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टीम इंडिया को दो बार वर्ल्ड कप दिलाने वाला कप्तान खा रहा है दर-दर की ठोकरें

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 January 2018, 13:23 IST

क्रिकेट के लिए भारत में लोगों की दीवानगी सेे हर कोई वाकिफ है. खेलों में जो सम्मान और पैसा क्रिकेट में खिलाड़ियों को मिलता है शायद वो इंडिया में किसी और खेल में नहीं मिलता है. इसी वजह से आज के बच्चे और युवा टीम इंडिया का हिस्सा बनना चाहते हैं. लेकिन अगर किसी का ये सपना पूरा हो जाए, अपने देश के लिए दो वर्ल्ड कप खेले और सरकार उसे पद्मश्री पुरस्कार दे तो उस खिलाड़ी के लिए इससे बड़ा सम्मान कुछ नहीं होगा.

अब आपको जो खबर हम बताने जा रहे हैं उसे पढ़कर शायद आप भी विश्वास नहीं करेंगे. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक ऐसी ही खिलाड़ी के आज के हालात बताए हैं. टीण इंडिया को अपनी अगुवाई में दो बार नेत्रहीनों का क्रिकेट विश्वकप दिलाने वाले शेखर नायक के पास इस समय कोई रोजगार नहीं है. देश के लिए 13 साल खेलने वाले शेखर नायक अाजकल अपने लिए नौकरी ढूंढ रही है.

शेखर ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ”जब लोग मेरी तारीफ करते हैं तो मैं खुश हो जाता हूं. लेकिन जब घर लौटकर अपनी पत्नी, बेटी पूर्विका (7) और सनविका (2) को देखता हूं तो अपने भविष्य को लेकर डर जाता हूं. मैंने कुछ सांसदों और विधायकों से मुझे नौकरी देने की अपील की है. मुझे आश्वासन भी दिया है. लेकिन फिर भी मैं बेरोजगार हूं. मैं राज्य सरकार से गुजारिश करता हूं कि मेरी काबिलियत को देखते हुए मुझे कोई नौकरी दें."

गौरतलब है कि कर्नाटक के शिमोगा जिले में  हुए शेखर ने शारदा देवी स्कूल फॉर ब्लाइंड में पढ़ाई करते हुए क्रिकेट की बारीकियां सीखीं. इसके बाद वह भारत की राष्ट्रीय टीम के लिए चुने गए. उन्होंने 2002 से लेकर 2015 तक टीम इंडिया के लिए क्रिकेट खेला. वह साल 2010 से लेकर साल 2015 तक टीम इंडिया के कप्तान रहे.

शेखर की अगुवाई में भारत ने पहली बार बेंगलुरु में T20 विश्व कप और 2015 में केपटाउन में वनडे क्रिकेट विश्व कप जीता था. इसके बाद 30 साल के बाद उन्हें टीम में नहीं शामिल किया गया. इसके बाद वो कुछ समय तक एनजीओ से जुड़े. लेकिन निजी वजहों से जॉब छोड़ दी.

First published: 9 January 2018, 13:23 IST
 
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