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ग्रेग चैपल ने गहरी दोस्ती के बावजूद गांगुली के करियर को तबाह कर दिया और फिर...

विकाश गौड़ | Updated on: 7 August 2018, 13:01 IST
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एक दौर था जब टीम इंडिया भारत के बाहर लगातार मैच खेलने के बाद भी मैच नहीं जीत पाती थी लेकिन तभी एक कप्तान आया जिसने टीम इंडिया को जीतना सिखाया. देश ही नहीं बल्कि विदेशों में टीम इंडिया नित नए कारनामे कर रही थी. ये कप्तान कोई और नहीं बल्कि सौरव गांगुली थे.

टेस्ट के बाद वनडे में सौरव गांगुली ने टीम इंडिया को जीत का आदी कर दिया था लेकिन एक ऐसा दौर आया जब एक कोच ने सौरव गांगुली का क्रिकेटिंग करियर ही तबाह कर दिया. इसके बाद कभी भी सौरव गांगुली को देश के लिए खेलने का मौका नहीं मिला. ये कोच थे ग्रेग चैपल.

ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ग्रेग चैपल की बात आज इसलिए क्योंकि आज यह अपना 70वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं लेकिन इन्होंने गागुंली की तमाम खुशियों पर पानी फेर दिया था. अपने देश के लिए भले ही ग्रेग चैपल अच्छे साबित हुए हैं लेकिन बतौर कोच उन्हें कोई भी पसंद नहीं करता.

बताया जाता है कि ग्रेग चैपल का रवैया बतौर कोच एकदम तानाशाह जैसा होता है, जिसे कोई पसंद नहीं करता. लेकिन सौरव गांगुली ने टीम मैनेजमेंट के अलावा बोर्ड की एक नहीं सुनी और ग्रेग चैपल को टीम इंडिया का कोच बनाने की ख्वाहिश जाहिर कर दी. इसके पक्ष में कोई भी नहीं था. 

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बात बस इतनी सी थी कि गांगुली ग्रेग चैपल को पसंद करते थे, दोनों अच्छे दोस्त थे लेकिन चैपल ने गांगुली का ही क्रिकेट करियर तबाह कर दिया. खुद गांगुली ने इसका जिक्र अपनी किताब 'ए सेंचुरी इज नॉट इनफ' में किया है और बताया कि किस तरह पहले उन्हें टीम से निकाला और फिर कप्तानी छीनी.

इतना ही नहीं क्रिकेट के तमाम जानकार और उस समय टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताने का सपना संजोए बैठे सचिन तेंदुलकर ने भी माना है कि साल 2007 वर्ल्ड कप से बाहर होने का ज़िम्मेदार कोई और नहीं बल्कि कोच ग्रेग चैपल थे. बता दें कि दादा ने भी ग्रेग चैपल के इस प्रकरण को कुल 3 चैप्टर में बांटा है.

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गांगुली ने अपनी किताब में चैपल के साथ ऑस्ट्रेलिया में बिताए कुछ निजी दिनों का भी जिक्र किया है. उस दौरान दादा ने चैपल से बल्लेबाज़ी टिप्स लिए थे. दादा ने इस बात को बीसीसीआई तक को नहीं बताया था. इस दौरान चैपल ने गांगुली को टिप्स के अलावा एडिलेड के आयताकार मैदान के बारे में भी कई जानकारियां दी थीं.

इस दौरान टीम इंडिया के कोच थे जॉन राइट. जॉन राइट को गांगुली और चैपल की इस मुलाकात का पता चला तो वो नाराज हुए लेकिन बाद में माना कि दादा ने ये टीम की भलाई के लिए किया था. इस सिरीज में गांगुली का परफॉर्मेंस अच्छा रहा था और इंडिया ने भी टेस्ट सिरीज एक-एक से बराबर की थी.

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इसके बाद जॉन राइट का कोच कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया. फिर क्या गांगुली के पास अपने दोस्त और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर ग्रेग चैपल को टीम इंडिया का कोच बनाने का मौका था. इसके लिए दादा ने बीसीसीआई से चैपल को अगला कोच बनाने की गुज़ारिश की. हालांकि, सुनील गावस्कर बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने मना किया लेकिन दादा नहीं माने.

बीसीसीआई ने सौरव गांगुली की बात को माना और चैपल को कोच पद के लिए चुन लिया. इस दौरान गांगुली काउंटी क्रिकेट खेल रहे थे. गांगुली ने चैपल को फोन पर बधाई दी और दोनों खुश हुए. चैपल का कार्यकाल भारत के ज़िम्बाब्वे दौरे से शुरू हुआ. इसी बीच गांगुली टीम से जुड़े लेकिन उन्होंने महसूस किया कि कुछ गड़बड़ है. 

गांगुली ने फील किया कि कोच ग्रेग चैपल का रवैया उनके लिए एकदम उल्टा था. यही हुआ चैपल की तरफ़ से बीसीसीआई को शिक़ायतों से भरा एक मेल मिला, जिसमें मुख्यतौर पर ये था कि सौरव गांगुली के रहते हुए टीम के खिलाड़ी उनसे डरते हैं और खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं.

टीम को अगर साल 2007 वर्ल्ड कप के लिए तैयार करना है तो फिर दादा की जगह दूसरा कप्तान बनाना ज़रूरी है. इसके लिए बीसीसीआई ने ग्रेग और गांगुली के बीच बातचीत करानी चाही लेकिन दादा ने मना कर दिया. इसका नतीजा यह रहा कि गांगुली से कप्तानी तो छिनी(राहुल द्रविड़ नए कप्तान बने) ही साथ ही साथ टीम से भी बाहर होना पड़ा.

दादा को बाहर करने की पीछे बीसीसीआई ने उनकी फिटनेस और ख़राब फ़ॉर्म को वजह बताया था. जबकि गांगुली ने पिछली सिरीज में शतक जड़ा था. फिटनेस साबित करने के लिए गांगुली ने दिलीप ट्रॉफ़ी खेली. जिस शाम टीम चुनी जा रही थी उसी सुबह शतक जड़ा फिर भी टीम में शामिल नहीं किया और इसी के साथ दादा के करियर का अंत हो गया.

First published: 7 August 2018, 13:01 IST
 
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