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IND vs SL: धोनी ने बंद की आलोचकों की जुबान, दर्शकों को दिया खुशी का मौका

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 10 December 2017, 15:04 IST
फाइल फोटो

धर्मशाला में रविवार को टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और सबसे अनुभवी खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी संयमित बल्लेबाजी से एक तरफ आलोचकों का मुंह बंद किया और फिर स्टेडियम में मायूस बैठे दर्शकों को खुशी मनाने का मौका दिया. संकट मोचक बने धोनी ने न केवल शानदार बल्लेबाजी की बल्कि टीम इंडिया को बुरे रिकॉर्ड से बचाकर एक सम्मानजन स्कोर तक भी ले गए.

हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, धर्मशाला में रविवार को खेले जा रहे टीम इंडिया और श्रीलंका के बीच तीन वनडे सिरीज के पहला मुकाबले की शुरुआत बहुत निराशाजनक हुई. श्रीलंका ने टॉस जीत कर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया और उनकी गेंदबाजी ने मेजबान टीम की कमर तोड़ दी. आलम यह था कि 16.4 ओवरों में ही टीम इंडिया केवल 29 रनों के कुल स्कोर पर 7 बल्लेबाजों को वापस ड्रेसिंग रूम में बैठा देख रही थी.

टीम इंडिया के साथ ही दर्शकों और देशवासियों को क्रीज पर खड़े महेंद्र सिंह धोनी से उम्मीद थी क्योंकि टीम इंडिया इस नाजुक घड़ी में 50 रन का भी कुल स्कोर बनाती नहीं दिख रही थी. लेकिन धोनी ने अपने अनुभव का कमाल दिखाते हुए गेंदबाजों की नब्ज टटोली और उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया. वो गेंदबाजों की योजना के उलट खेलते रहे. 

इसका नतीजा यह हुआ कि गेंदबाज अपनी बनाई गई योजना को कायम नहीं रख सके और इस वक्त धोनी के दिमाग के खेल का शिकार बन गए. धोनी ने फिर गेंदबाजों को जमकर इधर-उधर दौड़ाया और आक्रामक दिखाई देने वाली श्रीलंका टीम को बैकफुट पर पहुंचा दिया.

इसके साथ ही उन्होंने पिछले कुछ वक्त से उनकी क्षमता पर सवाल उठाने वाले दिग्गजों की बोलती भी बंद कर दी और जब एक ओर करीब-करीब पूरी टीम इंडिया के खिलाड़ी दहाई का आंकड़ा पार करने में कामयाब होते नहीं दिखे, धोनी ने शानदार अर्धशतक जड़ा.

इसके साथ ही धोनी ने धर्मशाला स्टेडियम में मैच देखने आए दर्शक जो पारी की शुरुआत के साथ ही मायूस हो गए थे, उन्हें भी अपने छक्के-चौकों से खुशियां मनाने का मौका दिया. धोनी ने अपनी पारी में 87 गेंदों पर कुल 65 रन बनाए और 10 चौके व 2 छक्के जड़े.

टीम इंडिया की ओर से आखिरी विकेट महेंद्र सिंह धोनी के रूप में 38.2 ओवरों में 112 रन पर गिरा और टीम ने श्रीलंका को 113 रनों का लक्ष्य दिया. धोनी की इस पारी ने लेकिन एक बार यह साबित कर दिया कि वो वाकई टीम के संकट मोचक हैं और विकेट के आगे खड़े होकर वो गेंदबाजों के लिए परेशानी बनते हैं तो विकेट के पीछे खड़े होकर अंपायरों और विपक्षी टीम के लिए.

यह धोनी का अनुभव ही है जो उन्हें हर फॉर्मैट में न केवल बेहतर खेल दिखाने बल्कि विपक्षी टीम की साजिश समझने, नई रणनीति बनाने, लड़खड़ाती पारी के दौरान खेल में वापस आने और जीत के लिए पूरी टीम को तैयार करने का मौका देता है. धोनी मैदान पर न केवल अपने शरीर से मैच खेलते हैं बल्कि दिमाग का भी भरपूर इस्तेमाल करते हैं, जो एक अच्छे क्रिकेटर होने का सबूत है. 

रविवार को टीम इंडिया के कुल स्कोर 112 रन में एक तरफ अकेले धोनी ने 65 शानदार रन बनाए जबकि टीम इंडिया के बाकी 10 खिलाड़ी (2+0+9+0+2+10+0+19+0+0=) 42 रन ही बना सके. इस मैच ने यह भी साबित किया कि जब बुरा वक्त आता है तो टीम इंडिया का यह खिलाड़ी न केवल अपने बल्ले से विकेट के आगे खड़ा रहता है, बल्कि फिर पूरे 50 ओवर अपनी कमर झुकाकर विकेट के पीछे खड़ा रहता है और टीम का मार्गदर्शन करता रहता है.

First published: 10 December 2017, 15:00 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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