Home » छत्तीसगढ़ » NHRC is active on rape while state commissions are like mute spectators
 

छत्तीसगढ़: रेप पर NHRC सख़्त, राज्य मानवाधिकार और महिला आयोग पस्त

राजकुमार सोनी | Updated on: 14 January 2017, 8:03 IST
(फ़ाइल फोटो )

बस्तर में आदिवासी महिलाओं से बलात्कार के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर चुका है लेकिन राज्य मानवाधिकार और महिला आयोग ने ख़तरनाक तरीक़े से पूरे मामले पर ख़ामोशी ओढ़ रखी है. चूंकि आयोग के अहम पदों पर नियुक्तियां राजनीतिक होती हैं, इसलिए उपकृत होने वाले किसी भी कार्रवाई से पहले सरकार की सुविधा-असुविधा का ध्यान ज़रूर रखते हैं. छत्तीसगढ़ में यह परंपरा आम है. 

नहीं लिया स्वत: संज्ञान

बस्तर के बीजापुर- सुकमा जिले में 16 आदिवासी महिलाओं से रेप की वारदात पता चलने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को परोक्ष रुप से जिम्मेदार ठहराते हुए नोटिस जारी किया है. सामान्य तौर पर आयोग किसी मामले में तब ही कार्रवाई की अनुशंसा करता है जब कोई पीडि़त तथ्यों के साथ शिकायत करता है लेकिन आयोग के पास स्वत: संज्ञान का भी अधिकार होता है. बावजूद इसके राज्य सरकार के आयोगों ने आदिवासी महिलाओं से रेप के मामले में संज्ञान नहीं लिया. 

आदिवासी महिलाओं से रेप अक्टूबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच किया गया. इस दौरान देशभर के मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ तथ्यपरक पड़ताल करने वाली टीमें बस्तर का दौरा करती रहीं. यहां तक केंद्रीय जनजाति आयोग ने भी बस्तर में पीडि़तों से मुलाकात के बाद माना था कि आदिवासी महिलाओं के साथ ज्यादती हुई है, लेकिन प्रदेश के मानवाधिकार और महिला आयोग की कान पर जूं तक नहीं रेंगी. 

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम का आरोप है कि शोषित-पीड़ित महिलाओं के दर्द से वास्ता नहीं रखने वाले सभी आयोगों को बंद कर देना चाहिए. पीयूसीएल की प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष लाखन सिंह का आरोप है कि बस्तर की तरह ही मानवाधिकार और महिला आयोग में आपातकाल लागू है इसलिए यह उम्मीद बेमानी है कि आयोग निष्पक्ष ढंग से अपना काम करेंगे.

अधिकतर मामलों की फाइल बंद

1 जनवरी 2015 से 12 जनवरी 2017 तक राज्य मानवाधिकार आयोग के पास बस्तर, बीजापुर और दंतेवाड़ा से मानवाधिकार हनन के कुल 124 मामले आए थे, लेकिन दो-चार मामलों को छोड़कर अधिकांश की फाइल बंद कर दी गई हैं. बस्तर के पत्रकार संतोष यादव और सोमारू नाग को गिरफ्तार करने के संबंध में जर्मनी के मानवाधिकार सदस्य डॉ. बारबेल कोल्फर की शिकायत पर जांच चल रही है, लेकिन कूकानार थाने के प्रभारी के द्वारा ग्रामीणों के साथ मारपीट एवं दुर्व्यवहार के मामले में लीगल एड की अधिवक्ता ईशा खंडेलवाल की शिकायत की फाइल बंद कर दी गई है. 

आदिवासी नेत्री सोनी सोरी को जिंदा जलाने की धमकी के संबंध में हयूमन राइट अलर्ट के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हेनरी तिपहागने ने शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन इस शिकायत पर जांच भी बंद कर दी गई है. 

रेप की शिकायत पर भी जांच नहीं

बासागुड़ा थाने के ग्राम चिनागेलूर, पेदागेलूर में महिलाओं के साथ दुष्कर्म किए जाने के मामले में सर्व आदिवासी समाज बस्तर के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने राज्य मानवाधिकार को शिकायत भेजी थी लेकिन आयोग ने 5 दिसम्बर 2015 को फाइल बंद कर दी. महिलाओं से दुष्कर्म की शिकायत पर जांच क्यों आवश्यक नहीं समझी गई इस बारे में शिकायतकर्ता को जानकारी भी नहीं दी गई. 

पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम की बेदखली के मामले में हेनरी तिपहागने की शिकायत की जांच भी बंद कर दी गई है. मालिनी का कहना है कि शिकायत के बाद उन्हें आयोग की तरफ से एक बार भी बयान देने के लिए नहीं बुलाया गया.

राज्य मानवाधिकार आयोग के संयुक्त सचिव दिलीप भट्ट का कहना है कि बेशक बहुत से मामलों की जांच बंद कर दी गई है, लेकिन उसके बहुत से दूसरे कारण है. वैसे प्राकृतिक सिद्धांत यही कहता है कि किसी एक व्यक्ति को एक गलती की सजा दो बार नहीं दी जा सकती है. जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दुष्कर्म मामले की पड़ताल कर ही रहा है तो फिर राज्य आयोग हस्तक्षेप क्यों करें.

वहीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हर्षिता पांडेय का कहना है कि बस्तर के एक मामले का महिला आयोग ने संज्ञान लिया था, लेकिन 40 महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में आयोग ने ऐसा नहीं किया. 

First published: 14 January 2017, 8:03 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी