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नोटबंदी: रायपुर में किसानों ने 100 टन सब्ज़ियां मुफ़्त बांटी

शिरीष खरे | Updated on: 3 January 2017, 7:53 IST
(पत्रिका)

नोटबंदी से तंग किसानों ने मेहनत से उगाई सब्ज़ियों को सूबे की राजधानी रायपुर में मुफ़्त में बांट दिया. बूढ़ातालाब धरनास्थल पहुंचे नाराज़ किसानों ने टमाटर, शिमला मिर्च, बैगन, केला, हरी मिर्च जैसी 100 टन सब्ज़ियां मुफ़्त में बांट दीं. सब्ज़ियां लेने के लिए सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक बूढ़ातालाब के पास लोगों की क़तार लगी रहीं. 

नाराज़ किसानों ने कहा कि नोटबंदी का उनकी ज़िंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ा है. उन्हें उत्पादन का बाज़ार मूल्य नहीं मिल रहा है. प्रॉसेसिंग यूनिट और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं सरकार उपलब्ध नहीं करा पाई है. किसानों ने 'जय जवान, जय किसान' का नारा बुलंद करते हुए केंद्र की मोदी सरकार को सरकार को जमकर कोसा.

छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ के बैनर तले रायपुर के आसपास जिलों के किसान 30 से 35 गाड़ियों में सब्जियां भरकर सुबह 11 बजे से पहुंचने बूढ़ातालाब पहुंचने लगे थे जिसमें सबसे ज्यादा दुर्ग, राजनांदगांव, महासमुंद और रायपुर जिले के किसान शामिल हुए. मुफ्त में सब्जी लेने के लिए हर वर्ग के महिला और पुरुष बोरियां लेकर क़तार में लग गए थे. 

विरोध में बांटी सब्ज़ियां

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संघ के नेता राजकुमार गुप्ता ने कहा कि यह प्रदेश के किसानों का विरोध है. मौजूदा केंद्र सरकार को थोड़ी शर्म आनी चाहिए. इस साल अनुकूल मौसम के कारण न केवल अनाज की फसलों बल्कि सब्जियों का भी अच्छा उत्पादन हुआ था. लेकिन, नोटबंदी के कारण किसानों को तगड़ा झटका लगा है. यही वजह है कि छत्तीसगढ़ जैसे धान और सब्जी उत्पादक राज्य में किसान हताश और निराश हैं. 

दुर्ग जिले के सब्ज़ी उत्पादक कमलकांत सिन्हा ने बताया कि बीते 50 दिनों से किसान सब्जी तोडऩे वाले मजदूरों का खर्च तक नहीं उठा पा रहा है. इसके अलावा सब्जियों को तोड़कर जब वह मंडी में वाहनों से अपनी मेहनत की कमाई लाता है तो उसे डीजल का दाम भी नहीं मिल पाता है. इसलिए हम हर व्यक्ति को 5 किलो तक सब्जियां बांटकर अपनी पीड़ा बयान कर रहे हैं.

महासमुंद के किसान हितेश वरू ने बताया कि हमारे सब्जी और फल उत्पादकों को पिछली जुलाई महीने से ही उपनी पैदावार का सही दाम नहीं मिल रहा है. इससे हमारी आर्थिक हालत बहुत खराब हो चुकी है. अगली फसल बोने के लिए भी पैस नहीं है. आम जनता भी महंगी सब्जियां और फल खरीदने को मजबूर हुए हैं.

इससे पहले भी मंडी में सब्जी के भाव नहीं मिलने पर किसान अपना गुस्सा उतार चुके हैं और सब्जियों को सड़कों पर फेंक दिया था. बीते दिसंबर माह में छत्तीसगढ़ के जशपुर और धमतरी जिले में सब्जी की उपज का भाव नहीं मिलने से सैकड़ों किसानों ने सड़कों पर टमाटर बिखेर दिया था.

किसानों की मांगें

1-जुलाई, 2017 तक कृषि पंप के बिजली बिल माफ किए जाएं.

2-जुलाई, 2017तक विभिन्न बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों का एक साल का ब्याज माफ किया जाए.

3-बैंक कर्ज की किश्त को आगे बढ़ाई जाए

4-धान की तर्ज पर सब्जीऔर फलों के उचित दाम के लिए व्यवस्था बनाई जाए

5-खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित हो

First published: 3 January 2017, 7:53 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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