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बस्तर की राह पर गढ़चिरौली, आदिवासी लड़कियों के साथ सुरक्षाबलों ने किया बलात्कार

अश्विन अघोर | Updated on: 31 January 2017, 8:25 IST

यह कुछ हिन्दी फिल्मों जैसा ही था. नागपुर में एक वकील के कार्यालय में लोगों का एक गुट, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे पुलिस वाले थे, आ धमका और कम से कम चार लोगों को जबरन उठा ले गया. ये लोग महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में छत्तीसगढ़ की दो आदिवासी लड़कियों के साथ दुष्कर्म मामले में कानूनी विचार-विमर्श के लिए आए थे.

यह ड्रामा एक वकील निहाल सिंह राठौड़ के कार्यालय में शुक्रवार शाम को हुआ. वकील के अनुसार गिरफ्तार महिलाएं और पुरुष उनके कार्यालय में गढ़चिरौली जिले के गुट्टा गांव से आए थे. इन लोगों का मकसद उनके गांव की दो आदिवासी लड़कियों के साथ हुई बलात्कार की घटना पर कानूनी सलाह नेता था. बलात्कार कथित तौर पर पुलिस के जवानों ने किया था. यह घटना 20 जनवरी की है. 

सवाल करने वालों को जेल

घटना के बाद से ही दोनों आदिवासी लड़कियां गायब हैं. 25 जनवरी को उनके भाई ने बम्बई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में याचिका दाखिल करने के लिए सम्पर्क किया था. याचिका उसी दिन दाखिल हो गई थी, पर सुनवाई अभी तक नहीं हो सकी है.

इस कथित बलात्कार मामले में विवाद बढ़ता जा रहा है. आरोप है कि पुलिस ने घटना का विरोध करने वाले दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को झूठे मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

वकील राठौड़ कहते हैं कि दिन भर सुनवाई होने के इंतजार के बाद वे वापस गए और पीड़ित भी अपने घर लौट गए. राठौड़ आगे कहते हैं कि पीड़ित केवल मांडिया भाषा ही बोल सकते थे, इसलिए पीडि़तों के साथ 27 जनवरी को गुट्टा गांव की पूर्व सरपंच शीला गोटा और उनके पति सैनू गोटा, महाराष्ट्र के ट्राइबल डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन के पूर्व निदेशक अपने दो दुभाषियों जयाश्री वेल्दा और सुशीला नरोटे के साथ आए. 

पीड़ित उनसे और उनके सहयोगियों से कानूनी विचार-विमर्श कर रहे थे जबकि सैनू गुप्ता बाहर खड़े इंतजार कर रहे थे. वकील निहाल आगे कहते हैं कि इस बीच गढ़चिरौली पुलिस को लोगों ने सैनू गोटा को उठा लिया. सैनू की पत्नी शीला मदद के लिए चिल्लाई. वह कुछ कर पाती, इसके पहले ही पुलिस जीप सैनू को अज्ञात स्थान पर लेकर चली गई.

पुलिस या गुंडे?

राठौड़ आगे कहते हैं कि कुछ क्षण बाद ही सादे कपड़ों में कुछ लोग उनके कार्यालय में आ धमके और दोनों लड़कियों और शीला गोटा को जबरन ले जाने लगे. मैंने उन्हें रोका और उनसे पहचान पत्र दिखाने को कहा, लेकिन उन लोगों ने एक न सुनीं. वे बलात्कार पीड़ित लड़कियों और शीला को गिरफ्तार करना चाहते थे. 

चूंकि उस समय शाम को 7.30 बज रहा था, मैंने कहा कि सूर्यास्त के बाद वे किसी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकते. मेरी यह दलील काम कर गई और वे लोग मेरे कार्यालय से चले गए. लेकिन कुछ समय बाद ही, हम जब बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में दाखिल करने के लिए याचिका तैयार कर रहे थे, लोगों का यह गुट फिर आ धमका और पीड़ितों और शीला गोटा को मेरे दफ्तर से उठा ले गया.

राठौड़ ने बताया कि याचिका शनिवार की सुबह दाखिल कर दी गई. मामले की गम्भीरता को देखते हुए उस पर तुरन्त सुनवाई होनी थी. कोर्ट ने आदेश दिया कि वह पीड़ितों और शीला गोटा को रविवार को पेश करे. उन्हें रविवार सुबह कोर्ट में पेश किया गया. उन्हें सुधार गृह भेज दिया गया इस शर्त के साथ कि पुलिस अगली सुनवाई होने तक उनसे सम्पर्क नहीं करेगी. सुनवाई नियमित पीठ के सामने सोमवार को शुरू हो गई है.

पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप

राठौड़ ने आरोप लगाया है कि गढ़चिरौली पुलिस निर्दोष आदिवासी लोगों का उत्पीड़न कर रही है क्योंकि वे सूरजगढ़ खनन परियोजना का विरोध कर रहे हैं. जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे सूरजगढ़ खनन परियोजना के खिलाफ संघर्ष के अगुवा थे. ये लोग इस आन्दोलन की अगुवाई कर रहे हैं. राठौड़ का दावा है कि इसी कारण से गढ़चिरौली पुलिस उनका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न कर रही है.

वकील निहाल सिंह का कहना है कि गढ़चिरौली पुलिस के कमांडो द्वारा दो आदिवासी लड़कियों के साथ कथित बलात्कार की घटना के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता उनके समर्थन में उठ खड़े हुए ताकि बालिकाओं को न्याय मिल सके. उन्होंने लड़कियों को न्याय दिलाने के लिए आन्दोलन भी शुरू किया हुआ है. 

राठौड़ कहते हैं कि सैनू गोटा, जब एक स्थानीय वकील जगदीश मेश्राम के साथ दुष्कर्म पाडि़तों से मुलाकात करने गढ़चिरौली जिला अस्पताल गए थे, तब पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उनकी मोटरसाइकिल जब्त कर ली. पुलिस ने उन पर हंगामा करने और पुलिस के काम में अवरोध उत्पन्न करने का आरोप लगाया है. दोनों पर बम्बई पुलिस अधिनियम के तहत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस का यह भी आरोप है कि मेश्राम जब अस्पताल पहुंचे थे, तब उसने शराब पी रखी थी.

First published: 31 January 2017, 8:25 IST
 
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