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जब सचिन तेंदुलकर के लिए अटल रहे वाजपेयी, आलोचनाओं के बावजूद नहीं बदला फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 August 2018, 7:57 IST
(File Photo)

क्रिकेट के भगवान और दुनिया के महान बल्लेबाज रहे सचिन तेंदुलकर ने साल 2003 में क्रिकेट के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. उस साल सचिन तेंदुलकर ने सर डॉन ब्रैडमैन द्वारा टेस्ट में बनाए गए 29 शतकों के रिकॉर्ड को धराशायी कर दिया था.
ब्रैडमैन के इस रिकॉर्ड को तोड़ने के बाद सचिन तेंदुलकर को एक बेशकीमती तोहफा मिला था.

दरअसल, फिएट मोटर्स ने सचिन तेंदुलकर को फेरारी मोडेना 360 कार तोहफे में देने का ऐलान किया था क्योंकि सचिन ने दशकों पुराने एक रिकॉर्ड को जमींदोज कर दिया था. टीम इंडिया जब इंग्लैंड दौरे पर पहुंची तो सचिन तेंदुलकर को जानेमाने फॉर्मूला वन ड्राइवर माइकल शूमाकर ने मुलाकात के दौरान ये कार तोहफे में दी.


सचिन तेंदुलकर को नायाब तोहफे के रूप में मिली कार की उस समय(साल 2003) कीमत तकरीबन 75 लाख रुपये थी.
तेंदुलकर ने ये तोहफा कबूल तो कर लिया लेकिन उनके सामने परेशानी उस समय खड़ी हो गई जब इस फेरारी को भारत लाए जाने पर गौर किया जा रहा था.

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दरअसल, इस कार को इंग्लैंड से भारत लाने पर कुल कीमत का 120 प्रतिशत यानी तकरीबन 1.1 करोड़ रुपये बतौर कस्टम, इंपोर्ट और एक्साइज ड्यूटी की रकम चुकानी थी. वहीं, जब तोहफे में मिली कार के लिए उसकी कीमत से ज्यादा ड्यूटी पे करने का मामला आया तो सचिन ने सीधे भारत सरकार का रुख किया.

सचिन तेंदुलकर ने तोहफे में मिली कार पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को माफ करने की अपील की. उस वक्त देश में एनडीए की सरकार थी और प्रधानमंत्री थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने देश के गौरव यानी सचिन तेंदुलकर की अपील को सुना ही नहीं बल्कि स्वीकार भी किया. इसके बाद कार पर लगने वाली ड्यूटी माफ कर दी.

उधर, जैसे ही अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इस बात का ऐलान किया चारों ओर सरकार की आलोचना होने लगी. किसी ने कहा, सरकार एक व्यक्ति के लिए दोहरे मापदंड कैसे अपना सकती है. किसी एक व्यक्ति के लिए नियमों में ढील दिया जाना कहां तक जायज है. वाजपेयी जी अपने फैसले पर 'अटल' रहे.

First published: 17 August 2018, 7:48 IST
 
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