Home » क्रिकेट » Ayodhya Verdict: Virender Sehwag Tweet After Supreme court Judgement
 

Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वीरेंद्र सहवाग ने किया ट्वीट

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 November 2019, 14:31 IST

सुप्रीम कोर्ट ने शानिवार को अयोध्या की राम-जन्मभूमि विवादित जमीन पर अपना फैसला दिया है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में सर्वसम्मति से फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन को राम जन्म भूमि न्यास को देने का फैसला सुनाया है.

पूरा देश आज सुबह से ही सुप्रीम कोर्ट पर नजर बनाए हुए था कि आखिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला किया होता है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी से लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस फैसले का स्वागत किया. वहीं टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने भी सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी है.

 

टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने ट्विटर पर भगवान राम का फोटो ट्विट करते हुए लिखा,'श्रीराम, जय राम, जय जय राम.' सहवाग ने कोर्ट का फैसला आने के बाद अपनी खुशी जाहिर की है.

जबकि पूर्व क्रिकेटर मिथुन मन्हास ने भी कोर्ट के इस फैसले के बाद ट्वीट किया,'सरयू के किनारे से अयोध्या ये पुकारे, एक फैसला ऐसा हो जहां कोई ना हारे.'

बता दे, साल 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था. शानिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार को तीन महीने के अंदर एक सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट बनाने के लिए कहा है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण का काम इस ट्रस्ट को सौंपा जाए.

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में मुस्लिम पक्ष को जमीन देने की जिम्मेदारी योगी सरकार की है. कोर्ट ने साफ किया है कि आस्था और विश्वास पर नहीं, कानून के आधार पर फैसला. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई मे अपने फैसले में कहा,'दस्तावेज़ों से पता चलता है कि 1885 से पहले हिन्दू अंदर पूजा नहीं करते थे. बाहरी अहाता में रामचबूतरा सीता रसोई में पूजा करते थे. साल 1934 में जब दंगे हुए उसके बाद से मुसलमानों का एक्सक्लूसिव अधिकार आंतरिक अहाते में नहीं रहा. मुसलमान उसके बाद से अपना एकाधिकार सिद्ध नहीं कर पाए. हिन्दू निर्विवाद रूप से बाहर पूजा करते रहे. 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद का ढांचा ढहा दिया गया. रेलिंग 1886 में लगाई गई.'

Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश नहीं हैं सुन्नी वक्फ बोर्ड, कर सकते हैं रिव्यू पिटीशन दाखिल

First published: 9 November 2019, 14:04 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी