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नोटबंदी का नतीजा: 2 किमी लंबी टमाटर की सड़क

शिरीष खरे | Updated on: 9 December 2016, 7:57 IST
(पत्रिका)
QUICK PILL
  • कर्नाटक और तमिलनाडु के बाद टमाटर की सबसे अच्छी पैदावार के लिए मशहूर जशपुर ज़िले में किसानों के बीच हाहाकार मचा हुआ है. 
  • नोटबंदी से पैदा हुई समस्या के नाते यहां किसानों ने पत्थलगांव के इंदिरा चौक से लेकर आगे दो किलोमीटर तक सड़कों पर टमाटर बिखेरकर ट्रैक्टर चला दिया. 

छत्तीसगढ़ में जशपुर के टमाटर की बंपर पैदावार बाज़ार में कौड़ियों के दाम मिलने से औंधे मुंह आ गई है. नोटबंदी के बाद किसानों का टमाटर 50 पैसे प्रति किलो बिक रहा है. हालात यह है कि 50 रुपये का 100 किलो टमाटर का भी कोई ग्राहक नहीं. अपनी मेहनत पर पानी फिरने से आहत किसानों ने बुधवार को पत्थलगांव के इंदिरा चौक पर हजारों क्विंटल टमाटर सड़क पर उड़ेलकर ट्रैक्टर चला दिया. 

छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला और यहां के पत्थलगांव और फरसाबहार इलाक़े देश भर में टमाटर की खेती और बंपर पैदावार के लिए दूर-दूर तक मशहूर है. कर्नाटक और तमिलनाडु के बाद इसी इलाक़े में टमाटर की ऐसी खेती होती है. मगर यह ज़िला इन दिनों औसत से अधिक मानसून की बारिश और अच्छी पैदावार के बाद भी सदमें में डूबा हुआ है. 

वजह नोटबंदी है जिसके कारण टमाटर की खेती से जुड़े किसानों को टमाटर की पैदावार की अच्छी कीमत मिलना तो दूर, इस फसल से पिछले कुछ सीजन में हुई कमाई के भी हाथ से निकल जाने का डर दिख रहा है. कर्नाटक और तमिलनाडु के बाद इस इलाक़े में टमाटर की सबसे अच्छी पैदावार होती है. 

टमाटर हब

यहां 4,000 से ज्यादा टमाटर उत्पादकों ने इस साल लगभग 4,120 हेक्टेयर ज़मीन पर फसल लगाई है. टमाटर खरीदी-बिक्री का पूरा कारोबार नकदी पर चलता है और बाजार में नकदी की कमी से टमाटर के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं. कैश की कमी से अब इन किसानों का सब्र जवाब दे रहा है. तभी इन्होंने गुस्से में सड़कों पर अपने टमाटर बिखेरकर विरोध किया है. हालत यह है कि जिले के पत्थलगांव, लुड़ेग, जशपुर और इसके आसपास टमाटर का थोक भाव 50 पैसे तक आ गया है.

जशपुर जिले में पण्डरीपानी गांव के टमाटर उत्पादक शुधाराम भगत का कहना है कि पुराने नोट से कारोबार चलाने की कोशिश की जा रही है. टमाटर मंडी में 500-1000 रुपए के पुराने नोट दिए जा रहे हैं और इन नोटों को बैंक में जमा करके बदलवाने में संघर्ष करना पड़ रहा है. 

वहीं बागबहार गांव के टमाटर उत्पादक अनसाय भगत कहते हैं कि हमारी मेहनत का सही दाम भी नहीं दिया जा रहा है. टमाटर की अच्छी खेती होने के बावजूद हमारे हाथ खाली के खाली हैं. हमारे इलाके में तो नोटों का जैसे अकाल ही पड़ गया है. फसल को मंडी लाने के बाद माल को लाने की ढुलाई भी नही निकल पा रही है.

फरसाबहार गांव के किसान लालसाय कहते हैं कि जिस तरह किसानों से शासन धान और मक्का की खरीदी करता है, ठीक उसी तरह टमाटर की खरीदी के लिए भी योजना बनाए. हमारे टमाटर खराब हो चुके हैं, जल्दी नहीं सोचा तो इस बार भूखे मरने की नौबत आ जाएगी.

टैक्स नहीं लेने के निर्देश

ज़िले की कलेक्टर प्रियंका शुक्ला बताती हैं, इस साल टमाटर का उत्पादन ज्यादा होने के कारण स्थानीय बाजार में कीमत और मांग कम हुई है. स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे फिलहाल टमाटर किसानों से स्थानीय कर और शुल्क न लें. 

जशपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल का कहना है कि केंद्र की नोटबंदी की घोषणा के चलते यहां का टमाटर उत्पादक यह नहीं समझ पा रहा है कि वे पूरा साल अपना घर कैसे चलाएगा? उन्होंने कहा कि हमने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर छत्तीसगढ़ में धान की तरह टमाटर का समर्थन मूल्य घोषित करने और राज्य द्वारा टमाटर खरीदने की मांग की है.

किसान नेता राजकुमार गुप्ता का कहना है कि प्रदेश का यह इलाका मानव तस्करी का दंश झेल रहा है और गरीबी और बेकारी से थोड़ा राहत देने के लिए जशपुर के आदिवासियों ने टमाटर से काफी उम्मीद लगा रखी थी. मगर पेट्रोल पर 100 रुपए खर्च करने के बाद भी अगर किसान मंडियों तक पहुंचे और माल ही न बिके तो उनका गुस्सा समझा जा सकता है. 

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण टमाटर के भाव लुढ़क कर 50 पैसे प्रति किलोग्राम तक आ पहुंचा है. अपनी मेहनत का खर्च नहीं निकल पाने पर आदिवासियों ने पत्थलगांव में सड़क पर टमाटर फेंककर विरोध प्रदर्शन किया. 13 साल पूरे होने के जश्न में डूबी छत्तीसगढ़ सरकार के पास आदिवासियों की इस दुर्दशा को लेकर कोई जवाब नहीं है.

जशपुर में अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों और उपजाऊ मिट्टी के कारण पूरे प्रदेश में इस क्षेत्र को 'टमाटर हब' के नाम से जाना जाता है. मगर नोटबंदी की मार की वजह से कुछ किसानों ने यह भी बताया कि मजबूरी में वे अपने खून-पसीने की कमाई को मवेशियों को खिलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं. मगर इससे भी विकट स्थिति यह है कि इस समस्या से छुटकारे के लिए सरकार सुध नहीं ले रही है.

ज़िले में टमाटर की पैदावार

जशपुर के विकासखंड        किसानों की संख्या                    क्षेत्रफल

1. जशपुरनगर             68                             22 हेक्टेयर

2. पत्थलगांव             998                           3172 हेक्टेयर

3. मनोरा              250                             51 हेक्टेयर

4. बगीचा            865                             81 हेक्टेयर

5. कुनकुरी           95                              33 हेक्टेयर

6. कांसाबेल              295                             63 हेक्टेयर

7. फरसाबहार             70                             25 हेक्टेयर

First published: 9 December 2016, 7:57 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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