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ट्रायल के लिए जूते खरीदने के लिए इस गेंदबाज़ ने बेच दी थी साइकिल, बाद में धोनी को दिलाई थी उनके करियर की सबसे बड़ी जीत!

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 October 2018, 13:14 IST

आज जहां पूरा देश राष्ट्रपति महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती बना रहा है. वहीं आज क्रिकेट में एक ऐसे तेज़ गेंदबाज़ का जन्मदिन है,जिसने अपनी गेंदबाज़ी की दम पर भारत के महान कप्तान महेंद्र सिंह धोनी उनके करियर की सबसे बड़ी जीत दिलाई थी. इस जीत ने धोनी को एक कप्तान के रूप में पूरी तरह से साबित कर दिया था. हम बात करें है भारत के पूर्व गेंदबाज़ प्रवीण कुमार की. उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी प्रवीण कुमार का आज जन्मदिन है. तो आइये जानते है, उसने जुडी कुछ दिलचस्प बातें:

2 अक्टूबर 1986 में जन्मे प्रवीण सकत सिंह, जिन्हें लोग प्रवीण कुमार के नाम से भी जानते हैं वो 32 साल के हो गए हैं. अपनी स्विंग गेंदबाजी के लिए मशहूर प्रवीण कुमार नई गेंद से बड़े-बड़े बल्लेबाजों की नाक में दम कर देते थे. साल 2007 में डेब्यू करने वाले प्रवीण ने साल 2012 तक भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेला. वो साल 2011 वर्ल्ड कप के लिए भी टीम इंडिया में चुने गए लेकिन खराब फिटनेस की वजह से वो टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे.

2 अक्टूबर 1986 में जन्मे प्रवीण सकत सिंह, जिन्हें लोग प्रवीण कुमार के नाम से भी जानते हैं वो 32 साल के हो गए हैं. अपनी स्विंग गेंदबाजी के लिए मशहूर प्रवीण कुमार नई गेंद से बड़े-बड़े बल्लेबाजों की नाक में दम कर देते थे. साल 2007 में डेब्यू करने वाले प्रवीण ने साल 2012 तक भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेला. वो साल 2011 वर्ल्ड कप के लिए भी टीम इंडिया में चुने गए लेकिन खराब फिटनेस की वजह से वो टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे.

क्रिकेट के लिए छोड़ दिया बोर्ड का एग्जाम

आप को जानकार हैरानी होगी कि प्रवीण कुमार ने क्रिकेट मैच खेलने के लिए 10वीं बोर्ड का पेपर छोड़ दिया था. प्रवीण कुमार ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया, 'मेरे भाई ने मुझसे पूछा, कहां गए थे. मैंने कहा एग्जाम देने. इसके बाद उसने प्रश्न पत्र मांगा, तो मैंने कहा कि उन्होंने ले लिया. इसके बाद मेरे भाई ने कहा कि अच्छा, वैसे तुमने छक्का अच्छा मारा था.'

साइकिल बेच कर ख़रीदे थे जूते

 प्रवीण कुमार का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था. उनके पिता एक कॉन्सटेबल थे और वो पहलवानी पसंद करते थे, लेकिन प्रवीण कुमार ने क्रिकेट को चुना. प्रवीण इतने गरीब थे कि उनके पास अच्छे जूते खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे. प्रवीण कुमार ने अंडर 19 ट्रायल के लिए अपनी साइकिल बेच दी थी. दरअसल उन्हें ट्रायल से पहले अच्छे जूते खरीदने थे. 

धोनी को दिलाई थी उनके करियर की सबसे बड़ी जीत

प्रवीण कुमार का धोनी के कप्तानी करियर को ऊंचाई पर पहुंचाने में भी बड़ा योगदान रहा है. ऑस्ट्रेलिया में साल 2007-08 में हुई कॉमनवेल्थ गेम्स सीरीज में प्रवीण कुमार ने चमत्कारिक प्रदर्शन किया था. मेरठ के इस गेंदबाज ने 4 मैचों में 10 विकेट लिए थे. बेस्ट ऑफ 3 के 2 फाइनल में उन्होंने 6 विकेट लेकर टीम इंडिया को चैंपियन बनाया था. ये धोनी के कप्तानी करियर की सबसे बड़ी जीत में से एक है.

First published: 2 October 2018, 13:12 IST
 
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