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जब धोनी के छक्के ने 28 साल बाद भारत की झोली में डाला विश्वकप

विकाश गौड़ | Updated on: 2 April 2018, 11:44 IST

साल 2011, तारीख 2 अप्रैल और भारत का 28 साल का वर्ल्डकप जीतने का सूखा पूरा नहीं हो पा रहा था. महान क्रिकेटर कपिल देव की अगुवाई वाली टीम ने साल 1983 में वर्ल्डकप जीता था. भारत के लिए यह पहला और साल 2011 से पहले आखिरी वर्ल्डकप था. इस बीच 28 साल गुजर गए कई कप्तान आए, चले गए लेकिन भारत दूसरे वर्ल्डकप ट्रॉफी के लिए तरसता रहा.

इस दौरान खुद क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर 5 बार वर्ल्डकप खेल चुके लेकिन फिर भी टीम इंडिया विश्व विजेता नहीं बनी. हालांकि साल 2003 में टीम इंडिया सौरव गांगुली की अगुवाई में फाइनल में पहुंची लेकिन यहां भी भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा. लेकिन साल 2011 में 28 साल बाद एमएस धोनी की अगुवाई में भारत विश्व विजेता बना. 

इस वर्ल्डकप में सबसे ज्यादा योगदान सिक्सर किंग युवराज सिंह का था. युवराज ने इस वर्ल्डकप में बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी कमाल किया था और सचिन तेंदुलकर की ख्वाहिश पूरी की थी. हालांकि 2 अप्रैल 2011 को मुंबई के वानखेड़े में श्रीलंका के खिलाफ एमएस धोनी के हेलीकॉप्टर शॉट को याद रखा जाता है. बता दें कि धोनी ने लॉन्ग ऑन पर सिक्स लगाकर भारत के लिए इतिहास बनाया था.

इस बात को लेकर पूर्व क्रिकेटर और वर्तमान कोच सुनील गावस्कर कहते हैं कि अगर उनके जीवन में आखिरी 15 सेकेंड बचे हों और कोई उनसे आखिरी इच्छा पूछेगा तो वे 2 अप्रैल 2011 को एमएस धोनी के बल्ले से निकला हुआ छक्का देखना चाहेंगे. क्योंकि धोनी के इसी छक्के की बदौलत क्रिकेट जगत में भारत का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया था.

क्रिकेट के इतिहास में पहली बार था कि उप-महाद्वीप की दो टीमें वर्ल्डकप के फाइनल में थीं. इस वर्ल्डकप में भारत और श्रीलंका न सिर्फ कागज पर श्रेष्ठ टीमें थीं बल्कि मैदान पर भी दोनों टीमों का जलवा था. जहां भारत की टीम में सचिन तेदुंलकर, वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, एमएस धोनी और जहीर खान जैसे बड़े नाम थे तो वहीं, श्रीलंका की टीम तिलकरत्ने दिलशान, कुमार संगकारा, महेला जयवर्धने और लसिथ मलिंगा जैसे नाम थे.

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इस वर्ल्डकप के फाइनल में खास बात ये भी थी कि दोनों टीमों के कप्तान विकेटकीपर थे. इक तरफ महेंद्र सिंह धोनी थे तो दूसरी तरफ टीम की कमान कुमार संगकारा के हाथों में थी. भारत ने वर्ल्डकप का ये फाइनल 6 विकेट से जीत कर 28 सालों के बाद दूसरी बार आईसीसी क्रिकेट वर्ल्डकप अपने नाम कर लिया. इसके बाद सभी ने सचिन तेंदुलकर को अपने कंधों पर उठाकर ग्रांउड में घुमाया था. 

बता दें कि साल 2011 वर्ल्डकप के फाइनल मुकाबले में भारत को इतिहास रचने के लिए 11 गेंदों पर महज 4 रन की जरूरत थी. इस वक्त क्रीज पर टीम इंडिया के कप्तान एमएस धोनी मौजूद थे और गेंदबाज थे नुवान कुलसेकरा. धोनी ने 49वें ओवर की दूसरी गेंद को लॉन्ग ऑन के ऊपर से एक शानदार छक्का जड़ा और भारत में दीवाली शुरू हो गई. टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों के अलावा तमाम फैंस भी भावुक हो गए.

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श्रीलंका के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी और ऐतिहासिक फाइनल मुकाबले में 50 ओवर खेलकर 6 विकेट के नुकसान पर 274 रन बनाए थे, जिसे भारत ने 10 गेंद शेष रहते ही 4 विकेट खोकर 277 रन बना कर मैच जीत लिया. इस पारी में श्रीलंका के दिग्गज महेला जयवर्धने ने नाबाद शतकीय पारी खेली थी. महेला ने 103 रन बनाए थे. 

बता दें कि 275 रनों का पीछा करते हुए टीम इंडिया की शुरुआत बेहद खराब रही क्योंकि पहले वीरेंद्र सहवाग पारी की दूसरी गेंद पर मलिंगा की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए. तुरंत सहवाग ने रिव्यू लिया ने तीसरे अंपायर ने जांच के बाद उन्हें आउट करार दे दिया. उसके बाद सचिन तेंदुलकर भी 18 रन बनाकर लासिथ मलिंगा का शिकार हो गए.

इस बीच भारत में आधे से ज्यादा टीवी सेट्स बंद कर दिए गए. इसके बाद मोर्चा गौतम गंभीर और अपना पहला वर्ल्डकप खेल रहे विराट कोहली ने संभाला और भारत को 100 रन के पार पहुंचाया लेकिन दिलशान की गेंद पर विराट भी 35 रन के निजी स्कोर पर उन्हीं को कोच दे बैठे.

 

इसके बाद एमएस धोनी आए, जो सभी के लिए चौंकाने वाला रहा क्योंकि पूरे वर्ल्डकप में युवराज सिंह उनसे पहले बल्लेबाजी करने उतरे थे और अच्छी फॉर्म में भी थे. ये फैसला कितना सही था ये उन्होंने खुद प्रूफ किया.

धोनी ने गंभीर के साथ 109 रन की शानदार साझेदारी कर मैच इंडिया की तरफ मोड़ दिया. लेकिन गंभीर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से 91 रन के निजी स्कोर पर आउट हो गए. इसके बाद युवराज और कैप्टन कूल का साथ मैच को फिनिश कर टीम इंडिया को वर्ल्डकप जिताकर ही लौटे हालांकि विनिंग शॉट धोनी के बल्ले से ही निकला.

देखें धोनी का वो विनिंग शॉट

First published: 2 April 2018, 11:44 IST
 
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