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जब पोंटिंग ने अकेले दम पर टीम इंडिया का वर्ल्डकप जीतने का सपना किया चकनाचूर

विकाश गौड़ | Updated on: 23 March 2018, 17:03 IST
(File Photo)

साउथ अफ्रीका का वांडर्स स्टेडियम हजारों की संख्या में दर्शक और मैदान पर क्रिकेट की दो दिग्गज टीमों के बीच साल 2003 के वर्ल्डकप का फाइनल मुकाबला खेला गया. ये ऐतिहासिक मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच खेला गया. इस मैच को ऑस्ट्रेलिया ने 125 रन से जीता था, जिसके बाद ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर सवाल उठे थे कि उनके बल्लों मे कुछ न कुछ लगा है क्योंकि उस दौरान ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 50 ओवरों में दो विकेट के नुकसान पर 359 रन बनाए थे.

इस ऐतिहासिक मैच में ऑस्ट्रेलिया की तरफ से कप्तान रिकी पोंटिंग ने 121 गेंदों पर 140 रनों की नाबाद पारी खेली थी. इस पारी में पोंटिंग ने 4 चौके और 8 छक्के लगाए थे. आपको बता दें इस मैच में टीम इंडिया के तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी थी, जो कि ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाजों ने गलत साबित कर दी थी. पहले ही ओवर से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाद टीम इंडिया के गेंदबाजों पर हावी थे. यहां तक कि पहली विकेट 105 रन गिरी थी जब 57 रन बनाकर टीम को ठोस शुरुआत दे चुके थे.

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सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि टीम इंडिया की तरफ से 8 गेंदबाजों का प्रयोग किया लेकिन जो दो विकेट थे वो हरभजन सिंह को मिले बाकि कोई भी गेंदबाज छाप छोड़ने में कामयाब नहीं हो सका था. देखते ही देखते ऑस्ट्रेलिया रिकी पोंटिंग के नाबाद 140 रन और डेमियन मार्टिन के नाबाद 88 रनों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया 359 रनों तक पहुृंच गया. आज के फटाफट क्रिकेट के हिसाब से ये स्कोर ज्यादा न हो लेकिन साल 2003 के मुताबिक ये एक विनिंग टोटल था.

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भारतीय टीम की तरफ से 360 रन के टारगेट को पाने के लिए सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग की जोड़ी बल्लेबाजी के लिए उतरी. मैदान में उत्साह था दोनों देशों के दर्शक मैच का रोमांच पसंद करना चाहते थे लेकिन पहले ही ओवर की पांचवी गेंद पर ग्लेन मेग्राथ ने सचिन तेंदुलकर को आउट कर पवेलियन भेज दिया और टीम को खराब शुरूआत मिली. इसके बाद सौरव गांगुली ने सहवाग के साथ मिलकर करीब पचास रन जोड़े लेकिन वो भी चलते बने.

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इस दौरान सहवाग अच्छे शॉट खेलकर रन बना रहे थे लेकिन उन्हे किसी का साथ नहीं मिल रहा था. इसके थोड़ी देर बाद मोहम्मद कैफ भी आउट हो गए. बाद में कमान सहवाग और राहुल द्रविड़ के हाथों में थी. इस बीच धीरे धीरे रन भी बन रहे थे लेकिन बारिश शुरू हो गई. बारिश को तेज देख भारतीय फैंस को लगा कि मैच रिजर्व डे पर खेला जाएगा लेकिन ऑस्ट्रेलियाई खुशकिस्मती रही कि मैच शुरू हुआ और सहवाग ने फिर बनाना शुरू कर दिए लेकिन सहवाग 82 रन के निजी स्कोर पर रन आउट हो गए और भारत की एकमात्र आस खत्म हो गई.

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धीरे-धीरे पूरी टीम इंडिया के सभी बल्लेबाज पवेलियन से बाहर हो गए और ऑस्ट्रेलियाई टीम का जश्न शुरू हो गया क्योंकि उनकी टीम ने भारत पर 125 रन से शानदार जीत दर्ज कर लगातार दूसरा और टीम का तीसरा वर्ल्डकप उसके हाथों में था. इस वर्ल्डकप के फाइनल में बेहतरीन पारी खेलने के लिए रिकी पोंटिंग को मैन ऑफ द मैच मिला था, जबकि टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले सचिन तेंदुलकर मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे.

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आपको बता दें भारतीय टीम के पास साल 1983 की यादों को ताजा करने का समय था लेकिन विशाल लक्ष्य के सामने टीम इंडिया बौनी साबित हुई. लिहाजा टीम इंडिया के लिए ये दिन बहुत ही गम भरा रहा क्योंकि ये मैच इंडिया हार गई और वर्ल्डकप जीतने का सपना सपना ही रह गया. हालांकि ये सपना एमएस धोनी की कप्तानी वाली टीम ने साल 2011 में पूरा कर दिया था. गौरतलब है कि कपिल देव की कप्तानी में भारत ने पहला वर्ल्डकप साल 1983 में जीता था.

First published: 23 March 2018, 17:04 IST
 
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