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जब अरूण जेटली के कारण सहवाग ने बदल लिया था अपना बड़ा फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 August 2019, 17:29 IST

देश के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में शनिवार को निधन हो गया. 66 साल के जेटली काफी लंबे समय से बीमार थे और वो बीते 9 अगस्त से एम्स के आईसीयू में भर्ती थे. जेटली बीते 13 दिनों से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे. अरुण जेटली का क्रिकेट से भी गहरा नाता था.

अरुण जेटली लगातार 13 सालों तक दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष थे. जेटली साल 1999 से लेकर 2012 तक डीडीसीए के अध्यक्ष रहे थे. जेटली जब डीडीसीए के अध्यक्ष थे तभी सहवाग, गौतम गंभीर, शिखर धवन, ईशांत शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ी भारतीय टीम में शामिल हुए थे. जेटली जितना क्रिकेट के पास थे उतना ही नजदीकी संबंध उनके खिलाड़ियों से थे. एक समय ऐसा भी आया था जब जेटली ने अपने संबंधो का इस्तेमाल करते हुए सहवाग को अपन फैसला बदलने के लिए मना लिया था.

साल 2009 में वीरेंद्र सहवाग ने नई दिल्ली का साथ छोड़कर हरियाणा की तरफ से रणजी खेलने का मन बना लिया था. सहवाग साल 1998 से दिल्ली रणजी के लिए खेल रहे थे ऐसे में सहवाग का हरियाणा के लिए खेलना दिल्ली के लिए किसी बड़े झटके से कम ना था.

सहवाग दिल्ली रणजी टीम की सलेक्शन कमेटी में स्पोर्टस कमेटी के दखल से नाखुश थे. सहवाग ने कहा था कि स्पोर्टस कमेटी को काफी ज्यादा ताकत दे दी गई थी और वोे इसका गलत इस्तेमाल कर रहे थे. सहवाग का मानना था कि स्पोर्टस कमेटी अपने 'लड़को' को दिल्ली की टीम में शामिल करते थे.

सहवाग को दिल्ली का साथ छोड़कर हरियाणा के खलने के लिए डीसीसीए से एक एनओसी लेनी थी. वहीं सुनिल देव जिन्हें यह एनओसी देनी थी उन्होंने कहा था कि वो सहवाग को बिना किसी देर के एनओसी दे देंगे. हालांकि इन्हीं खबरों के बीच जेटली ने सहवाग के बात थी. इस मुलाकात से पहले सहवाग ने कहा था कि वो जेटली से मिलेंगे. सहवाग के दिल्ली को छोड़ने का पूरा मन बना लिया था. लेकिन जब जेटली और सहवाग की मुलाकात हुई तो जेटली सहवाग को मनाने में सफल हुए.

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First published: 24 August 2019, 17:12 IST
 
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