुए हैं. सरकार ने उन्हें ग़रीब और बेगुनाह आदिवासियों की हत्या का लाइसेंस दे रखा है. कांग्रेस ने इस बैठक में कल्लूरी के ख़िलाफ निंदा प्रस्ताव भी पास किया. बस्तर में अमूमन ऐसा नज़ारा कम ही देखने को मिलता है. 

कांग्रेस ने कहा कि बस्तर में हालात इस कदर ख़राब हैं कि कोई भी फर्जी सरेंडर या एनकाउंटर पर सवाल करता है तो फौरन कल्लूरी के राडार पर आ जाता है. देर-सबेर उसकी हत्या भी कर दी जाती है. इस बैठक में कांग्रेस विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस झीरम जैसी सुनियोजित तरीके से की गई माओवादी घटना में अपने साथियों को खो चुकी है. 

कोई बड़ी बात नहीं कि आने वाले किन्हीं दिनों में अन्य जनप्रतिनिधियों की लाशें भी इधर-उधर जंगलों में मिलें और यह कहा जाए कि हमें माओवादियों ने मार डाला है. मरकाम ने आरोप लगाया कि कल्लूरी ने आरएसएस और सरकार से विपक्ष खत्म करने की सुपारी ले रखी हैं. 

सरकार की खामोशी समझ से परे

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि ताड़मेटला कांड में पुलिस की भूमिका उजागर होने के बावजूद सरकार कल्लूरी पर मेहरबान है. उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी जवानों के मनोबल को तोड़ने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि कल्लूरी के हुक्म पर जवान गलत काम को अंजाम दे रहे हैं. कमज़ोर आदिवासियों के घरों में आग लगाना, बलात्कार करना और स्कूली बच्चों तक की हत्या कर देने को माओवादी उन्मूलन नहीं कहा जाए. 

बघेल ने कहा कि बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर रहे महेंद्र कर्मा ताजिंदगी माओवादियों से लोहा लेते रहे, लेकिन जब उनकी पत्नी देवती कर्मा जो दंतेवाड़ा से विधायक भी हैं, ने स्कूली बच्चों पर गोली चलाने के विरोध किया तो कल्लूरी ने उन्हें भी अपहरण के मामले में फंसा दिया. चाहे सामाजिक कार्यकर्ता हों, वकील या पत्रकार, कल्लूरी ही तय करते हैं कि कौन राष्ट्रभक्त है और कौन देशद्रोही?

आदिवासियों का ख़ात्मा

बस्तर के भानुप्रतापपुर से आदिवासी विधायक मनोज मंडावी ने कल्लूरी के कामकाज की शैली को राजनीति से प्रेरित बताया. उन्होंने कहा कि इससे बेहतर होता कि कल्लूरी वर्दी उतारकर चुनाव लड़ लें. पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे ने भी कल्लूरी को मुख्यमंत्री का टूल कहा. चौबे का दावा है कि पुलिस ने महिला विधायक देवती कर्मा को माओवादी हमले में फंसा देने की धमकी दी है.

मेरी हत्या हो सकती है-सोनी सोरी

पुतला दहन की घटना के बाद आदिवासी नेता सोनी सोरी ने भी अपनी हत्या की आशंका जताई है. सोरी ने कहा कि उनके ऊपर केमिकल अटैक शिवराम कल्लूरी ने ही करवाया था. अब जब उनका पुतला दहन हो गया है तो साफ है कि पुलिस के इरादे क्या हैं? सोरी ने कहा कि पुलिस किसी भी दिन उनकी हत्या करवा सकती है.

हत्या के बाद यह कहा जा सकता है कि जनता उन सबको मार रही है जो माओवादियों का साथ दे रहे हैं. सोरी ने कहा कि उन्होंने कभी माओवादियों का साथ नहीं दिया बल्कि हकीकत यह है कि आईजी कल्लूरी की मिली-भगत माओवादियों से है. इसी मिली-भगत का नतीजा है कि बस्तर में माओवादी ग्रुप के किसी बड़े लीडर ने सरेंडर नहीं किया और न ही पुलिस ने उसे अपना निशाना बनाया. पुलिस अपना नंबर बढ़ाने के लिए सिर्फ़ ग्रामीणों की हत्या करती है. 

सौंपा जाएगा सुप्रीम कोर्ट को वीडियो

पुलिस ने जिन सामाजिक कार्यकर्ताओं को माओवादी समर्थक बताते हुए सोमवार को पुतला दहन किया था, उनमें हिमांशु कुमार भी शामिल थे. कैच न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि बस्तर के जिन सात जिलों में पुलिस के जवानों ने पुतले फूंके हैं, उनके फुटेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपे जाएंगे क्योंकि पुलिस ने सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना की है. 

कुमार ने कहा कि कल्लूरी और उनके जवान मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को माओवादी समर्थक बताकर पुलिस और आवाम को भड़का रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस द्वारा तीन गांवों में की गई आगजनी, बलात्कार और हत्या की सूचना सुप्रीम कोर्ट को दी थी. 

उन्होंने कहा कि सीबीआई की जांच से बौखलाकर ही कल्लूरी ने अपनी गुंडा वाहिनी को सक्रिय किया और सीबीआई पर भी हमले करवाए. कल्लूरी एक पुलिस अधिकारी नहीं बल्कि एक हत्यारे के तौर पर काम रहे हैं. उन्हें इसका खामियाजा देर-सबेर तो भुगतना ही होगा.

First published: 26 October 2016, 8:04 IST
 
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