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धर्मशाला में छाया कानपुर का छोरा, जानिए कुलदीप यादव का क्रिकेट करियर

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 March 2017, 16:56 IST

स्पिन गेंदबाज़ कुलदीप यादव ने धर्मशाला टेस्ट से अपने करियर का आगाज किया है. हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के इस मनोहारी मैदान पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर सीरीज का निर्णायक टेस्ट खेला जा रहा है.

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के चोटिल होने के बाद कानपुर के क्रिकेटर कुलदीप यादव ने धर्मशाला में टेस्ट कैप पहनी है. टेस्ट की पहली पारी में ही कुलदीप ने अपनी फिरकी पर कंगारुओं को जमकर छकाया. ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 300 रनों पर खत्म हुई. कुलदीप ने 23 ओवर में 68 रन खर्च करते हुए 4 कंगारू बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर करियर की शानदार शुरुआत की है. एक नज़र उनके क्रिकेट करियर और सफ़र पर:

फाइल फोटो

22 वर्षीय कुलदीप यादव हरफनमौला खिलाड़ी है. वह लोअर ऑर्डर के उपयोगी बल्लेबाज होने के साथ ही चाइनामैन स्पिन  गेंदबाज हैं. उन्होंने 22 प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच खेलते हुए कुल 723 रन बनाए हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 117 है.

वहीं गेंदबाजी करते हुए कुलदीप यादव ने 81 विकेट लिए हैं. इस दौरान उन्होंने तीन बार पांच विकेट हासिल किए हैं. गेंदबाजी में उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 79 रन देकर 6 विकेट है. 

लिस्ट ए का आंकड़ा

गेंदबाजी : 10 मैचों में 14 विकेट, सर्वश्रेष्ठ- 5/60
बल्लेबाजी : 10 मैचों में 49 रन, बेस्ट स्कोर- 25 रन

टी20 क्रिकेट करियर

गेंदबाजी : 27 मैचों में 37 विकेट, सर्वश्रेष्ठ- 5/17
बल्लेबाजी : 27 मैचों में 24 रन, बेस्ट स्कोर- 17 रन

फाइल फोटो

कानपुर के लाल बंगला से शुरू हुआ सफ़र

कुलदीप यादव की एक और खास बात है कि अगर उनके सामने कोई हॉरर का जिक्र कर दे तो वह हनुमान चालीसा का जाप करने लगते हैं. कानपुर के लाल बंगला निवासी राम सिंह के कुलदीप इकलौते बेटे हैं.

पिता राम सिंह का कहना है कि बेटा बचपन से क्रिकेटर बनना चाहता था. उसकी मां ने बहुत विरोध किया और वह उसे सेना में भेजना चाहती थीं, लेकिन वह तो कुछ और ही सोचकर बैठा था. आखिरकार कुलदीप की इच्छा के आगे झुकते हुए उनका ग्रीनपार्क हॉस्टल में एडमिशन कराया गया. 

क्रिकेट किट में बजरंगबली की तस्वीर

पिता राम सिंह बताते हैं कि कुलदीप जब आठ साल का था तो वह मामा के घर गया और वहां बड़े मामा ने उसे भूतों की कई कहानियां सुनाईं, उसी के बाद से कुलदीप भूत-प्रेत के नाम से डर जाता है. 

छोटी बहन अनुष्का भी इसकी तस्दीक करती हैं. अनुष्का के मुताबिक वह आज भी डर भगाने के लिए हर दिन एक घंटे तक पूजा-पाठ करता है. कुलदीप के किट में बजरंगबली के साथ ही भगवान विष्णु की तस्वीर रहती है. 

क्रिकेटर कुलदीप यादव के पिता राम सिंह, छोटी बहन अनुष्का और मां. (पत्रिका)

कुंबले ने बताया था फ्यूचर स्टार

कुलदीप के परिवार में तीन बहनेें हैं, जबकि वे इकलौते बेटे हैं. टीम इंडिया के कोच अनिल कुंबले ने कानपुर में हुए टी -20 मैच के दौरान कुलदीप की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि वे भारतीय टीम के फ्यूचर स्टार हैं. कुंबले के ही कहने पर कुलदीप को टेस्ट कैप मिली है.

पिता के मुताबिक, जब कुलदीप 10 साल का था तब उनको बेहतर क्रिकेट सीखने के लिए अच्छे कोच की जरूरत थी. उनके एक दोस्त ने कोच कपिल यादव के बारे में बताया. कोच कपिल ने पहले दिन जब बैट बॉल में से एक को चुनने को कहा तो, कुलदीप ने बॉल को चुना. 

ऐसे पड़ा चाइनामैन नाम

कोच कपिल ने उनसे दो ओवर बॉलिंग कराई, लेकिन कोच ने स्पिन बॉल फेंकने की सलाह दी. कुलदीप ने लगातार 4 गेंद में बल्लेबाज को बोल्ड कर दिया. कुलदीप का एक्शन बाकी स्पिनरों से अलग था और कोच ने पहले हंसी-हंसी में उन्हें चाइना मैन नाम दिया, जो आगे जाकर कुलदीप की पहचान में जुड़ गया.

कुलदीप अपने भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर हैं. दो बड़ी बहनें मधु और अनीता यादव हैं, जबकि कुलदीप से छोटी बहन अनुष्का है. ज्यादा दोस्त बनाना कुलदीप को पसंद नहीं है. कुलदीप के एक दोस्त रवि सिंह ने बताया कि वह बचपन से ही एक बड़ा क्रिकेटर बनना चाहता था. हम सभी मोहल्ले में खेला करते थे. एक मैच में कुलदीप ने महज 54 गेंदों में सेंचुरी ठोककर झंडा गाड़ दिया था.

First published: 25 March 2017, 13:32 IST
 
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