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अपने गुर्गे के मोबाइल से फ़ोन कर बस्तर एसपी ने वकील शालिनी गेरा को धमकाया, NHRC से शिक़ायत

राजकुमार सोनी | Updated on: 29 December 2016, 17:04 IST
(कैच न्यूज़)

बिलासपुर उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहीं वकील शालिनी गेरा को बस्तर के एसपी आरएन दास ने अपने मोबाइल की बजाय एक संदिग्ध के नंबर से फोन करके धमकाया है. दास ने शालिनी को माओवादियों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाते हुए थाने बुलाया. शालिनी और उनके साथियों ने जब नंबर की पड़ताल की तो वह अग्नि संस्था के एक सदस्य फारूख़ अली का निकला. शालिनी गेरा और उनकी टीम ने बस्तर आईजी शिवराम कल्लूरी,पुलिस अधीक्षक आर एन दास, सब इंस्पेक्टर अर्चना धुरन्धर, एसआई रंजक और फारूख अली के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजी है. 

गेरा ने कैच न्यूज को बताया कि इसी महीने 25 और 26 दिसम्बर को जब वह अपने साथी अधिवक्ताओं के साथ बस्तर में थीं, तब पुलिस अधीक्षक दास ने उन्हें माओवादियों से कनेक्शन रखने का आरोप लगाते हुए थाने बुलाया था. जब उन्होंने इसकी पड़ताल की और पुलिस अधीक्षक दास से फोन करने की वजह जाननी चाही तो उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा, 'मैं किसी शालिनी गेरा को नहीं जानता.' हालांकि बाद में उन्होंने यह स्वीकारा कि फोन उन्होंने ही किया था. 

क्यों तिलमिलाए हैं अफ़सर?

मानवाधिकार आयोग को रिकॉर्ड किए गए फोन व अन्य दस्तावेजों के साथ भेजी गई शिकायत में वकीलों ने पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्यौरा भेजा है. शिकायत में कहा गया है कि सुरक्षाबल के जवानों ने इसी महीने 16 दिसम्बर को बीजापुर जिले के थाना गंगालूर गांव के मेटापाल में 13 साल के बच्चे सोमारू पोटाम को माओवादी बताकर मार दिया था. 

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल से बच्चे के अभिभावकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसके बाद न्यायालय ने शव के दोबारा पोस्टमार्टम करने के निर्देश दिए थे. बस्तर पहुंचने के बाद अधिवक्ताओं को जब कहीं ठहरने की जगह नहीं मिली तो उन्होंने कमिश्नर दिलीप वासनीकर को फोन पर जानकारी दी. 

कमिश्नर ने बच्चे के परिजन और अधिवक्ताओं के लिए गोयल धर्मशाला में ठहरने का इंतजाम किया, लेकिन उनके निर्देश के बाद भी भारी पुलिस बल ने गोयल धर्मशाला को घेर लिया. वहां उनसे सब इंस्पेक्टर अर्चना धुरन्धर ने अभद्र व्यवहार किया. अर्चना धुरन्धर की पूरी बातचीत का वीडियो और आडियो भी अधिवक्ताओं ने आयोग को भेजा है. 

इस घटनाक्रम के बाद एसपी ने किसी फारूख अली के फोन से शालिनी गेरा को फोन पर धमकाते हुए बताया कि उनके खिलाफ शिकायत हुई है कि वे माओवादियों का पैसा बदलवाने के लिए बस्तर आई हुई हैं. अधिवक्ता प्रियंका ने बताया कि इससे पहले भी जब अधिवक्ता बस्तर के दौरे पर थे, तब फारूख अली ने उन्हें जेएनयू का माओवादी बताते हुए सोशल मीडिया में पोस्ट डाली थी. 

प्रियंका ने बताया कि इसकी जानकारी भी दस्तावेजों के साथ आयोग को भेजी गई है. मामले में फारूख अली का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन लगाया गया,  उन्होंने फोन नहीं उठाया. पुलिस अधीक्षक आरएन दास ने कहा कि वे किसी भी पत्रकार को फोन पर अपना पक्ष नहीं देते. फिलहाल वे अपना पक्ष नहीं देंगे. 

First published: 29 December 2016, 17:04 IST
 
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