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धोनी की कप्तानी में खिलाड़ियों के गाली देने पर थी रोक, ऐसे तोड़ दिया था ऑस्ट्रेलिया का गुरूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 July 2018, 13:03 IST
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टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी कैप्टन कूल के नाम से मशहूर रहे हैं. मैदान पर उनके संयम को लेकर हर कोई हैरान रहता है. धोनी को मुश्किल परिस्थिति में भी अपना आपा खोते हुए बहुत कम बार देखा गया है. धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने आईसीसी के तीनों बड़े टूर्नामेंट (आईसीसी विश्वकप-2011 , आईसीसी T20 विश्वकप -2007 और चैंपियंस ट्रॉफी) जीते हैं.

धोनी अपनी कप्तानी के दौरान खुद जितना संयम बरतते थे. उतना ही वो अपने साथी खिलाड़ियों को भी संयम बरतने की सलाह देते थे. उनका हमेशा एक ही कहना होता था कि मैदान पर कोई भी विपक्षी टीम के खिलाड़ियों को गाली नहीं देगा. इसका खुलासा एमएस धोनी के करीबी दोस्त भरत सुंदरेशन ने अपनी किताब में किया है.

किताब में धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया के पहले ऑस्ट्रेलिया दौर का जिक्र किया गया हैं. उन्होंने अपनी किबात में खुलासा करते हुए कहा है कि धोनी ने हमेशा अपने साथी खिलाड़ियों को मां-बहन की गाली निकलाने से मना किया है. उनका अपने विरोधियों को मात देने का अपना ही अलग अंदाज है. यही वजह कि धोनी भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे हैं.

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दरअसल, फरवरी 2008 में एमएस धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया का पहला दौरा किया था. इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम का विश्व क्रिकेट में दबदबा था. ऑस्ट्रेलिया से मैच जीतना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं था. ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना तो और मुश्किल था. ऑस्ट्रेलिया की टीम 1999 से लगातार तीन बार आईसीसी विश्वकप पर कब्जा कर चुकी थी. उसका घमंड सातवें आसमान पर था.

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेलबॉर्न क्रिकेट मैदान पर वनडे खेला गया. बतौर कप्तान धोनी का ये 15वां वनडे मैच था. भारत ने पहले गेंदबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 159 रनों पर ढेर कर दिया. इसके बाद भारत बल्लेबाजी करने के लिए उतरा. एमएस धोनी और रोहित शर्मा क्रीज पर बल्लेबाजी कर रहे थे. भारत को जीत के लिए 10 रनों की जररूत थी, उसी समय धोनी ने ग्लिब्स बदलने के लिए कॉल किया. आमतौर पर ऐसा ड्रेसिंग रूम से किसी खिलाड़ी को कोई मैसेज भेजने के लिए किया जाता है. लेकिन धोनी ने उलटा ड्रेसिंग रूम को मैसेज भेजा.उसका दिमाग अलग ही चल रहा था. धोनी ने मैसेज भेजा कि मैच जीतने के बाद बालकनी में कोई जश्न नहीं मनाएगा.

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धोनी ने साथ में बल्लेबाजी कर रहे रोहित शर्मा और टीम के साथी युवा खिलाड़ियों को बोला कि मैच जीतने के बाद मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से हाथ मिलाते समय भी इसको ध्यान में रखें. ज्यादा ओवर रिएक्ट ना करें. ज्यादा उत्तेजित ना हों. धोनी का मानना था कि अगर हम जश्न मनाएंगे तो ऑस्ट्रेलिया को लगेगा कि हमारा तुक्का लगा है. 

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आखिरकार धोनी की रणनीति बिल्कुल सही साबित हुई. 2008 में धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया से वीबी सीरीज जीती. इसके बावजूद धोनी ने टीम के खिलाड़ियो को जीत का जश्न मनाने से इनकार किया था. धोनी की सोच थी कि अगर भारतीय टीम जश्न मनाती तो ऑस्ट्रेलिया को लगता कि ये तुक्का है. धोनी ऑस्ट्रेलिया को ये संदेश देना चाहते थे कि उनको कोई भी टीम हरा सकती है. ये एक उलटफेर नहीं है. ये आगे भी होता रहेगा'

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First published: 22 July 2018, 12:23 IST
 
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