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MS Dhoni Retires: धोनी के वो पांच फैसले जिसने सभी को किया था हैरान, लेकिन टीम को मिली जीत

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 August 2020, 19:14 IST

एमएस धोनी ने भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की है. करीब एक दशक तक भारतीय टीम की कमान संभालने वाले धोनी ने अपने करियर के दौरान ऐसे कई फैसले लिए जिसके कारण सबको हैरानी हुई. कई बार धोनी के फैसले सही साबित हुए तो कई बार टीम को धोनी के इन फैसलों के कारण हार का सामना भी करना पड़ा. साल 2007 में टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप में जब पहली बार बॉल आउट खेला था जो धोनी ने तेज गेंदबाजों की जगह सहवाग, उथप्पा और भज्जी पर भरोसा जताया और तीनों ने गेंद विकेट में मारकर भारत को मैच में जीत दिलाई थी.

टी20 विश्व कप का फाइनल


साल 2007 में आईसीसी वर्ल्ड टी 20 के फाइनल का आखिरी ओवर धोनी ने जोगिंदर शर्मा को सौंप दिया, जबकि हरभजन सिंह का एक ओवर बचा हुआ था. पाकिस्तान और आखिरी ओवर में 13 रनों की आवश्यकता थी और उस समय क्रीज पर मिस्बाह-उल-हक थे,जो 35 गेंदों पर 37 * रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे

धोनी ने जोगिंदर के साथ जाने का इसलिए फैसला लिया क्योंकि मिस्बाह ने 17वें ओवर में हरभजन की तीन गेंद पर तीन छक्के लगाए थे. जोगिंदर ने ओवर की शुरूआत वाइड से की और उसके बाग उन्होंने एक डॉट गेंद फेंकी लेकिन अगली ही गेंद पर मिस्बाह ने सीधा छक्का मारा. इस छक्के के साथ भारतीयों की उम्मीद को झटका लगा लेकिन फिर जब मिस्बाह ने शॉर्ट-लेग के ऊपर से पैडल शॉट लगाने का फैसला लिया तो श्रीसंत के कैच पकड़ भारत को फाइनल मैच में जीत दिलाई.

सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ को ड्राप करना

साल 2008 में धोनी ने ऑस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए भारतीय टीम से सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ को ड्राप किया था. उनके इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी. जब इस बारे में सवाल पूछा गया, तब बीसीसीआई सचिव निरंजन शाह ने कहा था कि 'फील्डिंग क्षमताओं पर जोर दिया गया था और मुख्य चयनकर्ता और टीम प्रबंधन दौरे के लिए एक युवा फील्डर के पक्ष में थे.' यह वो समय था जब भारतीय टीम ने फील्डिंग को भी महत्व दिया था और इसके बाद फील्डिंग टीम इंडिया के लिए बल्लेबाजी और गेंदबाजी जैसी महत्वपूर्ण हो गई थी.

2011 विश्व कप में नंबर पांच पर बल्लेबाजी के लिए आना

साल 2011 का विश्व कप भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया था. इस मैच में सहवाग, तेंदुलकर और विराट कोहली जल्दी ही पवेलियन वापस लौट गए थे. गौतम गंभीर क्रीज पर मौजूद थे. इसके बाद धोनी ने फैसला लिया और वो खुद नंबर पांच पर बल्लेबाजी के लिए आए. उनका यह फैसला काफी हैरान कर देने वाला था. हालांकि, उनका फैसला सही साबित हुआ और गंभीर के साथ मिलकर उन्होंने टीम इंडिया को जीत का रास्ता दिखाया.

सहवाग, गंभीर और सचिन को रोटेट करने का फैसला

साल 2012 में ऑस्ट्रेलिया में हुई ट्राई सीरीज के दौरान धोनी ने सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर को रोटेट करने का फैसला लिया. इस फैसले को लेकर धोनी की काफी आलोचना हुई थी. धोनी का यह प्रयोग सफल तो नहीं हुआ लेकिन सेलेक्टर्स को एक बात समझ आ गई थी कि उन्हें ऐसे ओपनर चाहिए जो जरूरत पड़ने पर किसी भी पोजिशन पर खेल लें.

रोहित शर्मा को बतौर सलामी बल्लेबाज

साल 2013 धोनी के लिए विशेष था क्योंकि उसी साल वो टी 20 विश्व कप, विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीतने वाले एकमात्र कप्तान बन गए थे. उसी साल उन्होंने एक अहम फैसला लिया था और रोहित शर्मा को बतौर सलामी बल्लेबाज अपनाया था. ओपनर बनते ही रोहित शर्मा का करियर चमक गया और उन्होंने उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वो टीम इंडिया के महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.

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First published: 16 August 2020, 15:10 IST
 
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