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छत्तीसगढ़: विधानसभा में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति पर पक्ष-विपक्ष में मारामारी

शिरीष खरे | Updated on: 15 November 2016, 7:24 IST
QUICK PILL
  • संघ विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति छत्तीसगढ़ विधानसभा में स्थापित करने पर राज्य की राजनीति गरमा गई है. 
  • कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा से यह भी पूछा है कि मुखर्जी उनकी पार्टी के लिए महापुरुष हो सकते हैं, लेकिन वे सर्वमान्य महापुरुष नहीं हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ के लिए ऐसा कुछ नहीं किया है जिसके कारण उनकी मूर्ति लगाई जाए. 

छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य सरकार ने डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मूर्ति स्थापित करने का फैसला किया है. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेताओं जब इस पर सवाल किया तो मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भड़क गए. उन्हें इस हद तक गुस्सा आ गया कि उन्होंने कांग्रेसियों को अज्ञानी तक कह दिया. 

उन्होंने कहा कि जिन्हें मुखर्जी के बारे में पता नहीं, उनसे किसी तरह की कोई बात करना बेमानी है. वहीं सिंह के बयान पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव ने कहा, 'मैं फिर दोहरा रहा हूं कि मुखर्जी कोई महापुरुष नहीं थे जो उनकी छत्तीसगढ़ की विधानसभा में प्रतिमा लगाई जाए.'

रमन सिंह ने कहा कि राष्ट्रहित में किए गए मुखर्जी के कामों की पुस्तकें अब विपक्ष को भेजी जाएंगी ताकि उनका ज्ञानवर्धन हो सके. उन्होंने कहा कि श्यामाप्रसाद मुखर्जी वह प्रतिभा हैं जिन्हें विपक्ष का सांसद होने के बावजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली केंद्र सरकार में उद्योग व वाणिज्य जैसा अहम विभाग दिया गया था. हालांकि सरकार से मुद्दों पर असहमति होने के कारण वह खुद इस्तीफा देकर अलग हो गए थे.

जवाब में टीएस सिंहदेव ने कहा है कि मुखर्जी जनसंघ के नेता के तौर पर ही जाने जाते हैं. अगर इस तरह पार्टी के नेताओं की मूर्तियां लगाई जाने लगीं तो कहीं जगह नहीं बचेगी. भाजपा पर यह भी आरोप है कि वह स्वामी विवेकानंद की आड़ में विधानसभा का भगवाकरण करने का प्रयास कर रही है. कांग्रेस इस प्रकरण को शीतकालीन सत्र में उठाएगी. 

टेंडर जारी, बस स्थापना बाक़ी

वहीं विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने कैच से कहा, 'छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में मुखर्जी और विवेकानंद की प्रतिमा स्थापना के लिए विधानसभा सचिवालय की ओर से टेंडर जारी कर दिया गया है. इसमें प्रतिमा निर्माण करने वाले शिल्पकारों को निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 29 नवंबर, 2016 दोपहर 3 बजे तक रखी गई है. टेंडर के मुताबिक परिसर में विवेकानंद की प्रतिमा 14 फीट की होगी जबकि मुखर्जी की प्रतिमा 2 से 3 फीट की होगी.

दीन दयाल उपाध्याय पहले से स्थापित

इसके पहले राज्य की भाजपा सरकार ने नया रायपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित कर चुकी है. कांग्रेस का कहना है कि उपाध्याय और मुखर्जी की तुलना स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी से नहीं की जा सकती. दोनों नेताओं की गरिमा महापुरूष के अनुरूप नहीं है. नेता प्रतिपक्ष सिंहदेव ने कहा कि विधानसभा परिसर सरकार की जागीर नहीं है. यहां तक कि सरकार ने प्रतिमा लगाने के लिए विपक्षी पार्टी से पूछना तक जरूरी नहीं समझा, इसलिए सदन से सड़क तक विरोध तो होगा ही.

वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कैच से बातचीत में कहा है कि मुखर्जी देश की पहली सरकार में कुछ समय के लिए मंत्री थे, इससे ज्यादा उनका न कोई खास परिचय है और न ही देश के लिए कोई योगदान है. उन्होंने कहा कि संघ विचारक नेताओं की प्रतिमाओं का विरोध न हो, इसके लिए विवेकानंद का सहारा लिया जा रहा है.

First published: 15 November 2016, 7:24 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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